TRENDING TAGS :
सरकारी नौकरी का पूरा ‘फैमिली पैकेज’! JPSC-JSSC घोटाले में मास्टरमाइंड के भाई-भाभी गिरफ्तार, CID ने खोली पूरी कुंडली
Jharkhand Abhay Tiwari Sister in Law-Brother Arrested: झारखंड के JPSC-JSSC मेधा घोटाले में CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी को गिरफ्तार किया है।
Jharkhand Abhay Tiwari Sister in Law-Brother Arrested: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में हुए करोड़ों के मेधा घोटाले में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को सीआईडी (CID) ने अब तक की सबसे बड़ी और नाटकीय कार्रवाई की है। परीक्षाओं का संचालन करने वाली विवादित एजेंसी 'टीडीपीएल' (TDPL) के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी के पूरे फर्जीवाड़े के सिंडिकेट को सीआईडी ने ध्वस्त कर दिया है। सीआईडी की विशेष जांच टीम ने दोपहर में सीधी दबिश देकर मास्टरमाइंड अभय तिवारी के सगे भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी को गिरफ्तार कर लिया।
घर के सदस्यों को बांटी जा रही थीं सरकारी नौकरियां
सीआईडी की गहन तफ्तीश में जो तथ्य निकलकर सामने आए हैं, उन्होंने पूरे प्रशासनिक तंत्र के होश उड़ा दिए हैं। मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने अपनी सेटिंग और पैसे के दम पर न केवल खुद परीक्षा में टॉप किया, बल्कि अपने परिवार और रिश्तेदारों को भी ऊंचे पदों पर बिठा दिया। गिरफ्तार भाई अक्षय तिवारी JSSC CGL परीक्षा पास कर महिला एवं बाल विकास विभाग में तैनात था और उसने हाल ही में 14वीं JPSC की पीटी (PT) परीक्षा भी निकाल ली थी। वहीं उसकी पत्नी सुष्मिता तिवारी (सुषमा कुमारी) भी फर्जीवाड़े से CGL पास कर वित्त विभाग में मलाईदार पद पर नौकरी कर रही थी।
एक पोस्टर ने खोल दिए फर्जीवाड़े के तमाम राज
इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ 10 अगस्त को छात्रों द्वारा किए गए विधानसभा घेराव के दौरान हुआ था। आंदोलनकारी युवाओं ने हाथ में एक पोस्टर लहराया था, जिसके केंद्र में अभय तिवारी की तस्वीर थी और चारों तरफ उसके उन 12 से अधिक रिश्तेदारों के नाम थे, जिन्हें पैसों के दम पर ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) बनाया गया था। इस पोस्टर में अभय के भाई, पत्नी, साले, साढू के बेटे, मौसेरे भाई और बहनोई के भतीजे तक की सूची दर्ज थी। सीआईडी ने पोस्टर के सभी तथ्यों का मिलान किया और कड़ियां जुड़ते ही यह बड़ी गिरफ्तारी हो गई।
अभय ने उगले सिंडिकेट के सच
सीआईडी मुख्यालय में हुई कड़ाई से पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने कबूला कि परीक्षाओं में खुलेआम रुपयों के बल पर धांधली होती थी। कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को रिमोट एक्सेस लेकर बाहर से हल कराया जाता था, जबकि ओएमआर (OMR) शीटों में हेराफेरी करके बैकडोर से अंक बढ़ा दिए जाते थे। इसी सिंडिकेट के दम पर उसने अपने दर्जनभर से ज्यादा रिश्तेदारों को बिना योग्यता के सरकारी अफसर बनवा दिया था। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को मेडिकल जांच के बाद अदालत में पेश कर रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है।
मेधा घोटाले में अब तक 25 गिरफ्तारियां
इस महा-घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सफेदपोश चेहरों से नकाब उतरता जा रहा है। जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते, पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी और टीडीपीएल के डायरेक्टर रामवीर सिंह समेत सीआईडी अब तक कुल 25 बड़े गुनहगारों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने वाले अभय तिवारी के अन्य सभी रिश्तेदारों की सूची तैयार कर ली गई है और आने वाले दिनों में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होना तय है।


