Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए विदेश मंत्रालय ने जारी की चयन सूची, वेबसाइट पर चेक कर सकेंगे स्टेट

Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए 1,000 यात्रियों का चयन कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के जरिए किया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ड्रॉ निकाला। यात्रा जून से अगस्त तक 20 बैचों में लिपुलेख और नाथू ला मार्ग से होगी।

Newstrack/IANS
Published on: 21 May 2026 7:59 PM IST (Updated on: 21 May 2026 7:59 PM IST)
Kailash Mansarovar Yatra 2026
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Kailash Mansarovar Yatra 2026 (Image Credit-Social Media)

Kailash Mansarovar Yatra 2026: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कैलाश मानसरोवर यात्रा (केएमवाई) 2026 के लिए यात्रियों के चयन को लेकर एक कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ निकाला। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, 1000 यात्रियों को इसके लिए चुना गया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, "विदेश मंत्री ने आज कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ ऑफ लॉट्स निकाला। चुने गए यात्रियों को हार्दिक बधाई और उनकी तीर्थयात्रा सफल होने की कामना करता हूं।'

केएमवाई का 2026 सत्र जून में शुरू होगा और अगस्त में खत्म होगा। कुल 1000 यात्रियों को एक फेयर, कंप्यूटर से बनी, रैंडम, जेंडर-बैलेंस्ड सिलेक्शन प्रक्रिया से चुना गया है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि चुने गए यात्री 20 बैच में यात्रा करेंगे, हर बैच में 50 यात्री होंगे और वे लिपुलेख और नाथू ला दर्रे से होकर जाएंगे। दोनों रास्ते अब पूरी तरह से मोटरेबल हैं और इनमें बहुत कम ट्रेकिंग करनी पड़ती है। रास्ते और बैच की जानकारी यात्रा वेबसाइट पर उपलब्ध है।

चुने गए यात्रियों को एसएमएस और ईमेल से सिलेक्शन के बारे में नोटिफिकेशन भेज दिए गए हैं। यात्री अपने सिलेक्शन का स्टेटस चेक करने के लिए यात्रा वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं, या हेल्पलाइन नंबर 011-23088214 पर डायल कर सकते हैं।

भारत और चीन के बीच गलवान विवाद को लेकर 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा रोकी गई थी। हालांकि, 2025 में दोनों देशों ने आपसी सुलह के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने की मंजूरी दी थी।

जून से लेकर अगस्त 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा निकाली गई थी, जिसमें 5 बैच के हर बैच में 50 यात्री शामिल रहे और 10 बैच के हर बैच में 50 यात्री शामिल हुए। इन्हें उत्तराखंड राज्य से लिपुलेख दर्रे को पार करके और सिक्किम राज्य से नाथू ला दर्रे को पार करके यात्रा कराई गई।

बता दें, हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लिपुलेख रूट को लेकर नेपाल ने ऐतराज जताया था। नेपाल की बालेंद्र शाह सरकार का कहना है कि भारत और चीन के लिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने के लिए लिपुलेख की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

हालांकि, इस पर भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से भी बयान सामने आया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा था, "इस बारे में भारत का रुख एक जैसा और साफ रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना रास्ता रहा है और इस रास्ते से यात्रा दशकों से होती आ रही है। यह कोई नई बात नहीं है। जहां तक इलाके के दावों की बात है, भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। इलाके के दावों को इस तरह एकतरफा बनावटी तरीके से बढ़ाना सही नहीं है।"

Shweta Srivastava

Shweta Srivastava

Content Writer

मैं श्वेता श्रीवास्तव 15 साल का मीडिया इंडस्ट्री में अनुभव रखतीं हूँ। मैंने अपने करियर की शुरुआत एक रिपोर्टर के तौर पर की थी। पिछले 9 सालों से डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्यरत हूँ। इस दौरान मैंने मनोरंजन, टूरिज्म और लाइफस्टाइल डेस्क के लिए काम किया है। इसके पहले मैंने aajkikhabar.com और thenewbond.com के लिए भी काम किया है। साथ ही दूरदर्शन लखनऊ में बतौर एंकर भी काम किया है। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एंड फिल्म प्रोडक्शन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। न्यूज़ट्रैक में मैं लाइफस्टाइल और टूरिज्म सेक्शेन देख रहीं हूँ।

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