4 दिन बाद फिर खुला Kailash Mansarovar यात्रा का रास्ता! भूस्खलन से बंद रूट को BRO ने किया बहाल

Kailash Mansarovar Yatra Route: उत्तराखंड में भूस्खलन से बंद हुआ कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग फिर बहाल हो गया है। बीआरओ ने दिन-रात काम कर मलबा हटाया और सड़क को दोबारा चालू किया। अब तीर्थयात्रियों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 12 July 2026 1:40 PM IST
Kailash Mansarovar Yatra Route Reopens
X

Kailash Mansarovar Yatra Route Reopens

Kailash Mansarovar Yatra Route: उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रा का रूट एक बार फिर बहाल कर दिया गया है। इस अहम मार्ग को बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (Border Roads Organisation-BRO) की मदद से दोबारा चालू किया गया। 10 जुलाई को हुए भूस्खलन (Landslide) की वजह से यह रास्ता बंद हो गया था, जिससे यात्रा भी रुक गई थी। अब बीआरओ की प्रोजेक्ट हीराक (Project Hirak) टीम ने लगातार दिन-रात काम करके मलबा हटाया और सड़क को फिर से यात्रियों के लिए खोल दिया है।

दिन-रात मेहनत कर हटाया गया मलबा

बीआरओ ने बताया कि 10 जुलाई को पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भूस्खलन होने के बाद प्रोजेक्ट हीराक की टीम ने बिना समय गंवाए राहत और बहाली का काम शुरू कर दिया। टीम के सभी सदस्य लगातार मौके पर डटे रहे और बिना रुके मलबा हटाने का काम किया। कड़ी मेहनत के बाद सड़क को फिर से बहाल कर दिया गया।

रास्ता बंद होने की वजह से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी रुक गई थी। अब सड़क दोबारा चालू होने के बाद तीर्थयात्रियों के वाहन फिर से इस मार्ग पर आवाजाही करने लगे हैं। बीआरओ के मुताबिक सड़क की मरम्मत भी पूरी कर ली गई है और फिलहाल रास्ता सुचारू रूप से चालू है।

सीमावर्ती इलाकों में लगातार काम कर रही है BRO

बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराया है। संगठन का कहना है कि उसकी टीमें सीमाओं को जोड़ने, स्थानीय समुदायों की सेवा करने और कठिन परिस्थितियों में भी धार्मिक यात्राओं को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही हैं।

कौन कर सकता है कैलाश मानसरोवर यात्रा?

कैलाश मानसरोवर यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है। हर साल सैकड़ों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। इसके अलावा यह यात्रा जैन (Jain) और बौद्ध (Buddhist) धर्म के अनुयायियों के लिए भी विशेष महत्व रखती है।

यह यात्रा उन योग्य भारतीय नागरिकों (Indian Citizens) के लिए खुली है, जिनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट (Indian Passport) है और जो धार्मिक उद्देश्य से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा करना चाहते हैं।

5 जुलाई को रवाना हुआ था पहला जत्था

बीती 5 जुलाई को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (Chief Minister) पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने चंपावत (Champawat) जिले के टनकपुर (Tanakpur) स्थित टूरिस्ट रेस्ट हाउस (Tourist Rest House) से कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 के पहले जत्थे को रवाना किया था।

तीर्थयात्रियों को रवाना करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश सरकार हर श्रद्धालु की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के 49 भक्तों को यात्रा पर रवाना करना उनके लिए भावुक पल है। हर साल इस यात्रा का आयोजन किया जाता है और सरकार की कोशिश रहती है कि सभी तीर्थयात्रियों की यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक रहे।

मुख्यमंत्री ने बताया था कि कुमाऊं मंडल विकास निगम (Kumaon Mandal Vikas Nigam), जिला प्रशासन (District Administration), स्वास्थ्य विभाग (Health Department) और पुलिस विभाग (Police Department) पूरी यात्रा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती इलाकों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) को बढ़ावा देगी और तीर्थयात्रियों को स्थानीय संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को करीब से जानने और समझने का अवसर भी मिलेगा।

Aditya Kumar Verma
ABOUT THE AUTHOR

Aditya Kumar Verma

Content Writer Mail ID - adityakumarverma993@gmail.comadityakumarverma993@gmail.com

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

Next Story