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Karnataka Congress: शपथ के 48 घंटे बाद ही संकट में शिवकुमार सरकार! ये दिग्गज मंत्री दे सकते है इस्तीफा, कर्नाटक कांग्रेस में फिर घमासान
Ramalinga Reddy Resignation: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार में विभागों के बंटवारे के साथ ही आंतरिक कलह शुरू हो गई है। बेंगलुरु शहरी विकास विभाग न मिलने से नाराज 8 बार के सीनियर विधायक रामलिंगा रेड्डी मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
Ramalinga Reddy Resignation: कर्नाटक की राजनीति में पैर पसारते ही नई सरकार के भीतर एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में बनी नई कैबिनेट में मंत्रियों को विभाग बंटते ही कांग्रेस पार्टी के अंदर का आपसी झगड़ा खुलकर सड़कों पर आ गया है। पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार और आठ बार के कद्दावर विधायक रामलिंगा रेड्डी खुद को मिले विभाग से बेहद नाराज चल रहे हैं। नई सरकार की कैबिनेट में रेड्डी को वृहद एवं मध्यम सिंचाई विभाग यानी पानी से जुड़े महकमे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जो उन्हें बिल्कुल रास नहीं आई। सूत्रों की मानें तो उनकी नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि वे मंत्री पद से अपना इस्तीफा तक दे सकते हैं।
बेंगलुरु की कमान न मिलने से फूटा गुस्सा
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह मनमुताबिक विभाग न मिलना है। दरअसल, रामलिंगा रेड्डी लंबे समय से 'बेंगलुरु शहरी विकास' विभाग की मांग कर रहे थे और इस पर अपनी पूरी कमान चाहते थे। लेकिन मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उनकी इस मांग को दरकिनार करते हुए यह बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ब्याटरायनपुरा के विधायक कृष्णा बायरे गौड़ा की झोली में डाल दी। इसके बदले रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग थमा दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से सीधे तौर पर मना कर दिया। बेंगलुरु जैसे बड़े शहर का जिम्मा न मिलने से आहत रेड्डी ने आज सुबह 9 बजे एक बहुत जरूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें वे बड़ा फैसला ले सकते हैं।
महज 48 घंटों में सरकार पर गहराया संकट
अगर रामलिंगा रेड्डी आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट मंत्री के पद से अपने इस्तीफे का ऐलान कर देते हैं, तो यह शिवकुमार सरकार के लिए बहुत शर्मिंदगी की बात होगी। मंत्रियों के शपथ ग्रहण के महज 48 घंटों के भीतर ही नई नवेली सरकार के लिए यह पहला और सबसे करारा राजनीतिक झटका साबित होगा। आठ बार के सीनियर विधायक का इस तरह बगावती तेवर अपनाना कांग्रेस आलाकमान के लिए भी सिरदर्द बन गया है। अब पूरे कर्नाटक प्रदेश की निगाहें रेड्डी की प्रेस वार्ता पर टिकी हैं कि क्या वे सरकार का साथ छोड़ेंगे या पार्टी उन्हें मनाने में कामयाब रहेगी।


