कर्नाटक में कमज़ोर पड़ा कांग्रेस का 'पावर वॉर'! राहुल-खरगे की कोशिशें नाकाम, CM कुर्सी पर 'वादे' बनाम 'वास्तविकता' की खींचतान तेज

Karnataka Congress power struggle: डीके शिवकुमार के करीबी नेताओं का कहना है कि पार्टी को चुनाव के दौरान किए गए वादों का सम्मान करना चाहिए। वहीं सिद्धारमैया खेमे का तर्क है कि सरकार स्थिर है और किसी परिवर्तन की ज़रूरत नहीं है।

Priya Singh Bisen
Published on: 16 Feb 2026 1:22 PM IST (Updated on: 16 Feb 2026 1:23 PM IST)
Karnataka Congress power struggle
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Karnataka Congress power struggle (photo: social media)

Karnataka Congress power struggle: कर्नाटक की सियासत में कांग्रेस के अंदर नेतृत्व बदलाव को लेकर चल रही उठापटक एक बार फिर से सुर्खियों में है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सुलह के तमाम प्रयासों के बाव भी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच पावर शेयरिंग को लेकर असमंजस खत्म नहीं हो पाया है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व के कई दौर की बैठकों के बाद भी कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया, जिससे सियासी अटकलों का बाजार गर्म है।

ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला फिर चर्चा में

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद से ही यह चर्चा रही कि मुख्यमंत्री पद को लेकर 'ढाई-ढाई साल' का फार्मूला तय हुआ था। पहले ढाई साल सिद्धारमैया और उसके बाद शिवकुमार को जिम्मेदारी दिए जाने की बात राखी गई थी। हालांकि, इस पर कभी आधिकारिक मुहर नहीं लगी। अब जब कार्यकाल का आधा वक़्त गुजरने की तरफ है, तो नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं।

डीके शिवकुमार के करीबी नेताओं का कहना है कि पार्टी को चुनाव के दौरान किए गए वादों का सम्मान करना चाहिए। वहीं सिद्धारमैया खेमे का तर्क है कि सरकार स्थिर है और किसी परिवर्तन की ज़रूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में संकेत दिया कि फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

हाईकमान की भूमिका पर खड़े हुए सवाल

सूत्रों का कहना हैं कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दिल्ली में कई स्तरों पर बैठकें हुईं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से भी दोनों नेताओं ने मुलाकात की। हालांकि, बैठकों के बाद भी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। इससे यह संदेश गया कि हाईकमान फिलहाल कोई जल्दबाजी में फैसला लेने के मूड में नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में किसी भी तरह की टूट या बगावत से बचना चाहता है। राज्य दक्षिण भारत में पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से आवश्यक है, इसलिए नेतृत्व परिवर्तन जैसे संवेदनशील फैसले पर सतर्कता ज़रूर बरती जा रही है।

विधायकों के बयानों से बढ़ी हलचल

कर्नाटक कांग्रेस के कुछ विधायकों और नेताओं के बयान ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी है। शिवकुमार समर्थक खेमे से जुड़े नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह उम्मीद जताई कि तय वक़्त आने पर वादे निभाए जाएंगे। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद मौजूद हैं।

हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह आंतरिक मामला है और इसे संगठनात्मक स्तर पर सुलझाया जाएगा। पार्टी प्रवक्ताओं ने दावा किया है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और विपक्ष अनावश्यक रूप से भ्रम फैला रहा है।

विपक्ष की नजर कर्नाटक पर

भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझ रही है और इसका प्रभाव शासन पर पड़ रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, यदि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अनिश्चितता लंबी खिंचती है, तो इसका प्रभाव प्रशासनिक फैसलों और आगामी चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखे और सरकार की कार्यशैली पर फोकस करे।

अब आगे क्या?

कर्नाटक की राजनीति में यह संकट किस दिशा में जाएगा, आगामी कुछ ही महीनों में स्पष्ट हो जायेगा। अगर पार्टी हाईकमान कोई समझौता फार्मूला निकालता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है। अन्यथा, आंतरिक खींचतान भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकती है।

फिलहाल इतना तय है कि कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही रस्साकशी थमने का नाम नहीं ले रही। राज्य की सियासत पर पूरे देश की नजर है और आने वाले फैसले न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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