कर्नाटक कांग्रेस में दो फाड़! सिद्धारमैया ने कुर्सी छोड़ने से किया साफ इनकार, दिल्ली में हलचल तेज

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचा विवाद, लिंगायत और एससी-एसटी विधायकों की बैठकें और सत्ता संतुलन को लेकर चल रही रणनीति का पूरा हाल।

Shivam
Published on: 6 Feb 2026 5:56 PM IST
कर्नाटक कांग्रेस में दो फाड़! सिद्धारमैया ने कुर्सी छोड़ने से किया साफ इनकार, दिल्ली में हलचल तेज
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कर्नाटक की सियासी गलियारों में खींचतान तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच विवाद लंबे समय से जारी है। शिवकुमार समर्थकों का आरोप है कि सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री बनने के समय आधे कार्यकाल के बाद पद छोड़ने का वादा किया था, लेकिन अब वह इससे पीछे हटते दिख रहे हैं। दूसरी ओर, सिद्धारमैया इस तरह के किसी वादे से साफ इनकार कर चुके हैं।

सत्ता विवाद अब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व यानी राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे तक पहुंच गया है। कई प्रयास किए गए, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आई। चर्चा यह भी हुई कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री पद सौंप सकते हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ।

तीसरा मोर्चा उभरता दिखा

हाल ही में एससी-एसटी और लिंगायत समुदाय के विधायकों की अलग-अलग बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में विधायकों ने संकेत दिए कि उनके समुदाय से किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए या कम से कम कैबिनेट में अधिक मंत्री पद दिए जाएं। सोमवार को लिंगायत विधायकों की बैठक राज्य उद्योग मंत्री एमबी पाटिल की अध्यक्षता में हुई, जबकि मंगलवार शाम एससी-एसटी वर्ग की बैठक राज्य गृहमंत्री जी परमेश्वर के आवास पर आयोजित हुई।

सियासी रणनीति और दबाव

सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों का मकसद अपने-अपने समुदाय की ताकत दिखाकर कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाना है। कहा जा रहा है कि एमबी पाटिल और जी परमेश्वर सिद्धारमैया खेमे से जुड़े हैं और इन बैठकों के जरिए शिवकुमार गुट को संतुलित करने और पद छोड़ने के दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।

प्रतिनिधित्व का मुद्दा

एमबी पाटिल ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक सामान्य बैठक थी और सत्ता परिवर्तन या व्यक्तिगत एजेंडे से इसका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि लिंगायत समुदाय राज्य का सबसे बड़ा समूह है और इसके 34 विधायक हैं, इसलिए उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

जातिगत समीकरण

डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के प्रमुख नेता हैं, जो राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। दूसरी ओर, सबसे बड़ी संख्या लिंगायत समुदाय की है और एससी-एसटी समुदाय भी काफी संख्या में है। ऐसे में इन दोनों वर्गों की विधायकों की बैठकें यह संकेत देती हैं कि सिद्धारमैया शिवकुमार को सियासी दबाव से बचाने और संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपना रहे हैं।

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Shivam is a multimedia journalist.

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