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कर्नाटक में बड़ा खेल? राहुल से मुलाकात के बाद ये क्या बोल गए डीके, खतरे में है सिद्धारमैया की कुर्सी?
DK Shivakumar meets Rahul Gandhi: कर्नाटक में राजनीतिक सस्पेंस तेज! DK शिवकुमार ने राहुल गांधी से की गुपचुप मुलाकात, सिद्धारमैया की मुख्यमंत्री कुर्सी पर खतरा बढ़ा, आगामी बदलाव पर नजर।
DK Shivakumar meets Rahul Gandhi: कर्नाटक की राजनीति इस वक्त उस ज्वालामुखी की तरह नजर आ रही है, जो कभी भी फट सकता है। कहने को तो दक्षिण के इस अहम राज्य में कांग्रेस की सरकार मजबूती से चल रही है, लेकिन पर्दे के पीछे जो 'पावर गेम' चल रहा है, उसने दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सस्पेंस की परतें और गहरी होती जा रही हैं। रविवार को दिल्ली के गलियारों में कुछ ऐसा हुआ जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस आलाकमान के साथ एक लंबी बैठक की और बाहर निकलते ही सिर्फ तीन शब्द कहे "समय जवाब देगा।" इन तीन शब्दों ने सिद्धारमैया खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं। आखिर क्या है वो राज जिसे डीके शिवकुमार समय के भरोसे छोड़ रहे हैं?
दावोस का दौरा रद्द और दिल्ली में गुपचुप मुलाकात
डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा और उनकी रहस्यमयी टिप्पणी इसलिए भी ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है क्योंकि उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 (डावोस) का अपना बेहद महत्वपूर्ण दौरा अचानक रद्द कर दिया। जब पूरी दुनिया के नेता और कारोबारी स्विट्जरलैंड में जुट रहे थे, तब कर्नाटक के 'संकटमोचक' कहे जाने वाले डीके दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बंद कमरे में रणनीति बना रहे थे। जब पत्रकारों ने उनसे इस अचानक हुए बदलाव और लीडरशिप में बदलाव को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं इस मुलाकात के बारे में कुछ नहीं बता सकता। उन्होंने यह भी कहा कि राजनेता राजनीति के लिए ही दिल्ली आते हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
'अच्छी खबर' का इंतजार या फिर बगावत की आहट?
डीके शिवकुमार का यह कहना कि "जब अच्छी खबर होती है, तो हम उसके बारे में बात नहीं करते," कई नए संकेत दे रहा है। अभी तक डीके खुलकर मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करते रहे हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने अपना फैसला आलाकमान और वक्त की चाल पर छोड़ दिया है। इससे पहले 16 जनवरी को भी उनकी राहुल गांधी से लंबी बात हुई थी। सूत्रों की मानें तो कर्नाटक में 'ढाई-ढाई साल' के फॉर्मूले पर चर्चा दोबारा शुरू हो गई है। शिवकुमार ने साफ तौर पर कहा कि वे जनता के लिए काम करने वाले लोग हैं और नेतृत्व परिवर्तन जैसे गंभीर मामलों पर सार्वजनिक चर्चा नहीं करते। उनकी चुप्पी और ये रहस्यमयी मुस्कान बता रही है कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर कोई बड़ा पकवान पक रहा है।
कर्नाटक की सत्ता का वो 'सीक्रेट' समझौता
कर्नाटक में सरकार बनने के समय से ही यह चर्चा आम है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता के बंटवारे का कोई गुप्त समझौता हुआ है। अब चूंकि सरकार को बने हुए अच्छा खासा समय बीत चुका है, इसलिए शिवकुमार समर्थक अब बदलाव की मांग कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी आलाकमान फिलहाल इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहा है। शिवकुमार ने कहा कि हम दिल्ली सरकारी काम और पार्टी के काम से आते हैं, लेकिन उनके हाव-भाव कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, क्योंकि 'समय' अब अपना जवाब देने के बेहद करीब है।


