बैलेट पेपर पर चुनाव, फिर भी कांग्रेस को बड़ा झटका! जेडीएस ने छीनी सीट, जानें कितने मिले वोट

MLC Election Result: कर्नाटक एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पुटन्ना को हराया, जबकि भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने अब तक दो सीटों पर जीत दर्ज की है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 28 Oct 2026 8:17 AM IST
Karnataka MLC Election Result
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MLC Election Result: कर्नाटक में एमएलसी चुनाव के नतीजे घोषित किए जा रहे हैं और कांग्रेस (Congress) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी एक सीट जनता दल सेक्युलर यानी जेडीएस (JDS) के हाथों गंवा चुकी है। खास बात यह है कि जिस बैलेट पेपर (Ballot Paper) से चुनाव कराने की मांग कांग्रेस लगातार करती रही है, उसी से हुए चुनाव में हार के बाद जेडीएस ने कांग्रेस पर तंज कस दिया है।

राज्य के कुल चार निर्वाचन क्षेत्रों (Constituencies) में मतदान हुआ था। अभी सभी सीटों के नतीजे घोषित नहीं हुए हैं और मतगणना (Counting) जारी है। अब तक दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जेडीएस गठबंधन (BJP-JDS Alliance) जीत दर्ज कर चुका है।

जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पुटन्ना को हराया

बैलेट पेपर से हुए चुनाव में जेडीएस नेता एपी रंगनाथ (A P Ranganath) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (Bengaluru Teachers Constituency) में कांग्रेस के एमएलसी पुटन्ना (Putanna) को हरा दिया। एपी रंगनाथ को कुल 10 हजार 810 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी पुटन्ना को 9 हजार 902 वोट ही हासिल हो सके।

इस तरह रंगनाथ ने कांग्रेस प्रत्याशी को 908 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। वहीं, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (North-East Teachers Constituency) से भाजपा के शशिल जी नामजोशी (Shashil G Namjoshi) ने जीत दर्ज कर ली है।

कांग्रेस पर जेडीएस नेता ने कसा तंज

कर्नाटक के इन नतीजों के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी (Nikhil Kumaraswamy) ने कांग्रेस और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर निशाना साधा। कांग्रेस लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाती रही है। ऐसे में बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस की हार को लेकर जेडीएस ने तंज कसा है।

निखिल कुमारस्वामी ने लिखा, 'राहुल गांधी सर, ईवीएम पर आरोप नहीं लगा पाएंगे इसबार। राज्य की मशीनरी आपके हाथों में है और पेपर बैलेट्स से हुए थे।'

उन्होंने आगे लिखा, 'इसके बाद भी एनडीए के श्री एपी रंगनाथ बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एमएलसी चुनाव जीत गए। अब जब पढ़े लिखे शिक्षकों ने आपकी सरकार की नाक के नीचे पेपर पर वोट किया है, तो आज क्या बहाना देंगे। पेपर चोरी का? एपी रंगनाथ और भाजपा और जेडीएस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं।'

खास बात यह भी है कि कांग्रेस पहले कर्नाटक में जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना चुकी है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सियासी रिश्तों का पुराना इतिहास भी रहा है।

बेंगलुरु शिक्षक सीट पर 81.98 प्रतिशत मतदान

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार 81.98 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस सीट पर कुल 27 हजार 405 मतदाता थे, जिनमें से 22 हजार 468 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

मतगणना के दौरान कुल 21 हजार 56 मत वैध पाए गए, जबकि 1 हजार 857 मतों को अवैध घोषित किया गया। इसी चुनाव में जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पुटन्ना को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की।

बेंगलुरु की दूसरी सीट पर भी भाजपा आगे

कर्नाटक एमएलसी चुनाव की मतगणना अभी जारी है और दो अन्य क्षेत्रों में भी भाजपा के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए बताए जा रहे हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट (South-East Graduates Constituency) पर भी कांग्रेस को झटका लग सकता है।

इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार केएम सुरेश (K M Suresh) कांग्रेस के शशि हुलिकुंते मठ (Shashi Hulikumte Math) से आगे चल रहे हैं। वहीं उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर भाजपा के शशिल जी नामजोशी पहले ही जीत दर्ज कर चुके हैं।

पश्चिम स्नातक सीट पर भी भाजपा की बढ़त

पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (West Graduates Constituency) में भाजपा के मौजूदा एमएलसी एसवी संकनूर (S V Sankanur) आगे चल रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई (Mohan Limbikai) से है।

दूसरे दौर की मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा उम्मीदवार एसवी संकनूर ने कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिंबिकाई पर पहली वरीयता के 3 हजार 556 मतों की बढ़त बना ली थी। संकनूर को 12 हजार 613 वोट मिले थे, जबकि लिंबिकाई के खाते में 9 हजार 57 वोट आए थे। उस समय तक करीब 28 हजार मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी।

कांग्रेस के लिए क्यों माना जा रहा है डबल झटका?

कर्नाटक के एमएलसी चुनाव के इन नतीजों को कांग्रेस के लिए दोहरा झटका माना जा रहा है। एक तरफ राज्य में कांग्रेस की सरकार है और दूसरी तरफ पार्टी को विधान परिषद की इन सीटों पर चुनावी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य में लंबे समय से चली आ रही कथित राजनीतिक तनातनी के बीच हाल ही में डीके शिवकुमार (डीके शिवकुमार) ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच एमएलसी चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए अहम माने जा रहे हैं।

इसके अलावा एसआईआर (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के विरोध के बीच कांग्रेस लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। ऐसे में बैलेट पेपर से हुए कर्नाटक एमएलसी चुनाव में कांग्रेस की एक सीट हारना और कुछ अन्य सीटों पर भाजपा का आगे रहना पार्टी के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असम में भी बैलेट पेपर को लेकर कांग्रेस पर हुआ था हमला

बैलेट पेपर को लेकर कांग्रेस पर पहले भी राजनीतिक हमला हो चुका है। अक्टूबर की शुरुआत में असम (Assam) के सिलचर नगर निगम चुनाव (Silchar Municipal Corporation Election) में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था।

उस समय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि पार्टी बैलेट पेपर पर भी चुनाव नहीं जीत सकती। उन्होंने कहा था कि जब चुनाव बैलेट पेपर पर होते हैं, तब कांग्रेस और ज्यादा चुनाव हारती है।

अब कर्नाटक में बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद जेडीएस ने इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। हालांकि, कर्नाटक की सभी चार सीटों के अंतिम नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं और मतगणना जारी है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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