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डीके, इट्स डन ब्रो! कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, BJP ने गजब अंदाज में CM की ली चुटकी
कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि बीजेपी और जेडीएस ने सभी सीटों पर जीत हासिल की।
Karnataka MLC Election Results: कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। राज्य में सत्ता संभाल रही कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सहयोगी जनता दल सेक्युलर (JDS) ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। इस नतीजे के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधा और सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर शेयर कर कांग्रेस पर तंज कसा। वहीं, जेडीएस ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपों को लेकर सवाल उठाए हैं।
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद बीजेपी की राज्य इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इसके साथ पार्टी ने लिखा, 'DK, इट्स डन, ब्रो! NDA ने शिक्षकों और स्नातकों के चारों निर्वाचन क्षेत्रों में क्लीन स्वीप कर लिया।"' इस पोस्ट के जरिए बीजेपी ने कांग्रेस की हार को लेकर शिवकुमार पर निशाना साधा। तस्वीर में डीके शिवकुमार के सिर पर गेंदे के फूल दिखाई दे रहे हैं। यह फोटो फरवरी 2023 की है, जब शिवकुमार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की ओर से पेश किए गए राज्य के बजट के विरोध में विधानसभा परिसर विधान सौधा के अंदर अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया था।
चारों सीटों पर BJP-JDS का कब्जा
कर्नाटक विधान परिषद की जिन चार सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे।
इनमें से तीन सीटों पर बीजेपी ने अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस से छीनकर जेडीएस ने जीत लिया। इस तरह बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जेडीएस ने मिलकर चारों सीटों पर जीत हासिल की।
यह नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद थी कि वह अपनी मौजूदा सीट बचाने के साथ दूसरी सीटों पर भी बेहतर प्रदर्शन करेगी। लेकिन नतीजे उसकी उम्मीदों के उलट रहे और चारों सीटें विपक्षी गठबंधन के खाते में चली गईं।
बेंगलुरु में जेडीएस ने कांग्रेस को हराया
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस के उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने जीत दर्ज की। उन्हें बीजेपी का समर्थन हासिल था। रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। पुट्टन्ना इस चुनाव में दोबारा जीत हासिल करने के लिए मैदान में उतरे थे।
इस सीट पर जीत के साथ जेडीएस ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया। बीजेपी और जेडीएस के बीच चुनावी तालमेल का भी इस नतीजे में अहम योगदान माना जा रहा है। दोनों दलों ने एक-दूसरे के उम्मीदवारों के समर्थन में काम किया और इसका फायदा विपक्षी गठबंधन को मिला।
मल्लिकार्जुन खरगे के गढ़ में बीजेपी की जीत
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मौजूदा एमएलसी शशिल जी. नामोशी ने कांग्रेस के उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को हरा दिया। अधिकारियों के मुताबिक, नामोशी ने इस सीट से पांचवीं बार जीत हासिल की है।
यह निर्वाचन क्षेत्र इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि इसमें कलबुर्गी शामिल है। कलबुर्गी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र है। ऐसे इलाके से बीजेपी उम्मीदवार की जीत ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बीजेपी ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वहीं, कांग्रेस को यहां भी सफलता नहीं मिली। चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि शिक्षकों और स्नातकों के इन निर्वाचन क्षेत्रों में इस बार विपक्षी गठबंधन का प्रदर्शन सत्ताधारी पार्टी से बेहतर रहा।
राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपों पर JDS का पलटवार
चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद जेडीएस की युवा इकाई के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि जब चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल ही नहीं हुआ, तब कांग्रेस अपनी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएगी?
निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि इस चुनाव में ईवीएम को दोष देने की गुंजाइश नहीं थी। राज्य की सत्ता कांग्रेस के हाथ में है और चुनाव मतपत्रों के जरिए कराया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब कांग्रेस अपनी हार के लिए 'पेपर चोरी' का आरोप लगाएगी?
उनकी यह टिप्पणी राहुल गांधी की ओर से चुनावों में वोट चोरी को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों के संदर्भ में थी। जेडीएस नेता ने इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम हैं ये नतीजे?
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और ऐसे में विधान परिषद की चार सीटों पर हार पार्टी के लिए राजनीतिक झटका है। कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह कम से कम अपनी मौजूदा सीट बचा लेगी और अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति बेहतर करेगी। लेकिन चारों सीटें गंवाने के बाद बीजेपी और जेडीएस को सरकार पर हमला करने का नया मौका मिल गया है।
विपक्ष अब इन नतीजों को कांग्रेस की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ताकत पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। वहीं, बीजेपी और जेडीएस के लिए यह जीत गठबंधन की एकजुटता दिखाने का अवसर है।


