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कर्नाटक में पलटा पासा! चुनावी नतीजों के शोर के बीच BJP का बड़ा धमाका, हारा प्रत्याशी बना एमएलए
Sringeri Seat Result: देशभर की नजरें आज केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव नतीजों पर टिकी हैं, लेकिन इन सियासी हलचलों के बीच कर्नाटक से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है।
Sringeri Seat Result
Sringeri Seat Result: देशभर की नजरें आज केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव नतीजों पर टिकी हैं, लेकिन इन सियासी हलचलों के बीच कर्नाटक से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। श्रृंगेरी विधानसभा सीट पर हुए नाटकीय घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डीएन जीवराज को अब आधिकारिक रूप से विधायक घोषित कर दिया गया है, जबकि वे 2023 का चुनाव हार चुके थे। यह पूरा घटनाक्रम कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती के बाद सामने आया है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर दोबारा शुरू हुई वोटों की गिनती
दरअसल, 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टीडी राजे गौड़ा ने इस सीट से महज 201 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इस करीबी मुकाबले के बाद बीजेपी उम्मीदवार डीएन जीवराज ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लंबी सुनवाई के बाद 6 अप्रैल को हाईकोर्ट ने पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्रों) के पुनर्सत्यापन और दोबारा गिनती का आदेश दिया।हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार वोटों की दोबारा गिनती शुरू हुई, जो देर रात तक चली। इस पुनर्गणना ने चुनाव परिणाम को पूरी तरह बदल दिया। पहले की गिनती में पोस्टल बैलेट के जरिए जीवराज को 692 और राजे गौड़ा को 569 वोट मिले थे। लेकिन दोबारा गिनती में जीवराज के वोट मामूली घटकर 690 रह गए, जबकि राजे गौड़ा के वोटों में भारी गिरावट आई और उनके वैध पोस्टल वोट घटकर सिर्फ 314 रह गए।
डीएन जीवराज को श्रृंगेरी सीट से निर्वाचित घोषित
इसका मतलब यह हुआ कि राजे गौड़ा के कुल 255 पोस्टल बैलेट को अवैध घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी 201 वोटों की बढ़त खत्म हो गई और जीवराज आगे निकल गए। इस बदलाव के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और चुनाव नियम 1961 के तहत आधिकारिक घोषणा करते हुए डीएन जीवराज को श्रृंगेरी सीट से निर्वाचित घोषित कर दिया। इस फैसले के साथ ही मई 2023 से विधायक रहे कांग्रेस के टीडी राजे गौड़ा की सदस्यता समाप्त हो गई। बीजेपी ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है।
हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। राजे गौड़ा और उनके समर्थकों का कहना है कि पोस्टल बैलेट के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने दावा किया कि उनके पक्ष में पड़े कई मतपत्रों पर अलग स्याही से निशान लगाए गए हैं और जिन्हें पहले वैध माना गया था, उन्हें अब अवैध घोषित कर दिया गया। इस विवाद को लेकर राजे गौड़ा के काउंटिंग एजेंट रहे सुधीर कुमार मुरोली ने चिक्कमगलुरु पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 255 मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ की गई है और इस मामले में संबंधित अधिकारियों और बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ जांच की मांग की गई है।
इस घटनाक्रम के बीच एक दिलचस्प स्थिति भी सामने आई, जब शनिवार को ही राजे गौड़ा और उनके समर्थकों ने खुद को विजेता मानते हुए जश्न मना लिया था, लेकिन देर रात आए अंतिम नतीजों ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी। श्रृंगेरी सीट का यह मामला भारतीय चुनाव प्रणाली में पोस्टल बैलेट की भूमिका और पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद का अंतिम निष्कर्ष क्या निकलता है और क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होती है।


