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CISF जवान ने साथियों पर क्यों चलाई गोलियां? 4 की मौत के बीच 15 साल का ये आंकड़ा कर देगा हैरान
Kathua CISF Firing: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में CISF जवान की फायरिंग में 4 जवानों की मौत हो गई। घटना के बीच 15 साल में ऐसी घटनाओं में 24 से ज्यादा जवानों की मौत का आंकड़ा सामने आया।
Image Source- Social Media
Kathua CISF Firing: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ (CISF) के एक जवान ने अपने ही साथियों पर गोली चला दी। मंगलवार शाम करीब 7.30 बजे हुई इस घटना में चार जवानों की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी जवान अभिदेश कुमार सिंह को कठुआ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद सीआईएसएफ (CISF) मुख्यालय ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (Court of Inquiry) के आदेश दिए हैं।
मारे गए जवानों में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार शामिल हैं। ये सभी जवान हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली के पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे।
पत्नी और बच्चे को रोकने पर भड़का जवान
जानकारी के मुताबिक, घटना से पहले आरोपी जवान अभिदेश कुमार सिंह की पत्नी पूजा और उसके बच्चे को क्वार्टर गार्ड (Quarter Guard) में आने को लेकर विवाद हुआ था। इसी बात को लेकर कांस्टेबल हेडक्वार्टर ऑफिसर मेस सेक्शन पहुंचा, जहां उस समय चार जवान मौजूद थे।
इसके बाद अभिदेश ने अपनी सरकारी एके-47 राइफल (AK-47 Rifle) से वहां मौजूद जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से वहां अफरा-तफरी मच गई। इस फायरिंग में चार जवानों की जान चली गई।
साथियों ने आरोपी को पुलिस के हवाले किया
गोलीबारी के बाद वहां मौजूद अन्य जवानों ने आरोपी अभिदेश कुमार सिंह को काबू कर लिया। इसके बाद उसे कठुआ पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
अभिदेश कुमार सिंह 2009 बैच का जवान है। घटना के बाद सीआईएसएफ (CISF) मुख्यालय ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (Court of Inquiry) कराने के आदेश दिए हैं। जांच के दौरान घटना से जुड़े पूरे घटनाक्रम और गोलीबारी की वजह का पता लगाया जाएगा।
बसोहली पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे जवान
जिन जवानों पर गोली चलाई गई, वे बसोहली के पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। यह पावर प्रोजेक्ट रावी नदी पर बनाया गया है। इसकी शुरुआत 1993 में हुई थी।
साल 2013 में आई बाढ़ में पावर प्रोजेक्ट का करीब 300 मीटर लंबा हिस्सा बह गया था। इसके बाद से यह प्रोजेक्ट पूरी तरह बंद है। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के लिए जवानों की तैनाती की गई थी।
पहले भी सामने आती रही हैं ऐसी घटनाएं
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (Central Armed Police Forces) में जवानों द्वारा खुदकुशी करने या अपने साथियों पर हमला करने जैसी घटनाओं के कारणों को समझने के लिए अक्टूबर 2021 में गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने एक टास्क फोर्स (Task Force) बनाई थी।
इन घटनाओं को लेकर कई बार समीक्षा भी कराई गई। साल 2022 में लोकसभा में सरकार ने ऐसी घटनाओं के पीछे सामने आए कुछ कारणों की जानकारी दी थी। इनमें छुट्टी नहीं मिलने के कारण मानसिक परेशानी और कार्यस्थल से जुड़ा तनाव जैसी वजहें शामिल थीं।
छोटी बात या बहस के बाद आपा खोने के मामले
गृह मंत्रालय के मुताबिक, कुछ मामलों की जांच और समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि जवानों के बीच किसी मामूली बात या बहस के बाद वे अपना आपा खो देते हैं। ऐसी परिस्थितियां कभी-कभी गंभीर घटनाओं में बदल जाती हैं।
इसके अलावा परिवार से लंबे समय तक दूर रहना और लगातार कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करना भी जवानों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर असर डाल सकता है। सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ऐसी घटनाओं के पीछे व्यक्तिगत और घरेलू समस्याओं, पारिवारिक विवाद, डिप्रेशन (Depression), काम से जुड़ी परेशानियों और छोटी-छोटी बातों पर आपा खोने जैसी वजहों का भी जिक्र किया है।
15 साल में 24 से ज्यादा जवानों की मौत
सरकार ने संसद में बताया था कि पिछले 15 साल के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों में इस तरह की घटनाओं में 24 से ज्यादा जवानों की मौत हुई है। इन घटनाओं के कारणों को लेकर गृह मंत्रालय की ओर से समीक्षा और अध्ययन भी कराया गया है।
कठुआ की ताजा घटना में भी शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विवाद पत्नी और बच्चे को क्वार्टर गार्ड में आने से रोकने को लेकर शुरू हुआ था। इसके बाद अभिदेश कुमार सिंह ने सरकारी एके-47 से फायरिंग कर दी। अब पुलिस की जांच और सीआईएसएफ की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी से इस पूरी घटना के बाकी पहलुओं की जानकारी सामने आने का इंतजार है।


