Kerala CM: केरल में CM की कुर्सी के लिए कांग्रेस में रार, राहुल के OBC कार्ड पर भारी पड़ा 'नायर' समीकरण

Kerala Congress CM Race: केरल में CM कुर्सी को लेकर कांग्रेस में घमासान! राहुल गांधी का OBC कार्ड क्या नायर समीकरण के आगे पड़ गया कमजोर? जानिए KC वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला के बीच चल रही सत्ता की अंदरूनी लड़ाई का पूरा गणित।

Harsh Srivastava
Published on: 12 May 2026 10:04 AM IST (Updated on: 12 May 2026 10:04 AM IST)
Kerala CM: केरल में CM की कुर्सी के लिए कांग्रेस में रार, राहुल के OBC कार्ड पर भारी पड़ा नायर समीकरण
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Kerala Congress CM Race: देश की राजनीति में कांग्रेस के लिए चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बीजेपी का बढ़ता प्रभाव और लगातार चुनावी हार तो एक तरफ है, लेकिन कांग्रेस के लिए असली मुसीबत तब शुरू होती है जब वह कोई चुनाव जीत जाती है। इतिहास गवाह है कि चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर जो घमासान मचता है, वह पार्टी की जड़ें हिला देता है। कर्नाटक का नाटक अभी दुनिया भूली नहीं थी कि अब केरल में भी वैसी ही स्थिति पैदा हो गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जो हुआ, अब वही पटकथा केरल में दोहराई जा रही है।

तीन चेहरे और एक कुर्सी का पेचीदा मुकाबला

केरल में मुख्यमंत्री की रेस में तीन दिग्गज नेता आमने-सामने हैं: केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला। रमेश चेन्नीथला सबसे अनुभवी और वरिष्ठ हैं, जबकि वीडी सतीशन को पिछले पांच सालों में केरल में कांग्रेस को फिर से जीवित करने का श्रेय दिया जाता है। वहीं केसी वेणुगोपाल गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली दरबार की पहली पसंद वेणुगोपाल ही हैं, लेकिन जमीन पर सतीशन का पलड़ा भारी है। उम्र के लिहाज से तीनों में ज्यादा अंतर नहीं है वेणुगोपाल 63 साल के हैं, सतीशन 62 के और चेन्नीथला 70 के करीब पहुंच रहे हैं।

जातीय समीकरणों में उलझा 'ओबीसी' का मुद्दा

राहुल गांधी पिछले तीन सालों से पूरे देश में 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' का नारा बुलंद कर रहे हैं। वे लगातार ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) को हक दिलाने की बात करते हैं, लेकिन केरल में कांग्रेस का यह एजेंडा खुद पार्टी के लिए सिरदर्द बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री पद के तीनों ही दावेदार 'नायर' समुदाय से आते हैं, जो केरल में सवर्ण माना जाता है। केरल की आबादी में नायर समाज सिर्फ 12 फीसदी है, जबकि 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे पिनाराई विजयन इड़ावा समुदाय से आते हैं, जो एक बड़ा ओबीसी वर्ग है। अब सवाल यह है कि अगर तीनों दावेदार सवर्ण हैं, तो राहुल गांधी का ओबीसी वाला मुद्दा केरल में कैसे फिट होगा?

केरल की राजनीति और सामाजिक संतुलन का इतिहास

1957 से अब तक केरल में जातियों का खेल बहुत दिलचस्प रहा है। अब तक 12 मुख्यमंत्रियों में से 9 हिंदू रहे हैं, जिनमें से 6 सवर्ण (5 नायर और 1 ब्राह्मण) और केवल 3 ओबीसी रहे हैं। कांग्रेस ने पहले ईसाई समुदाय से एके एंटनी और ओमन चांडी जैसे कद्दावर मुख्यमंत्री दिए हैं। केरल की 54.73 फीसदी हिंदू आबादी में 21.60 फीसदी इड़ावा और 14.90 फीसदी नायर हैं। इसके अलावा 26 फीसदी मुस्लिम और 18 फीसदी ईसाई मतदाता हार-जीत तय करते हैं। ऐसे में किसी एक समुदाय को तवज्जो देना कांग्रेस के लिए सामाजिक संतुलन बिगाड़ सकता है।

सतीशन बनाम वेणुगोपाल: बगावत के सुर

असली विवाद वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के बीच है। वीडी सतीशन के समर्थकों द्वारा वेणुगोपाल के खिलाफ पोस्टरबाजी और प्रदर्शन ने आलाकमान को नाराज कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि 15 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सतीशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हाल में वेणुगोपाल का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन महासचिव होने के नाते वेणुगोपाल विधायकों पर दबाव बना रहे हैं।

दिल्ली में मथपच्ची और राहुल का सख्त संदेश

दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे के घर हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ किया कि पार्टी दबाव में कोई फैसला नहीं लेगी। राहुल इस बात से बेहद खफा हैं कि कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर पार्टी की छवि खराब की। अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और सतीशन की दलीलों के बीच कांग्रेस अब एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहां एक तरफ 'वफादारी' है और दूसरी तरफ 'जनादेश' का सम्मान।

Harsh Srivastava

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