सबने बहुत टॉर्चर....",आंखों में दिखा सिस्टम का दर्द, Khan Sir का ये सपना हुआ चकनाचूर

Khan Sir University Project: खान सर का कोईलवर में यूनिवर्सिटी बनाने का सपना अधूरा रह गया। जमीन मालिकों की कीमत बढ़ोतरी के कारण खरीदी गई जमीन अब बेची जा रही है।

Akriti Pandey
Published on: 21 Feb 2026 1:37 PM IST (Updated on: 21 Feb 2026 2:08 PM IST)
Khan Sir University Project
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Khan Sir University Project

Khan Sir University Project: पिछले दिनों सोशल मीडिया पर खबरें आई थीं कि बिहार के चर्चित शिक्षक Khan Sir कोईलवर में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदकर वहां एक विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी बनाने की योजना बना रहे हैं। बताया गया था कि उन्होंने खुद रजिस्ट्री के लिए ऑफिस भी पहुंचकर जमीन की खरीदारी शुरू की थी और कुछ एकड़ की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी भी हो गई थी।

1000 एकड़ में बनाने का था विशाल कैंपस

खान सर(Khan Sir) ने बताया कि उनका यह प्रोजेक्ट केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि पूरे इलाके के विकास का विजन था। लगभग 1000 एकड़ जमीन में एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और उच्च स्तरीय सुविधाओं से लैस कैंपस बनाना उनकी योजना थी। शुरुआती चरण में कई जमीन मालिकों से बातचीत की गई और मार्केट रेट से अधिक कीमत पर सौदा तय किया गया। एडवांस राशि भी सभी मालिकों को दे दी गई थी, और 10–15 एकड़ की रजिस्ट्री पूरी भी हो चुकी थी।

जमीन बेचने का फैसला

हालांकि अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। खान सर ने बताया कि जैसे ही यह खबर फैली कि कोईलवर में बड़ी यूनिवर्सिटी बनने वाली है, जमीन मालिकों ने अचानक कीमतें कई गुना बढ़ा दीं। एडवांस लेने के बावजूद कई मालिकों ने रजिस्ट्री से इंकार कर दिया। खान सर के अनुसार, जमीन मालिकों को जैसे ही पता चला कि उनके क्षेत्र में यूनिवर्सिटी बन रही है, उन्होंने जमीन के रेट दस गुना तक बढ़ा दिए।

खान सर(Khan Sir) का कहना है कि मार्केट रेट से पहले ही कई गुना अधिक कीमत चुकाई जा चुकी थी और सब कुछ फाइनल हो चुका था। केवल समय की कमी के कारण रजिस्ट्री बाकी थी। लेकिन इस मजबूरी का फायदा उठाते हुए जमीन मालिकों ने तय रेट पर रजिस्ट्री करने से मना कर दिया।

यूनिवर्सिटी का सपना अधूरा

इन परिस्थितियों के चलते खान सर ने यूनिवर्सिटी बनाने का सपना स्थगित कर दिया है और अब खरीदी गई जमीन बेचने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि क्षेत्र के विकास और शिक्षा के लिए यह प्रोजेक्ट महत्वाकांक्षी था, लेकिन हालात की जटिलताओं के कारण इसे आगे बढ़ाना असंभव हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला परिस्थितियों के दबाव में किया गया है, न कि योजना की असफलता के कारण।

Akriti Pandey

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