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अरुणाचल बॉर्डर पर चीन के कब्जे का AI वीडियो! किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर तीखा हमला, सेना ने खोली फर्जी दावे की पोल
अरुणाचल प्रदेश में चीन के कब्जे का दावा करने वाला AI वीडियो सेना ने फर्जी बताया। किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए माफी की मांग की। जानें भारत-चीन सीमा तनाव का पूरा मामला।
India-China Border Tension: भारत-चीन सीमा पर तनाव और अरुणाचल प्रदेश में चीनी गतिविधियों को लेकर संवेदनशील दावों के बीच फर्जी AI वीडियो ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर सेना की छवि खराब करने और चीन के कथित दुष्प्रचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए देश से माफी मांगने की मांग की है। वहीं, भारतीय सेना के फैक्ट-चेक हैंडल ने वीडियो को डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया हुआ बताते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के नाम से झूठे बयान जोड़े गए हैं।
रिजिजू के इस हमले ने भारत-चीन सीमा की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। हालांकि, वीडियो में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर कब्जे और भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने के दावे को सेना ने खारिज किया है। ऐसे में वास्तविक सीमा विवाद और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे अपुष्ट दावों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है।
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से क्यों मांगा जवाब?
अरुणाचल प्रदेश से सांसद और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने सेना से जुड़े फर्जी AI वीडियो को फैलाकर देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर भ्रामक प्रचार किया है।
रिजिजू ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस दुश्मन के दुष्प्रचार का समर्थन करने के बाद भी देश से माफी नहीं मांगेगी? उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए कांग्रेस के रवैये पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि सेना की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।
मंत्री ने इससे पहले भी वीडियो को लेकर कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की थी। हालांकि, इन आरोपों को राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए; वीडियो को लेकर तथ्यात्मक स्थिति भारतीय सेना के फैक्ट-चेक से स्पष्ट होती है।
सेना ने AI वीडियो को बताया फर्जी, क्या है पूरा मामला?
विवादित वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आया था। आरोप है कि इसे बिहार के एक कांग्रेस नेता ने पोस्ट किया। वीडियो में एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के हवाले से दावा किया गया कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के असफिला, लोंगजू और टकसिंग सर्कल के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही भारतीय सेना को जरूरी सामान नहीं मिलने की बात भी कही गई।
भारतीय सेना के 'इंडियन आर्मी फैक्ट चेक' हैंडल ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि वीडियो को डिजिटल तरीके से बदला गया है और उसमें कृत्रिम रूप से तैयार की गई सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। सेना के मुताबिक, वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम से ऐसे बयान जोड़े गए, जो उन्होंने कभी नहीं दिए।
सेना ने स्पष्ट किया कि भ्रामक वीडियो को इस तरह पेश किया गया, मानो किसी वरिष्ठ अधिकारी ने चीन के कब्जे और सेना की आपूर्ति संबंधी समस्याओं को लेकर कोई गोपनीय जानकारी सार्वजनिक की हो। लेकिन उपलब्ध मूल फुटेज में इस तरह का कोई बयान नहीं है।
2023 की प्रेस ब्रीफिंग का इस्तेमाल कर बनाया गया भ्रामक वीडियो
सेना के फैक्ट-चेक के अनुसार, वायरल वीडियो का मूल फुटेज 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई प्रेस ब्रीफिंग का है। उस समय मेजर जनरल गिरीश कालिया 28 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) थे।
सेना ने बताया कि मूल प्रेस ब्रीफिंग में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के इलाकों पर कब्जे या भारतीय सैनिकों को आवश्यक सामान नहीं मिलने जैसी बातें नहीं कही गई थीं। वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर अधिकारी के नाम से झूठे दावे जोड़ दिए गए।
भारत-चीन सीमा पर तनाव की असली स्थिति क्या है?
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा विवाद लंबे समय से बना हुआ है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आया था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में सैन्य तैनाती, बुनियादी ढांचे के विकास और सीमा पर शांति बनाए रखने को लेकर दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत हुई।
अक्टूबर 2024 में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में सैनिकों की गश्त और वापसी की व्यवस्था को लेकर समझौता किया था। इसके बाद इन क्षेत्रों में सहमति के अनुसार गश्त फिर शुरू होने की खबरें आईं। इस घटनाक्रम को सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया, लेकिन इससे दोनों देशों का व्यापक सीमा विवाद समाप्त नहीं हुआ।
अरुणाचल प्रदेश भी भारत-चीन संबंधों का संवेदनशील मुद्दा है। चीन राज्य के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि भारत अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा मानता है। चीन की ओर से भारतीय क्षेत्रों और स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों का भी भारत ने लगातार विरोध किया है।
ITBP प्रमुख के बयान से भी उठा था सीमा का मुद्दा
पिछले सप्ताह भारत-चीन सीमा को लेकर उस समय चर्चा तेज हुई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में सीमा के कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना होने की बात कही थी।
सीमा पर गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों का आमना-सामना होना और किसी क्षेत्र पर कब्जा हो जाना दो अलग स्थितियां हैं। इसलिए इस बयान को वायरल AI वीडियो में किए गए कब्जे के दावे की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता।
AI वीडियो से राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस क्यों तेज हुई?
सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर AI की मदद से तैयार या बदले गए वीडियो गलत सूचनाओं को तेजी से फैलाने का माध्यम बन सकते हैं। किसी सैन्य अधिकारी की वास्तविक प्रेस ब्रीफिंग में झूठे बयान जोड़कर उसे असली बताना लोगों को भ्रमित कर सकता है और संवेदनशील सीमा विवाद पर गलतफहमी बढ़ा सकता है।
इस मामले में सेना ने मूल फुटेज और वायरल वीडियो के बीच अंतर स्पष्ट किया है। इसके बावजूद वीडियो को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से माफी की मांग की है।


