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कृति के कपड़ों पर मचा बवाल, CJP के अभिजीत दिपके बोले, 'भारत बहस में उलझा, चीन ने...'
Kriti Sanon Rakhi Ad Controversy: कृति सेनन के GIVA विज्ञापन पर विवाद के बीच CJP के अभिजीत दिपके ने भारत की बहस की तुलना चीन के रोबोट से की।
Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad Controversy: कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर छिड़ी बहस अब सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गई है। इसी विवाद पर Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने भारत में महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली बहस की तुलना चीन की रोबोटिक्स में प्रगति से की है।
दीपके की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ज्वेलरी ब्रांड GIVA के रक्षाबंधन कैंपेन में कृति सेनन के पहनावे और विज्ञापन की थीम को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस चल रही है। विवाद बढ़ने के बाद कृति सेनन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अभिनेत्री के समर्थन में पोस्ट किया।
कृति सेनन के विज्ञापन विवाद पर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “जब भारत अभी भी इस बहस में उलझा है कि हमारी महिलाओं को क्या पहनना चाहिए, वहीं चीन ने ऐसा रोबोट बना लिया है जो इंसानों से तेज दौड़ता है।”
दीपके का यह बयान देखते ही देखते चर्चा में आ गया। उन्होंने सीधे तौर पर कृति सेनन के विज्ञापन विवाद का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका पोस्ट उसी समय सामने आया जब GIVA के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर महिलाओं के पहनावे और त्योहारों की मर्यादा पर बहस तेज थी।
उनका तंज मूल रूप से इस सवाल पर केंद्रित था कि भारत में सार्वजनिक बहस का एक हिस्सा महिलाओं के कपड़ों पर क्यों अटक जाता है, जबकि दुनिया के दूसरे देश तकनीक और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
क्या है कृति सेनन के Raksha Bandhan Ad का विवाद?
GIVA के करीब 36 सेकंड के रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन इंडो-वेस्टर्न लुक में नजर आती हैं। उन्होंने ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी है। विज्ञापन में वह अपने भाई और पालतू कुत्ते के साथ रक्षाबंधन मनाती दिखाई देती हैं।
विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने कृति के पहनावे को लेकर सवाल उठाए। आलोचकों का कहना था कि पारंपरिक त्योहार रक्षाबंधन पर आधारित विज्ञापन में इस तरह का आउटफिट उपयुक्त नहीं है।
विज्ञापन में कृति का अपने पालतू कुत्ते को राखी बांधना भी बहस का विषय बन गया।
कंगना रनौत ने भी साधा निशाना
विवाद में अभिनेत्री और राजनेता कंगना रनौत की एंट्री के बाद मामला और गरमा गया। कंगना ने कृति के पहनावे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार के विज्ञापन में इस तरह के कपड़ों का इस्तेमाल क्यों किया गया।
कंगना की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कृति सेनन के समर्थन और विरोध में बहस और तेज हो गई।
कृति सेनन ने दिया करारा जवाब
शुरुआत में विवाद पर चुप रहने के बाद कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए।
कृति ने कहा कि संस्कृति और परंपराएं किसी महिला के कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके दिल और भावनाओं से जुड़ी होती हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि समय के साथ एथनिक फैशन बदला है, लेकिन महिलाओं के पहनावे को उनकी संस्कृति और सम्मान से जोड़ना अब भी जारी है।
कृति ने रक्षाबंधन के अर्थ को कपड़ों तक सीमित करने पर भी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक त्योहार की असली भावना कपड़ों में नहीं बल्कि रिश्तों, भावनाओं और परंपराओं में होती है।
कृति ने कुत्ते को राखी बांधने का भी किया बचाव
कृति सेनन ने विज्ञापन में अपने पालतू कुत्ते को शामिल किए जाने का भी बचाव किया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और उनके लिए उनके पालतू कुत्ते भी परिवार का हिस्सा हैं।
कृति के मुताबिक रक्षाबंधन सुरक्षा, प्यार और एक-दूसरे की सलामती की कामना का त्योहार है और यह भावना उनके परिवार में पालतू जानवरों तक भी जुड़ी हुई है।
राहुल गांधी ने किया कृति सेनन का समर्थन
विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृति सेनन की प्रतिक्रिया को शेयर करते हुए उनके समर्थन में लिखा कि एक महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद है।
राहुल गांधी ने इसके साथ #SmashThePatriarchy हैशटैग का भी इस्तेमाल किया।
इससे विज्ञापन को लेकर शुरू हुई सोशल मीडिया बहस महिला अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सोच की बहस में बदल गई।
विवाद के बीच GIVA ने वापस लिया विज्ञापन
लगातार हो रही आलोचना के बीच ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने विज्ञापन वापस लेने का ऐलान किया। कंपनी ने कहा कि वह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का सम्मान करती है और अगर विज्ञापन से किसी की भावनाएं अनजाने में आहत हुई हैं तो उसे इसका खेद है।
हालांकि विज्ञापन वापस लिए जाने के बावजूद इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में कलाकारों के पहनावे को लेकर सामाजिक अपेक्षाएं तय की जानी चाहिए, या आधुनिक विज्ञापन में व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और फैशन को भी जगह मिलनी चाहिए?
इसी बहस के बीच अभिजीत दीपके का चीन के रोबोट से जुड़ा तंज सोशल मीडिया पर चर्चा का नया मुद्दा बन गया है।


