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अब लद्दाख को लेकर भारत का बड़ा कदम...ये नक्शा देखकर लग सकती है ड्रैगन को मिर्ची!
Ladakh Map Update: अरुणाचल प्रदेश के बाद गृह मंत्रालय ने लद्दाख की 28 रणनीतिक जगहों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर चिह्नित किया है। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे अहम इलाके शामिल हैं।
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Ladakh Map Update: अरुणाचल प्रदेश के बाद अब लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिस पर चीन की नजर जाना तय माना जा है। दरअसल गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को लद्दाख में मौजूद 28 रणनीतिक स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर औपचारिक रूप से चिह्नित किया है। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी (LAC) पर मौजूद गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे प्रमुख सीमा गतिरोध वाले स्थान भी शामिल हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से इन जगहों को दिखाने वाला एक नक्शा भी जारी किया गया है। सरकार के मुताबिक, यह कदम लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद उठाया गया है। इसका मकसद आधिकारिक नक्शा-निर्माण को व्यवस्थित करना, इन स्थानों की सटीक पहचान आसान बनाना और संवेदनशील सीमावर्ती इलाके को लेकर लोगों में बेहतर जागरूकता पैदा करना है।
अब आधिकारिक नक्शे पर लद्दाख की 28 जगहें
गृह मंत्रालय के मुताबिक, भारत सरकार ने लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ सलाह-मशविरे के बाद भारतीय सर्वेक्षण विभाग यानी एसओआई (Survey of India) के आधिकारिक नक्शे पर लद्दाख की कुल 28 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं की पहचान उनके मानक नामों के साथ की है।
सरकार ने कहा है कि इन स्थानों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग के लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मानचित्र पर औपचारिक रूप से पहचान देने का मकसद इनकी सटीक पहचान सुनिश्चित करना और लोगों में इनके बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
इस सूची में एलएसी (LAC) से जुड़े महत्वपूर्ण इलाके भी शामिल हैं। गोगरा और हॉट स्प्रिंग को खास तौर पर प्रमुख रणनीतिक स्थानों में शामिल किया गया है।
गोगरा और हॉट स्प्रिंग क्यों हैं अहम?
गोगरा और हॉट स्प्रिंग पूर्वी लद्दाख के प्रमुख रणनीतिक स्थानों में शामिल हैं। साल 2020 में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुए सैन्य गतिरोध के दौरान ये दोनों इलाके टकराव वाले स्थान रहे थे। ये भारतीय सेना की गश्त (Patrolling) के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध की शुरुआत 5 मई 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद हुई थी। इसके बाद दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने रहीं। दोनों पक्षों ने 2022 में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
अब गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाकों को आधिकारिक भारतीय नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ चिह्नित किया गया है।
इन जगहों को भी किया गया दर्ज
लद्दाख में आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर जिन 28 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को चिह्नित किया गया है, उनमें अलीशा गिरी (ऊंचाई वाली चोटी), ब्रांगसा, चैपचिंगल दर्रा, कनिष्क चोटी, करुण पीर पर्वत, कुकसेल, मार्तंड गिरी, पारपिक ग्लेशियर, स्कमरी ग्लेशियर, शचमिरिक दर्रा, श्कोर्गा घाटी, जोरावर चोटी, देहरा कंपास और द्रक कार्पो शामिल हैं।
इसके अलावा जोलमोरी, कुमारायण पॉइंट, पांगलुंग, रिनचेन जांगपो, शाक्यश्री गिरी, गुरु रिनपोचे, शामल लुंगपा, यांगपा नदी, मारपा लोत्सावा री, मिलारेपा कांगरी, शिव री और महेश्वर री को भी आधिकारिक मानचित्र पर चिह्नित किया गया है।
शामल लुंगपा को 1950 के दशक में गश्त और सैनिकों की तैनाती के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्ग के तौर पर बताया गया है। इस तरह इस सूची में ऊंची चोटियों, दर्रों, ग्लेशियरों, घाटियों और अन्य भौगोलिक विशेषताओं के साथ रणनीतिक महत्व वाले स्थान भी शामिल हैं।
अरुणाचल के बाद लद्दाख में भी बड़ा कदम
लद्दाख में यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब इससे पहले अगस्त में गृह मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश में भी इसी तरह 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं का नामकरण किया था। इन स्थानों का नक्शा भी जारी किया गया था।
उस समय चीन की ओर से इस कदम पर आपत्ति जताई गई थी। अब लद्दाख में 28 स्थानों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर चिह्नित किए जाने के बाद भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े नामकरण और मानचित्र को लेकर चल रही तनातनी एक बार फिर चर्चा में है।
चीन पर क्यों उठ रहे सवाल?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कई स्थानों के लिए मंदारिन नाम तय किए हैं। इसे चीन की मानचित्र संबंधी आक्रामकता (Cartographic Aggression) से जोड़कर देखा जाता है।
चीन का कहना है कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश तिब्बत का हिस्सा हैं और वह इन भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा करता है। वहीं, जगहों के नाम बदलने की चीन की प्रक्रिया को लेकर विश्लेषकों का कहना है कि इसका मकसद उन इलाकों पर अपने दावे को मजबूत करना और उन्हें अपने नामों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।
तक्षशिला इंस्टीट्यूशन के जियोस्ट्रेटेजी प्रोग्राम की एसोसिएट फेलो अनुष्का सक्सेना ने फर्स्टपोस्ट से कहा कि चीन दूसरे देशों और सरकारों के इस्तेमाल में चीनी नाम शामिल करवाने की कोशिश करता है, ताकि संबंधित इलाकों को मुख्य भूमि के हिस्से के तौर पर याद किया जाए। उनके मुताबिक, चीन नाम बदलने की प्रक्रिया का इस्तेमाल उन गतिविधियों के जवाब में भी करता है, जिन्हें वह अपनी तथाकथित रेड लाइन्स (Red Lines) का उल्लंघन मानता है।
सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है नामकरण अभियान
चीन का यह नामकरण अभियान सिर्फ भारत से जुड़े इलाकों तक सीमित नहीं है। दी गई जानकारी के मुताबिक, चीन अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में भी नाम बदलने की प्रक्रिया का इस्तेमाल करता रहा है।
सिनीसाइजेशन कैंपेन यानी चीनीकरण अभियान (Sinicization Campaign) के तहत तिब्बत का नाम बदलकर शिज़ांग और पूर्वी तुर्कमेनिस्तान का नाम बदलकर शिनजियांग किया गया है। इस तरह नामकरण को लेकर चीन की नीति भारत से जुड़े सीमावर्ती इलाकों से आगे भी दिखाई देती है।
लद्दाख की 28 जगहों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर दर्ज करने के केंद्र सरकार के कदम का मुख्य उद्देश्य इन स्थानों की औपचारिक और सटीक पहचान सुनिश्चित करना बताया गया है। वहीं, यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों के नाम और नक्शे को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।


