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लद्दाख छात्र संघ चुनाव में ABVP का बड़ा धमाका, 8 में से 5 सीटें जीतीं; विपक्षी खेमे में हलचल
लद्दाख यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में ABVP ने 8 में से 5 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया। अमित शाह ने इसे राष्ट्रवाद की जीत बताया, वहीं स्टेटहुड आंदोलन से जुड़े नेता नतीजों से हैरान हैं।
Ladakh University Election Results 2026: लद्दाख में छात्र राजनीति के नतीजों ने अब क्षेत्र की सियासत में भी हलचल मचा दी है। यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख के छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पांच सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ा उलटफेर किया है। आठ में से पांच पदों पर ABVP समर्थित उम्मीदवारों की जीत को बीजेपी जहां राष्ट्रवाद और अपनी विचारधारा की बढ़ती स्वीकार्यता बता रही है, वहीं लद्दाख में राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे नेताओं के लिए ये नतीजे अप्रत्याशित झटके की तरह सामने आए हैं।
पांचों अहम पदों पर ABVP उम्मीदवारों की जीत
ABVP की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, दावा नामग्याल को छात्र संघ का अध्यक्ष चुना गया है। वहीं त्सेरिंग यांगडोल ने उपाध्यक्ष, स्टैनजिन रिगजोल ने महासचिव, रबस्किट डोलमा ने संयुक्त सचिव और तेनजिन त्सेवांग ने खेल सचिव का पद जीता है।
दूसरी ओर, गैर-ABVP उम्मीदवारों ने भी तीन सीटों पर जीत हासिल की। इनमें स्टैनजिन इंगजाल को कोषाध्यक्ष, मेफाम अंगमो को सांस्कृतिक सचिव और शराफत अली को मीडिया सचिव चुना गया है। इस तरह आठ सदस्यीय छात्र संघ में ABVP को स्पष्ट बहुमत मिल गया है।
ABVP के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सचिव सन्नक श्रीवत्स ने इस जीत को छात्र कल्याण, शैक्षणिक विकास और बेहतर नेतृत्व के प्रति युवाओं के भरोसे का प्रतीक बताया। संगठन का दावा है कि यह जनादेश बताता है कि नई पीढ़ी छात्र हितों के लिए उसके साथ खड़ी है।
लद्दाख के आंदोलनकारी नेताओं को नतीजों ने चौंकाया
चुनाव के नतीजों ने लद्दाख में राज्य का दर्जा और विशेष संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे नेताओं को हैरान कर दिया है। लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लाक्रुक ने नतीजों पर आश्चर्य जताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से कुछ छात्र नेताओं को आर्थिक प्रलोभन दिए जाने की चर्चा है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के खिलाफ क्षेत्र में अब भी नाराजगी है और छात्र संघ चुनाव के नतीजों को पूरे लद्दाख की राजनीतिक सोच का प्रतिबिंब नहीं माना जा सकता। हालांकि, ये आरोप हैं और इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
लद्दाख विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष स्टैनजिन कुनसल ने भी चुनावी समीकरण पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कुछ उम्मीदवार चुनाव के बाद ABVP के साथ दिखाई दिए और विपक्षी वोटों के बंटवारे ने भी नतीजों को प्रभावित किया हो सकता है।
दूसरी तरफ, ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के सदस्य दोरजे नामग्याल ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि लोग कई तरह की बातें करते हैं, जबकि संगठन का ध्यान छात्रों के मुद्दों पर है।
अमित शाह और नितिन गडकरी ने बताया राष्ट्रवाद की जीत
ABVP की इस जीत को बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने भी हाथोंहाथ लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विजयी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने इस नतीजे को विभाजनकारी और अराजक ताकतों के खिलाफ निर्णायक जीत बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी की पहली पसंद राष्ट्रवाद है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी जीत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह जनादेश राष्ट्रवाद, एकता और राष्ट्र निर्माण की भावना में युवा भारत के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
सोनम वांगचुक के अभियान के बीच भी बदला सियासी माहौल?
लद्दाख में यह चुनाव ऐसे समय हुआ है, जब क्षेत्र की राजनीति में कई मुद्दों को लेकर खींचतान जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग उठा रहे हैं।
हालांकि, हालिया घटनाक्रम में ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र बनाने की वांगचुक की अपील का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। इससे क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के बीच मतभेद भी उजागर हुए हैं।
ABVP की जीत को बीजेपी लद्दाख में अपनी विचारधारा के विस्तार के रूप में पेश कर रही है। वहीं, आंदोलनकारी नेताओं के लिए यह नतीजा आत्ममंथन का विषय बन गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय के आठ पदों के चुनाव को पूरे लद्दाख की राजनीतिक राय मानना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि इस जीत ने राज्य के दर्जे और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई के बीच क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।


