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लालकृष्ण आडवाणी के 100 साल, जानिए सोमनाथ से अयोध्या तक…रथयात्रा ने कैसे खड़ा किया राम मंदिर आंदोलन?
Lal Krishna Advani Birthday Special: लालकृष्ण आडवाणी की 1990 की राम रथयात्रा ने भारतीय राजनीति की दिशा कैसे बदली? उनके जन्मदिन पर जानिए सोमनाथ से अयोध्या तक का सफर, समस्तीपुर में गिरफ्तारी और राम मंदिर आंदोलन की पूरी कहानी।
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Lal Krishna Advani Birthday Special: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन 8 नवंबर को खास अंदाज में मनाया जाएगा। इस अवसर पर बीजेपी दिल्ली स्थित अपने केंद्रीय मुख्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसमें पूजा-पाठ, हवन और उनके लंबे जीवन एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाएगी। आडवाणी के जन्मदिन को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में खास उत्साह है।
दिवाली के शुभ मौके पर लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन
लालकृष्ण आडवाणी का यह जन्मदिन इसलिए भी खास हो जाता है कि वह अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। उनका जन्मदिन इस बार दिवाली पर पड़ा है। दिवाली से एक दिन पहले अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में दिवाली के दिन इस बार उनका जन्मदिन पड़ने से यह और भी खास पल हो गया है। बीजेपी ने इस मौके को यादगार बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किया है। पार्टी का उद्देश्य उनके लंबे राजनीतिक सफर, संगठन के निर्माण में योगदान और राष्ट्रसेवा को याद करना है।
BJP मुख्यालय में पूजा और हवन
लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन के मौके पर रविवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में विशेष पूजा और हवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाएगी। कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। हवन और पूजा के बाद आडवाणी के जीवन और राजनीतिक सफर पर आधारित करीब 20 मिनट की विशेष वीडियो प्रस्तुति दिखाई जाएगी। इसमें उनके महत्वपूर्ण भाषणों और राजनीतिक जीवन के प्रमुख पड़ावों को शामिल किया जाएगा।
राम मंदिर आंदोलन से लेकर उप प्रधानमंत्री बनने तक का सफर
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने बीजेपी के संगठनात्मक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को अविभाजित भारत के कराची में हुआ था। विभाजन के बाद वह भारत आ गए। उन्होंने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। बाद में वह बीजेपी के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और तीन बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। आडवाणी राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे। वर्ष 1990 में निकाली गई उनकी राम रथयात्रा भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिनी जाती है। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने गृह मंत्री और बाद में 2002 से 2004 तक उप प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वह सात बार लोकसभा के सदस्य और चार बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
सोमनाथ से शुरू हुई थी ऐतिहासिक राम रथयात्रा
25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर से लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथयात्रा की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के समर्थन में जनसमर्थन जुटाना था। सोमनाथ मंदिर का चुनाव भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। यह मंदिर भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक पुनरुत्थान का प्रतीक माना जाता है। आडवाणी ने इसी स्थान से अपनी यात्रा शुरू करके अयोध्या तक पहुंचने का संकल्प लिया था। यात्रा के दौरान आडवाणी एक विशेष रूप से तैयार वाहन में सवार होकर अलग-अलग राज्यों और शहरों से गुजर रहे थे। इस वाहन को रथ का रूप दिया गया था। जहां-जहां यह रथ पहुंचा, वहां बड़ी संख्या में समर्थक और बीजेपी कार्यकर्ता जुटते गए। यात्रा गुजरात से शुरू होकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई क्षेत्रों से गुजरने वाली थी। अलग-अलग जगहों पर सभाएं हुईं और राम मंदिर निर्माण का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आने लगा।
बिहार में लालू यादव ने रोक दिया था आडवाणी का रथ
राम रथयात्रा का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ 23 अक्टूबर 1990 को आया। उस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे। आडवाणी की यात्रा जब बिहार के समस्तीपुर पहुंची तो राज्य सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया। उस समय बीजेपी वीपी सिंह सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थी। समर्थन वापसी के बाद केंद्र की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार राजनीतिक संकट में आ गई और आखिरकार गिर गई। इस घटना ने राम रथयात्रा को केवल धार्मिक आंदोलन तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति की एक बड़ी घटना बना दिया।
अयोध्या में कारसेवा और मुलायम सिंह यादव सरकार से टकराव
आडवाणी की रथयात्रा का लक्ष्य 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुंचना था। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी के कारण वह तय समय पर अयोध्या नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद अयोध्या में कारसेवा का कार्यक्रम हुआ। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। सरकार ने विवादित ढांचे की सुरक्षा के लिए सख्त इंतजाम किए थे। 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस की गोलीबारी में कई कारसेवकों की मौत हुई। इस घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरी हलचल पैदा कर दी।
बाबरी मस्जिद विध्वंस से फिर बदला देश का सियासी माहौल
राम मंदिर आंदोलन का सबसे विवादित और निर्णायक पड़ाव 6 दिसंबर 1992 को आया। इस दिन अयोध्या में बड़ी संख्या में जुटे कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। इस घटना ने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा कर दिया। देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा हुई। आडवाणी उस समय आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उनके राजनीतिक जीवन और राम मंदिर आंदोलन की भूमिका को लेकर लंबे समय तक बहस होती रही। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया।
साल 2024 में हुई राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा
22 जनवरी 2024 को अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके साथ ही राम मंदिर आंदोलन का एक बड़ा ऐतिहासिक अध्याय नए पड़ाव पर पहुंचा। आडवाणी को भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य और मौसम संबंधी कारणों से वह समारोह में शामिल नहीं हुए। उनके लंबे राजनीतिक सफर और राम मंदिर आंदोलन में भूमिका को देखते हुए इस अवसर पर उनका नाम विशेष रूप से चर्चा में रहा।


