"...क्योंकि देवता वोट नहीं देते तो छोड़ दें"? मंदिर की संपत्ति 'कब्जे' के मामले में मद्रास HC का स्टालिन सरकार को ज़ोरदार तमाचा! हिली सियासत

Madras HC on Land Encroachment: अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून की नजर में देवता एक "लीगल पर्सन" यानी कानूनी व्यक्तित्व रखते हैं और उनकी संपत्ति की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।

Priya Singh Bisen
Published on: 6 March 2026 12:20 PM IST (Updated on: 6 March 2026 12:24 PM IST)
Madras HC on Land Encroachment
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Madras HC on Land Encroachment (photo: social media)

Madras HC on Land Encroachment: तमिलनाडु में मंदिरों की संपत्ति और जमीन पर अतिक्रमण को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद गंभीर रूप लेता दिख रहा है। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि "सिर्फ इसलिए किसी देवता को असहाय नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि वह चुनाव में' वोट' नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून की नजर में देवता एक "लीगल पर्सन" यानी कानूनी व्यक्तित्व रखते हैं और उनकी संपत्ति की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।

क्या है मामला?

दरअसल यह मामला तमिलनाडु के करूर जिले के एक मंदिर से जुड़ी जमीन पर अतिक्रमण का है। जानकारी के मुताबिक, मंदिर की लगभग 507 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा हो गया था। इस मामले को लेकर साल 2018 में ए. राधाकृष्णन नामक व्यक्ति ने अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मंदिर की बड़ी मात्रा में जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और संबंधित अधिकारी इसे हटाने में कोई ठोस रूप से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

मामले की सुनवाई में मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने बेहद सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि "बेचारे देवता को वोट देने का अधिकार नहीं है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उनकी संपत्ति को लूटने या 'कब्जा' करने की छूट दे दी जाए।”" कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी गणित कभी-कभी प्रशासनिक फसलों को प्रभावित करता नज़र आता है, लेकिन संवैधानिक शासन चुनावी सुविधा के अधीन नहीं हो सकता।

अदालत ने कहा कि मंदिरों का निर्माण और संचालन हजारों-लाखों श्रद्धालुओं के दान और आस्था से ही होता है। पूरे देश-विदेश से आने वाले भक्त मंदिरों के संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों के लिए दान देते हैं। ऐसे में मंदिर की जमीन और संपत्ति की सुरक्षा करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

कई बार अतिक्रमण हटाने का किया गया प्रयास

सुनवाई के दौरान हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि उन्होंने अतिक्रमण हटाने की कई बार प्रयास किया गया, लेकिन हर बार स्थानीय स्तर पर विरोध और तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। अधिकारियों का कहना था कि जब भी कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाती है तो लोग एकत्रित होकर विरोध करने लगते हैं और स्थिति हिंसक हो जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाती है।

इस पर अदालत ने बहुत ही कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ है और न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर पा रहा है, तो यह गंभीर स्थिति है। अदालत ने साफ़ कहा कि किसी भी हाल में कोर्ट के आदेश की अवहेलना स्वीकार नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को दिया बड़ा आदेश

हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और पुलिस को आदेश दिया कि अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक सुरक्षा बल उपलब्ध कराए जाएं। अदालत ने करूर के पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट को आदेशदेते हुए कहा कि वे अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और आवश्यकता पड़ने पर बुलडोजर की सहातया से अवैध रूप से किये गए कब्जे को हटाया जाए।

अदालत ने यह भी कहा कि जब न्यायिक आदेशों को संगठित तरीके से रोका जाता है तो यह कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। कोर्ट ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर सरकारी अधिकारी खुद कह रहे हैं कि वे कानून लागू नहीं कर सकते, तो फिर राज्य में कानून का शासन किस प्रकार कायम रहेगा।

विवाद में गरमाई तमिलनाडु की राजनीति

इस बीच मंदिर से जुड़े एक अन्य विवाद में भी तमिलनाडु की राजनीति गरमा गयी है। अभी तिरुवन्नामलाई क्षेत्र में दीप स्तंभ (दीपथून) पर दीप जलाने को लेकर भी विवाद चल रहा है। इस मामले में अदालत ने पहले केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती तक का निर्देश दिया था। हालांकि, इस पर राज्य के एक मंत्री के बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है और अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की गई है।

मंदिरों की संपत्ति को लेकर देशभर में बहस तेज

बता दे, मद्रास हाईकोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों के बाद तमिलनाडु में मंदिरों की संपत्ति, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। फिलहाल, अदालत ने साफ़ संकेत दे दिया है कि मंदिरों की जमीन और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और राज्य सरकार को न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन करना होगा।

Priya Singh Bisen

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Content Writer Mail ID - Priyasinghbisen96@gmail.com

Priya Singh Bisen is a Content Writer at Newstrack.com.

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