Maharashtra Gymkhana Policy: मुंबई के बड़े जिमखानों पर सरकार की नजर, 16 को खाली कराने की तैयारी

Maharashtra Gymkhana Policy: महाराष्ट्र सरकार सरकारी जमीन पर बने जिमखानों और क्लबों के लिए नई नीति तैयार कर रही है। सदस्यता प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, लीज फीस बढ़ाने और आम लोगों की पहुंच बढ़ाने पर मंथन चल रहा है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 30 May 2026 8:32 AM IST (Updated on: 30 May 2026 9:09 AM IST)
Maharashtra Gymkhana Policy
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Maharashtra Gymkhana Policy: दिल्ली के ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य के प्रतिष्ठित जिमखानों और क्लबों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार एक नई नीति तैयार कर रही है, जिसके जरिए सरकारी जमीन पर बने इन जिमखानों को आम लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाने और इन बेशकीमती जमीनों पर सरकारी नियंत्रण मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब साल 2024 में बृहन्मुंबई नगर निगम ने महालक्ष्मी रेसकोर्स की बड़ी जमीन अपने कब्जे में लेकर उसे सार्वजनिक पार्क के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब माना जा रहा है कि जिमखानों और क्लबों को लेकर भी सरकार इसी तरह का व्यापक ढांचा तैयार करना चाहती है।

नई नीति के लिए शुरू हुई समीक्षा

महाराष्ट्र सरकार के राजस्व और वन विभाग ने इसी साल फरवरी में एक सरकारी प्रस्ताव जारी कर राज्यभर के जिमखानों और क्लबों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक स्टडी ग्रुप का गठन किया था।

सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि मुंबई और महाराष्ट्र के कई अन्य जिलों में जिमखानों को रियायती दरों पर सरकारी जमीनें लीज पर दी गई थीं। अब सरकार यह समीक्षा कर रही है कि भविष्य में इन संस्थाओं के संचालन को अधिक समावेशी कैसे बनाया जाए और आम जनता को भी इसका अधिक लाभ कैसे मिल सके। इसी उद्देश्य से मौजूदा नीतियों की पड़ताल की जा रही है और नई नीति तैयार करने पर काम चल रहा है।

सदस्यता प्रक्रिया में हो सकते हैं बड़े बदलाव

सरकार की प्रस्तावित नीति के तहत जिमखानों और क्लबों की सदस्यता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही इन संस्थाओं के मौजूदा राजस्व मॉडल का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक जमीन पर बने क्लबों और जिमखानों के संचालन में ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए और आम नागरिकों को भी इन सुविधाओं का लाभ मिलने के रास्ते तलाशे जाने चाहिए।

मुंबई में बड़े हिस्से पर जिमखानों का कब्जा

मुंबई जैसे शहर में जहां खुले स्थानों की भारी कमी है, वहां जिमखाना और क्लब काफी बड़े क्षेत्र पर फैले हुए हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में मौजूद कुल 3,780 एकड़ खुले स्थान में से लगभग 664 एकड़ जमीन जिमखानों और वीआईपी क्लबों के पास है। यह शहर के कुल खुले क्षेत्र का लगभग पांचवां हिस्सा माना जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आम मुंबईकर के हिस्से में प्रति व्यक्ति केवल 1.28 वर्ग मीटर खुला स्थान ही उपलब्ध है। ऐसे में इन जमीनों के उपयोग को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

करोड़ों की सदस्यता और लंबा इंतजार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में 20 से अधिक जिमखाना और क्लब मौजूद हैं। इनमें से कई प्रतिष्ठित क्लबों की सदस्यता फीस एक करोड़ रुपये तक पहुंचती है।

इतना ही नहीं, कई क्लबों में सदस्य बनने के लिए लोगों को दो दशक से भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। यही वजह है कि इन संस्थाओं को लंबे समय से केवल चुनिंदा और संपन्न वर्ग तक सीमित माना जाता रहा है।

16 जिमखानों को कलेक्टर कार्यालय का बुलावा

यहां मुंबई के 20 जिमखानों में से 16 कलेक्टर की जमीन पर बने हुए हैं। इन जमीनों को ब्रिटिश काल में बेहद कम दरों पर लीज पर दिया गया था।

हाल ही में कलेक्टर कार्यालय ने इन सभी 16 जिमखानों के पदाधिकारियों को अतिरिक्त कलेक्टर के साथ बैठक के लिए बुलाया है। इनमें बॉम्बे जिमखाना, हिंदू जिमखाना, इस्लाम जिमखाना, पारसी जिमखाना और वोडहाउस जिमखाना जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इस बैठक के जरिए सरकार जिमखानों की वर्तमान स्थिति और जमीन के उपयोग की जानकारी जुटा रही है।

जमीन और निर्माण की भी हुई जांच

सरकारी अधिकारियों की नौ टीमों ने पिछले सप्ताह इन सभी 16 जिमखानों का भौतिक निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, जमीन का वास्तविक उपयोग और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या बदलाव की जांच की गई। सरकार इन सभी पहलुओं की रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की नीति तय की जा सकती है।

बढ़ सकती है लीज फीस और अतिरिक्त शुल्क

बैठक में शामिल एक प्रमुख जिमखाना के सदस्य के अनुसार, चर्चा का मुख्य विषय लीज और लाइसेंस फीस में संभावित बढ़ोतरी भी रहा। जानकारी के मुताबिक, अब तक जिमखाने केवल वार्षिक राजस्व का भुगतान करते थे, लेकिन भविष्य में यदि उनके परिसर में शादी, कॉन्सर्ट, बैंक्वेट या अन्य बड़े आयोजन होते हैं तो सरकार उन पर अतिरिक्त शुल्क या टैरिफ भी लगा सकती है। इससे सरकार का राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सार्वजनिक जमीन के व्यावसायिक उपयोग को लेकर भी नए नियम लागू किए जा सकते हैं।

महालक्ष्मी रेसकोर्स बना बड़ा उदाहरण

वहीं सरकार की इस पूरी कवायद के बीच महालक्ष्मी रेसकोर्स का मामला भी चर्चा में है। दरअसल साल 2024 में बृहन्मुंबई नगर निगम ने 211 एकड़ के महालक्ष्मी रेसकोर्स में से 120 एकड़ जमीन अपने नियंत्रण में ले ली थी। इस जमीन को न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क और लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर एक बड़े सार्वजनिक पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेसकोर्स की लीज साल 2013 में ही समाप्त हो चुकी थी और उसके बाद सरकार ने इसे नवीनीकृत नहीं किया था। अब महाराष्ट्र सरकार की नई जिमखाना नीति को भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सार्वजनिक जमीनों के उपयोग को आम लोगों के हित से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

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Aditya Kumar Verma

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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