UBT Revolt: उद्धव ठाकरे का किला बचाने दिल्ली पहुंचे दो चाणक्य! अनिल देसाई ने चला ऐसा दांव, अब बैकफुट पर शिंदे गुट

UBT Revolt: शिवसेना (UBT) पर मंडरा रहे 'ऑपरेशन टाइगर' के खतरे के बीच संजय राउत ने सांसदों को 15-15 करोड़ के ऑफर का आरोप लगाकर सनसनी मचा दी है। अनिल देसाई के कानूनी दांव और स्पीकर ओम बिरला को भेजे पत्र के बीच जानें दिल्ली का पूरा इनसाइड गेम।

Harsh Srivastava
Published on: 17 Jun 2026 10:53 AM IST (Updated on: 17 Jun 2026 10:53 AM IST)
UBT Revolt: उद्धव ठाकरे का किला बचाने दिल्ली पहुंचे दो चाणक्य! अनिल देसाई ने चला ऐसा दांव, अब बैकफुट पर शिंदे गुट
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UBT Revolt: महाराष्ट्र के राजनैतिक गलियारों में जब भी कोई संकट आता है, तो मातोश्री के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार संजय राउत और अनिल देसाई फ्रंटफुट पर नजर आते हैं। शिवसेना (UBT) पर इस समय एक बार फिर बगावत के गहरे बादल छा गए हैं और विरोधी खेमे ने 'ऑपरेशन टाइगर' को अमलीजामा पहनाने की पूरी तैयारी कर ली है। खबर है कि उद्धव ठाकरे के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पाला बदलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जा सकते हैं। इस बड़ी टूट को अंजाम देने के लिए मुंबई से लेकर दिल्ली तक सियासी बिसात बिछ चुकी है। ऐसे नाजुक वक्त में पार्टी के अस्तित्व को बचाने और डैमेज कंट्रोल करने के लिए दोनों रणनीतिकार मैदान में उतर गए हैं।

दिल्ली में बिछी बिसात और संकटमोचकों की एंट्री

एकनाथ शिंदे पहले ही उद्धव ठाकरे से सत्ता और पार्टी दोनों छीन चुके हैं। उद्धव ने किसी तरह खुद को मजबूत किया, तो अब सांसदों के टूटने का नया संकट गहरा गया है। इस चुनौती से निपटने के लिए दोनों नेता तुरंत मुंबई से दिल्ली रवाना हो गए। जब भी पार्टी पर आफत आती है, संजय राउत अपनी तीखी बयानबाजी से विरोधियों पर हावी होते हैं, जबकि अनिल देसाई पर्दे के पीछे रहकर कानूनी और सांगठनिक दांव-पेच बुनते हैं। दिल्ली पहुंचने का मकसद साफ है कि कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करके विरोधियों के चक्रव्यूह को तोड़ा जा सके।

15 करोड़ का ऑफर और राउत का तीखा पलटवार

दिल्ली पहुंचने से पहले ही संजय राउत ने अपना पहला दांव चल दिया। उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि उनके सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का लालच दिया जा रहा है। राउत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह काम बेहद चौंकाने वाला और घिनौना है। इस आक्रामक घेराबंदी का असर भी दिखने लगा है। सांसद राजाभाऊ वाजे ने साफ किया कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं और पूरी तरह उद्धव के साथ हैं। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ दोपहर 3 बजे होने वाली संसदीय समिति की बैठक के लिए दिल्ली आ रहे हैं। राउत ने दावा किया कि उनके सांसदों को डरा-धमकाकर दबाव बनाने की कोशिशें नाकाम रहेंगी।

नंबर गेम का गणित और टूट की सच्चाई

दल-बदल कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए बागी गुट को कम से कम 6 सांसदों का समर्थन चाहिए। मातोश्री पर हुई बैठक में 5 सांसद गैर-हाजिर थे, जिससे कयासों को बल मिला। माना जा रहा था कि बैठक में पहुंचे चार सांसदों में से भी दो लोग टूट सकते हैं, लेकिन जिन पर संदेह था उन्होंने भी शिंदे गुट से किसी रिश्ते से साफ इंकार कर दिया है। अगर उद्धव के साथ केवल चार सांसद भी मजबूती से खड़े रहते हैं, तो 'ऑपरेशन टाइगर' कभी सफल नहीं हो पाएगा। राउत इसी भरोसे कह रहे हैं कि विरोधियों के पास जरूरी दो-तिहाई संख्या बल मौजूद नहीं है।

सहानुभूति कार्ड और लोकसभा अध्यक्ष को कानूनी पत्र

संजय राउत ने दिल्ली आते ही मीडिया के सामने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। उन्होंने विरोधियों पर सत्ता के लालच का आरोप लगाकर जनता के बीच सहानुभूति बटोरने का खेल शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ अनिल देसाई ने भी मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर मांग की है कि संसद में केवल शिवसेना (यूबीटी) को ही अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए। अरविंद सावंत द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि किसी अन्य गुट के दावे पर कोई भी फैसला लेने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए।

क्या कामयाब होंगे मातोश्री के वफादार रणनीतिकार

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पहला दांव बगावत को रोकने के लिए काफी होगा? उद्धव ठाकरे के लिए यह साख की लड़ाई है। संजय राउत की आक्रामकता जहां कार्यकर्ताओं में जोश भरती है, वहीं अनिल देसाई की शांत रणनीति अदालत के भीतर कारगर साबित हो सकती है। महाराष्ट्र की राजनीति इस समय उस मोड़ पर है जहां हर पल समीकरण बदल रहे हैं। अगर दिल्ली में चली गई यह चाल विरोधियों को बैकफुट पर धकेलने में कामयाब रही, तो उद्धव गुट को बड़ी संजीवनी मिल जाएगी।

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