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Maharashtra SIR पर HC में घमासान! 2.07 करोड़ वोटरों के नाम पर उठे सवाल, बहाली की मांग से बढ़ा विवाद
Maharashtra SIR: याचिकाओं में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, कथित रूप से हुई गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाओं में हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग भी की गई है।
Maharashtra SIR
Maharashtra SIR: महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में मतदाता सूची (Voter List) से नाम हटाने की प्रक्रिया, कथित रूप से हुई गड़बड़ियों और चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाओं में हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग भी की गई है।
कोल्हापुर बेंच में 14 आदेशों को चुनौती
कोल्हापुर बेंच में दाखिल याचिका महाराष्ट्र के स्थानीय निवासियों और मतदाताओं की ओर से वकील असीम सरोदे (Asim Sarode) के माध्यम से दायर की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों और बदलावों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) ने मतदाताओं के नाम हटाने, मतदाता डेटाबेस (Voter Database) तक पहुंच, सॉफ्टवेयर में रुकावट और फॉर्म 6 (Form 6) में किए गए परिवर्तनों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। याचिकाकर्ताओं ने इन घटनाक्रमों को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और कार्यप्रणाली से जुड़े कानून के प्रावधानों के संदर्भ में चुनौती दी है।
याचिका में सभी हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और SIR से जुड़े कथित डेटा डिलीट होने तथा सॉफ्टवेयर ब्लॉकेज की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की गई है।
मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में भी याचिका
दूसरी याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट की मुंबई प्रिंसिपल बेंच में दाखिल की गई है। इसे वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ (Sagar Ramesh Gaikwad) और एक अन्य निवासी ने दायर किया है। याचिका की पैरवी वकील हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी कर रहे हैं।
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर (Special Intensive Revision) के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (Booth Level Officer) घर-घर जाकर पहचान से जुड़े दस्तावेज मांग रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनाव आयोग के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के संदर्भ में चुनौती दी है।
घर पर नहीं मिले तो वोटरों की श्रेणी पर सवाल
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि जो मतदाता घर पर नहीं मिले, उन्हें बिना वैधानिक नोटिस, सुनवाई या कारणयुक्त आदेश के अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में डाल दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस, अपनी बात रखने का अवसर और कारणयुक्त आदेश दिया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में एसआईआर के ड्राफ्ट मतदाता रोल से करीब 2.07 करोड़ नाम बाहर रह गए थे, जिनमें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसे वर्ग शामिल हैं।
बता दे, अब दोनों याचिकाओं के जरिए महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और हटाए गए नामों को लेकर कानूनी जांच की मांग की गई है।


