TRENDING TAGS :
महाराष्ट्र में 2 करोड़ वोटर OUT? SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भेजा नोटिस
महाराष्ट्र में SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.06 करोड़ नाम बाहर होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। चुनाव आयोग, केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से जवाब तलब, 5 नवंबर को अगली सुनवाई।
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से बाहर कर दिए गए हैं और इससे वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को निर्धारित की है।
पत्रकार अरुण आनंदगिरि ने दाखिल की याचिका
याचिका चार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार अरुण आनंदगिरि ने दाखिल की है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र में लगभग 9.79 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से करीब दो करोड़ नाम मसौदा मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 1.22 करोड़ मतदाताओं की प्रविष्टियों को 'तार्किक विसंगतियों' के आधार पर हटाए जाने का आरोप लगाया गया है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाताओं में से 2,06,88,487 मतदाता, अर्थात लगभग 21.14 प्रतिशत, मसौदा सूची में शामिल नहीं किए गए। प्रशासनिक विवरण में इसका प्रमुख कारण संबंधित पते पर मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाना बताया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मुंबई और पुणे जैसे शहरों में पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अनेक परिवार अस्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर रह रहे हैं। ऐसे लोगों को पुराने पते पर नहीं मिलने के कारण मतदाता सूची से बाहर करना उचित नहीं है। याचिका में मांग की गई है कि जब तक इन मुद्दों का न्यायिक निस्तारण नहीं हो जाए, तब तक पुनरीक्षण की प्रक्रिया रोकी जाए और पुरानी सूची में दर्ज किसी भी पात्र मतदाता का नाम उचित प्रक्रिया के बिना न हटाया जाए।
6 नवंबर को आएगी अंतिम मतदाता सूची
महाराष्ट्र में छह नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इससे एक दिन पहले पांच नवंबर को मामले की सुनवाई होने के कारण अदालत की अगली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी केवल नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने का कोई आदेश उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि मसौदा मतदाता सूची से किसी नाम का बाहर होना और अंतिम सूची से नाम का स्थायी रूप से हट जाना अलग स्थितियां हैं। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर रहता है। याचिका में बताए गए आंकड़ों और मतदाताओं की पात्रता संबंधी विवादों पर निर्वाचन आयोग का विस्तृत जवाब आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।


