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‘सावधान! क्रांति आ रही है... हर कोई सड़क पर होगा’, महुआ मोइत्रा का CEC ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला
Mahua Moitra on Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग में कथित मतभेद और 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बीच महुआ मोइत्रा ने CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला।
Mahua Moitra TMC on CEC Gyanesh Kumar (File Photo, Symbolic)
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने बुधवार को सियासी पारा चढ़ा दिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा हमला बोला और यहां तक कह दिया कि “क्रांति आ रही है” और लोग सड़कों पर उतरेंगे।
महुआ मोइत्रा ने एक्स पर करीब 6 मिनट 29 सेकंड का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “सावधान- क्रांति आ रही है! जब तक हम इस चोर के चंगुल से अपना लोकतंत्र वापस नहीं ले लेते, तब तक हर कोई सड़कों पर होगा।”
वीडियो में महुआ ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने उन्हें “चोर” और “अपराधी” बताते हुए गिरफ्तारी की मांग की। हालांकि, ये महुआ मोइत्रा के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट से मचा बवाल
पूरा विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने, वोटर डेटाबेस के प्रबंधन और SIR से जुड़े मामलों पर थीं। चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज किए जाने का भी दावा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर सवाल उठाए और यह भी कहा कि कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए। एक मामले में संधू ने कथित तौर पर किसी कदम को “unauthorised and illegal” बताया। वोटर डेटा को दिल्ली में केंद्रीकृत करने और चुनावी रोल के आईटी सिस्टम की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए गए।
Form-6 से लेकर वोटर डेटा तक सवाल
रिपोर्ट में विशेष रूप से Form-6 में किए गए बदलाव का जिक्र है। यह फॉर्म नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट के अनुसार, SIR से जुड़ा एक सवाल इसमें जोड़ा गया था, जिस पर विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। बाद में संधू ने भी इसे लेकर सवाल उठाया।
इसके अलावा चुनावी डेटा के आईटी सिस्टम और ERONet के नियंत्रण को लेकर भी मतभेद सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई थी।
लेकिन चुनाव आयोग ने रिपोर्ट को लेकर क्या कहा?
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कथित “अंदरूनी घमासान” की तस्वीर को खारिज किया है। आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग का कहना है कि व्यक्तिगत स्तर पर विचार, टिप्पणियां या असहमति की अभिव्यक्ति अपने आप में आयोग के अंतिम फैसले का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
यानी इस समय विवाद का सबसे बड़ा बिंदु यही है—एक तरफ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट 14 औपचारिक आपत्तियों का दावा करती है, दूसरी तरफ चुनाव आयोग कह रहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।
महुआ बोलीं- लोकतंत्र वापस लेकर रहेंगे
इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना हमला और तेज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महुआ ने अपने वीडियो में दावा किया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार और तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों के चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि “बहुमत चोरी कर सरकार बनाई गई।” ये आरोप भी विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
ममता बनर्जी ने भी मांगी कार्रवाई
विवाद सिर्फ महुआ मोइत्रा तक सीमित नहीं रहा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रिपोर्ट सामने आने के बाद CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से उनकी ओर से पहले उठाए गए सवालों को बल मिला है।
विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी CEC के खिलाफ कार्रवाई और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस, AAP और अन्य विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
अब आगे क्या?
इस पूरे विवाद के बीच असली लड़ाई वोटर लिस्ट, SIR, चुनावी डेटा और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों ने आयोग के कामकाज को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से हुए हैं।
ऐसे में महुआ मोइत्रा का “क्रांति आ रही है” वाला बयान इस सियासी टकराव को और भड़का सकता है। अब नजर इस बात पर है कि विपक्ष इन आरोपों को लेकर सड़क से संसद तक क्या रणनीति अपनाता है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर आगे क्या विस्तृत जवाब देता है।


