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खड़गे ने फिर खोला मुंह! अब मोदी के साथ शाह पर भी तीखा हमला, अब तो आर-पार की लड़ाई का एलान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महंगाई और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है।
Kharge Targets Modi-Shah: कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक पहले ही पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए पटना के एक सभा में कहा था कि 'मोदी का बाप भी जाएगा।' इसके बाद पूरे राजनीतिक गलियारों में घमासान मचा दिया। इसे लेकर बीजेपी आज पूरे देश में प्रदर्शन कर रही है। अब दूसरे दिन भी कांग्रेस चीफ ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच पीएम मोदी और अमित शाह पर जमकर तीखा हमला बोला है।
खड़गे ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'यह त्योहार का मौसम है, लेकिन इस समय आप कमरतोड़ महंगाई से जूझ रहे है। पर सरकार को इसकी बिल्कुल भी चिंता नहीं, क्योंकि वह सिर्फ़ वोट चोरी करना जानते है। वोट चोरी बड़े पैमाने पर हुई है और अब भी हो रही है। करोड़ों भारतीयों का मत देने का संवैधानिक हक़ ख़तरे में है। इसके लिए CEC ज्ञानेश कुमार ही ज़िम्मेदार है। उन्होंने यह सब कुछ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के कहने पर किया है।'
खड़गे ने मोदी सरकार से दो मांग
इसके साथ ही खड़गे ने सरकार से दो मांग करते हुए लिखा, 'सभी विपक्षी दलों की मांगे है।'
- ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें
- SIR प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए
इसके बाद जनता से अपील करते हुए खड़गे ने लिखा, 'इसी सिलसिले में 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में "वोट बचाओ, देश बचाओ" महा रैली होगी। आप से अपील है कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए, इस रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले और इस मुहिम को सफल बनाए।'
दिल्ली में रैली से कारोबारियों को क्यों सता रहा नुकसान का डर?
दिल्ली के व्यापारियों को उम्मीद है कि कांग्रेस की प्रस्तावित रैली की तारीख आगे बढ़ सकती है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे के सुबह दिए गए बयान से व्यापारियों को उम्मीद की किरण दिखाई दी है। व्यापारिक संगठन ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपील की है कि वह पार्टी और सहयोगी दलों की अगली बैठक में कारोबारियों की रोजी-रोटी को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लें।
दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर पड़ सकता है असर
CTI को आशंका है कि रामलीला मैदान में बड़ी रैली होने से आसपास के करीब पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले लगभग 20 बड़े थोक और खुदरा बाजारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार और करोल बाग जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं।
व्यापारिक संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में करीब तीन लाख व्यापारी काम करते हैं। दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलाकर लगभग 15 लाख लोगों की रोजी-रोटी इन बाजारों से जुड़ी हुई है। ऐसे में बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होने पर बड़ी संख्या में लोगों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है।
त्योहारों के सीजन में नुकसान की चिंता
कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता रैली की तारीख को लेकर है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर, दिवाली 8 नवंबर और भाई दूज 10 नवंबर को है। त्योहारों के दौरान दिल्ली के बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है, जिससे व्यापारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद रहती है।
CTI का अनुमान है कि केवल धनतेरस के दिन दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। संगठन का कहना है कि अगर सड़कों पर पाबंदियां लगती हैं, सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होता है या ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होती है, तो त्योहारों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
पहले ही 3,000 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
CTI का दावा है कि पिछले 25 दिनों में विरोध प्रदर्शनों और ट्रैफिक से जुड़ी पाबंदियों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। संगठन को डर है कि अगर दिवाली तक ऐसी ही स्थिति बनी रही, तो कुल नुकसान 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।
व्यापारियों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया है। उनका आरोप है कि उस दौरान सड़कें बंद होने और मेट्रो सेवाओं में रुकावट के कारण दिल्ली के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन जैसे हालात बन गए थे।
कारोबारियों को आशंका है कि दिवाली से कुछ दिन पहले रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है। इसी वजह से CTI कांग्रेस से रैली की तारीख 10 नवंबर के बाद रखने की अपील कर रहा है।


