इस्तीफा, बगावत और...अपनों के धोखे पर गुस्से से तिलमिला उठी ममता दीदी, बोलीं- 'क्या मैं मर गई हूं?'

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद टीएमसी में बड़ी बगावत! चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे और पार्टी दफ्तर पर कब्जे को लेकर ममता बनर्जी ने बागियों को कड़ी चुनौती दी है।

Harsh Srivastava
Published on: 4 July 2026 8:46 PM IST
इस्तीफा, बगावत और...अपनों के धोखे पर गुस्से से तिलमिला उठी ममता दीदी, बोलीं- क्या मैं मर गई हूं?
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Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सियासी सितारे इस समय बेहद गर्दिश में नजर आ रहे हैं. चुनाव हारते ही ममता बनर्जी चौतरफा संकटों और मुसीबतों के दलदल में पूरी तरह घिर चुकी हैं. उनके सबसे भरोसेमंद और करीबी सिपहसालार एक-एक करके उनका साथ छोड़ते जा रहे हैं, जिससे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ताश के पत्तों की तरह बिखरती दिख रही है. इसी क्रम में शनिवार को ममता बनर्जी को उस समय सबसे बड़ा झटका लगा, जब बंगाल टीएमसी की कद्दावर महिला अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया.

इतना ही नहीं, पार्टी के भीतर बगावत का झंडा बुलंद करने वाले बागी नेताओं ने टीएमसी के मुख्य दफ्तर पर भी अपना जबरन कब्जा जमा लिया है और अब इन बागियों की गिद्ध दृष्टि पार्टी के असली सिंबल यानी चुनाव चिन्ह पर टिकी हुई है. अपनों से मिले इस तगड़े धोखे के बाद आखिरकार ममता बनर्जी का सब्र टूट गया और उन्होंने बागी गुट के नेताओं पर चुन-चुनकर जमकर निशाना साधा. उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में बागियों को ललकारते हुए पूछा कि क्या आपको लगता है कि मैं मर गई हूं?

धोखे की भी एक आखिरी सीमा होती है

तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीम चीफ ममता बनर्जी ने बागियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग कल तक मेरी बदौलत राजनीति में थे, वे आज मुझे ही आंखें दिखा रहे हैं. उन्होंने गुस्से में कहा कि जिन नेताओं ने मेरे खुद के दस्तखत वाले पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की, वे आज शर्मनाक दावा कर रहे हैं कि साल 2023 से ही यह पार्टी पूरी तरह खत्म हो चुकी है. ममता ने याद दिलाया कि आपने चुनाव मैदान में पैर तभी रखा था जब मैंने आपके नाम को मंजूरी दी और उम्मीदवारी के कागज पर अपने साइन किए, जिसके बाद ही चुनाव आयोग ने आपका नामांकन पत्र स्वीकार किया था. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि दुनिया में धोखे की भी एक तय सीमा होती है. आपने उसी पार्टी की पीठ में छुरा घोंप दिया जिसने आपको समाज में एक राजनीतिक पहचान और रूतबा दिया था.

हिम्मत है तो खुलकर भाजपा में जाओ

ममता बनर्जी ने बागियों की पोल खोलते हुए कहा कि अब ये सभी लोग पर्दे के पीछे से हटकर खुलेआम भारतीय जनता पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर आप लोगों में थोड़ी सी भी हिम्मत और गैरत बची है, तो सामने आकर औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ले लो. उन्होंने गरजते हुए कहा कि क्या आपको ऐसा लगने लगा है कि मैं राजनीतिक रूप से मर चुकी हूं? हम बहुत अच्छे से जानते हैं कि चुनाव आयोग से पार्टी का असली सिंबल आपको मिलने की उम्मीद न के बराबर है. जब मैं इसी सिंबल को पहनकर दोबारा बंगाल की देवतुल्य जनता के बीच जाऊंगी, तो क्या आप लोग अपनी पूरी ताकत लगाकर भी मेरी बुलंद आवाज को दबा पाएंगे?

हर महीने एक लाख रुपये देते हैं किराया

पार्टी दफ्तर पर हुए जबरन कब्जे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि कल जिन लोगों ने तृणमूल भवन को अपने नियंत्रण में लिया, वे यह झूठा दावा कर रहे हैं कि दफ्तर का किराया नहीं चुकाया गया था. मैं आज पूरे देश के सामने यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहती हूं कि यह पूरी जगह अक्टूबर 2027 तक के लिए कानूनी रूप से किराए पर ली गई थी. यह किसी एक अकेले व्यक्ति की निजी जागीर नहीं है बल्कि यह एक बड़ी संस्था की संपत्ति है, जो बंगाल की मां, माटी और मानुष की है. कोई भी बाहुबली इस पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा नहीं जमा सकता क्योंकि हमारे पास इसके सभी पक्के कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं. हम इस दफ्तर के लिए हर महीने पूरे 1 लाख रुपये का भारी-भरकम किराया देते हैं. आज आप केंद्र सरकार की फौज के दम पर किसी इमारत पर तो कब्जा कर सकते हैं, पर जनता के दिलों पर नहीं.

बच्चों के अंडों पर हो रही गंदी राजनीति

ममता बनर्जी ने राज्य की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि आज बंगाल के गरीब बच्चों को मिड-डे मील के खाने में अंडे तक नसीब नहीं हो रहे हैं, लेकिन राजनीति के भूखे लोग सड़कों पर अंडे फेंककर प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि हम भी पूरे 15 साल तक बंगाल की सत्ता में रहे थे, लेकिन हमने ऐसे घटिया कामों के लिए कभी भी अपनी पुलिस का दुरुपयोग नहीं किया. आज की सरकार खुलेआम इंस्पेक्टर-इन-चार्ज और ऑफिसर-इन-चार्ज को अपनी उंगलियों पर नचा रही है और वे पुलिस अधिकारी अब पार्टी के ब्लॉक प्रेसिडेंट की तरह काम कर रहे हैं. जो लोग स्वार्थ में पार्टी छोड़कर चले गए हैं, मैं उन्हें दोष नहीं देती क्योंकि उनके पास अपने परिवार, संपत्ति और तमाम तरह की जिम्मेदारियां बचाने का दबाव है. लेकिन वे यह न भूलें कि मेरा भी एक बहुत बड़ा परिवार है, जिसे मैं मां, माटी, मानुष का तृणमूल परिवार कहती हूं.

चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे से मचा हड़कंप

इस पूरे सियासी घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की महिला अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा पार्टी के लिए सबसे बड़ा डेंट साबित हुआ है. उन्होंने सीधे पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नाम एक भावुक पत्र लिखकर अपने पद को तत्काल प्रभाव से छोड़ने का एलान कर दिया. उनका यह चौंकाने वाला इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच की अंदरूनी लड़ाई पूरी तरह से सड़कों पर आ चुकी है. असल में, चंद्रिमा भट्टाचार्य के पार्षद बेटे ने पार्टी के दूसरे विरोधी धड़े के बड़े नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया था, जिसकी टीएमसी के भीतर चौतरफा तीखी आलोचना हो रही थी. इस पूरे विवाद पर अपनी सफाई देते हुए चंद्रिमा ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को उस विरोधी बैठक में शामिल होने से साफ मना किया था, लेकिन वह उनकी मर्जी के खिलाफ बिना इजाजत वहां चला गया, जिससे वे बेहद आहत हैं.

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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