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TMC Revolt: ममता बनर्जी को हाईकोर्ट का जोरदार झटका! स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने की मांग खारिज
TMC Revolt: पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, जिससे फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी पद पर बने रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Ritabrata Banerjee
TMC Revolt: पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है। इस पूरे मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को कोई फौरी राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका पर तुरंत कोई भी स्टे लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें नई नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस रुख का सीधा सा अर्थ यह है कि फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी ही इस अहम पद पर काबिज रहेंगे।
राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक फिलहाल भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है और तृणमूल कांग्रेस सत्ता गंवाने के बाद विपक्ष की भूमिका में आ चुकी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ताधारी दल का मुखिया मुख्यमंत्री होता है, जबकि मुख्य विपक्षी दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया जाता है। इस पूरी कलह की शुरुआत तब हुई जब विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बोस ने सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी। गौरतलब है कि ऋतब्रत बनर्जी मूल रूप से टीएमसी के ही नेता हैं, लेकिन चुनाव में मिली शिकस्त के बाद उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ बगावती सुर अपना लिए थे।
अपने ही एक बागी नेता को इतना अहम पद सौंपे जाने से टीएमसी खासी नाराज है। पार्टी का साफ तौर पर तर्क है कि विधानसभा अध्यक्ष अपनी मनमर्जी से किसी को भी इस कुर्सी पर नहीं बिठा सकते। नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए सदन में विधायकों की कुल संख्या, असली विपक्ष की पहचान और वास्तविक राजनीतिक स्थिति का सही आकलन करना बेहद जरूरी होता है। तृणमूल का सीधा आरोप है कि स्पीकर का यह कदम विधानसभा की स्थापित परंपराओं का खुला उल्लंघन है जिससे सदन का राजनीतिक संतुलन बिगड़ गया है।
हालांकि, गुरुवार को हुई अदालती सुनवाई के दौरान जज ने स्पीकर के फैसले पर किसी भी तरह की अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया। अब इस पूरे सियासी और कानूनी विवाद की अगली सुनवाई 16 जून को मुकर्रर की गई है। उस दिन दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद ही न्यायालय इस मामले में अपना कोई बड़ा या अंतिम फैसला सुनाएगा।


