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Bengal Politics: TMC में बगावत रोकने के लिए 'दीदी' का बड़ा दांव! नाराज नेताओं को खुद फोन कर मना रही हैं ममता
Bengal Politics: टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि स्पीकर द्वारा नियुक्त विपक्ष के नेता (एलओपी) को पार्टी वैध नहीं मानती। उन्होंने कहा कि इस फैसले को चुनौती देने के लिए टीएमसी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
Mamata Banerjee Bio Update
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थिति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) गहरे आंतरिक संकट और बिखराव से जूझ रही है। अपने 28 साल के इतिहास में पहली बार इतने बड़े विभाजन का सामना कर रही पार्टी को एकजुट रखने के लिए टीएमसी प्रमुख ने अब अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बागी और असमंजस की स्थिति में फंसे विधायकों को पाले में बनाए रखने तथा भविष्य में होने वाले दलबदल को रोकने के उद्देश्य से ममता बनर्जी ने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
बंगाल में 15 वर्षों से चला आ रहा ममता बनर्जी का शासन समाप्त होने के बाद 71 वर्षीय तृणमूल सुप्रीमो के सामने अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों के कई विधायकों से खुद फोन पर संपर्क साधा है। गौरतलब है कि इनमें से कई विधायकों को हाल ही में पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठकों में शामिल होते देखा गया था, जिससे नेतृत्व की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
ऋतव्रत बनर्जी का बढ़ता प्रभाव और नेता प्रतिपक्ष का दावा
टीएमसी के भीतर चल रही यह गुटबाजी उस समय और मुखर हो गई जब बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने ऋतव्रत खेमे के उस दावे को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने टीएमसी विधायक दल पर नियंत्रण की बात कही थी। टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने विपक्ष के नेता के रूप में ऋतव्रत बनर्जी की नियुक्ति का खुला समर्थन किया है। हालांकि, इस पूरे विवाद की शुरुआत कालीघाट में हुई एक पिछली बैठक से हुई थी, जहां यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि ऋतव्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव पत्र पर कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी थे।
विधायकों से व्यक्तिगत संवाद और नेतृत्व की परीक्षा
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, ममता बनर्जी इस समय बेहद सतर्कता से कदम उठा रही हैं और हर एक विधायक से व्यक्तिगत तौर पर बातचीत कर रही हैं। वे सभी से कालीघाट की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का आग्रह कर रही हैं ताकि संवाद का रास्ता खुला रहे और आपसी सुलह की कोई गुंजाइश निकाली जा सके। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को ममता बनर्जी की संगठनात्मक पकड़ की एक बड़ी अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह साफ होगा कि बागी रुख अपना चुके विधायकों पर अब उनका कितना प्रभाव बचा है।
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की कतार और संसद तक फैलने का डर
तृणमूल कांग्रेस में मची यह भगदड़ केवल विधानसभा या विधायकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर स्थानीय स्तर पर भी साफ दिख रहा है। पूर्व परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती के बुधवार को दिए इस्तीफे के बाद कई अन्य बड़े नेताओं और लगभग 100 से अधिक नगर पार्षदों ने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया है। इस बड़े नुकसान को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। टीएमसी के पास वर्तमान में लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं, और पार्टी आलाकमान को अब यह डर सता रहा है कि यदि इस विद्रोह को तुरंत नहीं थामा गया, तो यह असंतोष बहुत जल्द उनके संसदीय दल तक भी पहुंच सकता है।


