मणिपुर में Census 2027 पर लगी रोक, NRC की मांग और भारी विरोध पर अमित शाह की बैठक के बाद बड़ा फैसला

Manipur Census 2027 को NRC की मांग और विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने टाल दिया है। अमित शाह की बैठक, हाईकोर्ट के निर्देश और Meitei-Naga-Kuki-Zo संगठनों के रुख से समझें पूरा विवाद।

Alakha Singh
Published on: 1 Sept 2026 8:53 AM IST
मणिपुर में Census 2027 पर लगी रोक, NRC की मांग और भारी विरोध पर अमित शाह की बैठक के बाद बड़ा फैसला
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Manipur Census 2027: मणिपुर में जनगणना 2027 को लेकर बढ़ते विरोध के बीच केंद्र सरकार ने राज्य में Census की प्रक्रिया फिलहाल टाल दी है। जनगणना शुरू होने से ठीक एक दिन पहले लिए गए इस फैसले ने राज्य में NRC की मांग को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक खींचतान को और तेज कर दिया है।

केंद्र का यह फैसला ऐसे समय आया है जब मणिपुर में मई 2023 से जारी हिंसा और तनाव के बीच करीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में बड़े हिस्से की आबादी की मांग थी कि पहले नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) को लागू या अपडेट किया जाए और उसके बाद जनगणना कराई जाए।

अमित शाह की बैठक के बाद बड़ा फैसला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में मणिपुर की स्थिति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक बैठक में मणिपुर के लोगों की उस मांग पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें NRC से पहले Census नहीं कराने की बात कही गई थी। बैठक में राज्य की मौजूदा परिस्थितियों और लोगों की भावनाओं को देखते हुए जनगणना टालने पर सहमति बनी।

1 सितंबर से शुरू होना था House Listing

Census 2027 का पहला चरण यानी House Listing मणिपुर में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रस्तावित था। इसके लिए 17 से 31 अगस्त के बीच Self-Enumeration की सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी थी।

हालांकि, NRC की मांग को लेकर शुरू हुए विरोध के कारण जनगणना कर्मचारियों का प्रशिक्षण प्रभावित हुआ और Self-Enumeration की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी।

अब केंद्र के फैसले के बाद मणिपुर में Census का कार्यक्रम आगे कब शुरू होगा, इस पर अगली अधिसूचना का इंतजार है।

हाईकोर्ट ने भी लगाई थी रोक

केंद्र के फैसले से पहले ही मणिपुर हाईकोर्ट ने सोमवार को House Listing प्रक्रिया को रोकने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त की ओर से आगे की सूचना जारी होने तक यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाए।

यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा था जिनमें Census से पहले NRC लागू करने की मांग की गई थी।

Naga और Meitei संगठनों का जोरदार विरोध

16 अगस्त से मणिपुर में Naga और Meitei संगठनों की ओर से NRC की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हुआ। इन संगठनों का तर्क है कि NRC के बिना होने वाली जनगणना से राज्य में भविष्य में demographic changes का खतरा पैदा हो सकता है।

इनका दावा है कि पड़ोसी म्यांमार से अवैध प्रवास के कारण राज्य की आबादी के स्वरूप में बदलाव हो सकता है और Census के आंकड़ों पर इसका असर पड़ सकता है।

वहीं, Kuki-Zo Council (KZC) ने Census से पहले NRC की मांग का विरोध किया है। KZC ने इसे समय से पहले उठाया गया और अनुचित कदम बताया है।

Assam NRC का हवाला देकर Kuki-Zo Council ने जताई आपत्ति

KZC ने अपने विरोध के पीछे असम के NRC अनुभव का हवाला दिया। असम में 1985 के Assam Accord के बाद NRC प्रक्रिया में करीब 19 लाख लोग अंतिम सूची से बाहर रह गए थे। इसके बाद बड़ी संख्या में मामले कानूनी चुनौतियों और Foreigners Tribunals की प्रक्रिया में चले गए।

KZC का कहना है कि मणिपुर में भी ऐसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले उसके सामाजिक और कानूनी प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

Census विरोध के केंद्र में JFD

मणिपुर में Census के खिलाफ आंदोलन को न्यायपूर्ण और निष्पक्ष परिसीमन के लिए अभियान (JFD) आगे बढ़ा रहा है। संगठन के छात्र विंग ने जनगणना कार्य निदेशालय, मणिपुर में तालाबंदी तक की।

राज्य के कई इलाकों, खासकर घाटी में, विरोध प्रदर्शन और मशाल जुलूस भी निकाले गए।

JFD के संयोजक जीतेंद्र निंगोम्बा ने कहा कि अगर सरकार की ओर से जनगणना स्थगित करने की अधिसूचना राजपत्र में जारी नहीं की गई तो उनका 24 घंटे का पूर्ण बंद जारी रहेगा।

मणिपुर में Census का संकट क्यों अहम?

जनगणना सिर्फ आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है। मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में जनसंख्या के आंकड़े प्रशासन, संसाधनों के वितरण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और परिसीमन जैसे मुद्दों से भी जुड़े हैं।

यही वजह है कि Census से पहले NRC की मांग ने इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न रहने देकर एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे में बदल दिया है।

इतिहास में हिंसा के कारण Census बाधित होने के उदाहरण असम में 1981 और जम्मू-कश्मीर में 1991 में सामने आए थे। लेकिन Census 2027 के दौरान किसी राज्य में ऐसी स्थिति पैदा होना अपने आप में असाधारण घटनाक्रम है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मणिपुर में NRC पर केंद्र का अगला कदम क्या होगा और Census 2027 की प्रक्रिया दोबारा कब शुरू होगी?

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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