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मणिपुर के दोनों डिप्टी CM में महाभारत! कुकी-नागा विवाद ने बढ़ाई BJP की टेंशन, अमित शाह तक पहुंची लड़ाई
Manipur Deputy CM Controversy: मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच बढ़ते विवाद ने बीजेपी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डिप्टी CM नेमचा किपगेन और लोसी दिखो के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई अब अमित शाह तक पहुंच गई है।
Manipur Deputy CM Controversy: हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर में अब एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है। मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जारी खींचतान के बीच अब कुकी और नागा जनजातियों के बीच का पुराना तनाव फिर से भड़क उठा है। इस जमीनी विवाद ने राज्य की सत्ता के शीर्ष गलियारों में बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है। कुकी समुदाय से आने वाली राज्य की उप-मुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने अपने ही सहयोगी नागा उप-मुख्यमंत्री लोसी दिखो और उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंची लड़ाई
विवाद की शुरुआत तब हुई जब नागा उप-मुख्यमंत्री लोसी दिखो समेत 9 नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र में आरोप लगाया गया कि किपगेन और उनके पति, जो प्रतिबंधित संगठन से जुड़े हैं, कुकी उग्रवादी गुटों को बढ़ावा दे रहे हैं। नागा नेताओं ने दावा किया कि बंधकों के अपहरण के दौरान उप-मुख्यमंत्री ने अपना फोन बंद कर लिया था।
इन तीखे हमलों का जवाब देते हुए किपगेन ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बिना किसी सबूत के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके उप-मुख्यमंत्री का पद संभालते ही दोनों समुदायों के बीच अचानक दुश्मनी इतनी ज्यादा कैसे बढ़ गई। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ राजनीतिक ताकतें शांत इलाकों का माहौल खराब करने और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाने की फिराक में हैं।
उग्रवादियों के साथ संबंध
नागा जनप्रतिनिधियों के दावों को खारिज करते हुए किपगेन ने पूरी घटना की सिलसिलेवार जानकारी दी। फोन बंद रखने के आरोप पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन चर्च के प्रतिनिधियों पर हमला हुआ था, उस समय वे हवाई सफर में थीं।
हवाई अड्डे पर उतरते ही उन्होंने तुरंत स्थिति का जायजा लिया और मुख्यमंत्री व स्थानीय नागरिक संगठनों से बातचीत की। उप-मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके व्यक्तिगत प्रयासों की वजह से ही 18 नागा नागरिकों को बिना किसी शर्त के सुरक्षित रिहा कराया जा सका था। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्होंने अपनी सूझबूझ से दर्जनों तांगखुल नागा यात्रियों की जान बचाई थी और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई थी।
त्रिस्तरीय सत्ता का नया प्रयोग
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की समाप्ति के बाद शांति बहाली के लिए एक अनोखा प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया था। केंद्र ने संतुलन बनाने के लिए मैतेई नेता युमनाम खेमचंद सिंह को कमान सौंपी, जबकि कुकी और नागा वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए दो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए।
सुरक्षा चिंताओं के कारण किपगेन ने दिल्ली से डिजिटल माध्यम से पद की शपथ ली थी और वे राजधानी इंफाल जाने के बजाय कांगपोकपी से ही अपने कामकाज का संचालन कर रही हैं। हालिया महीनों में भड़की हिंसा में दोनों पक्षों के 36 नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। नागा गुटों ने अब अल्टीमेटम दिया है कि यदि किपगेन पर कदम नहीं उठाया गया, तो वे सरकार से अलग हो जाएंगे, जिससे राज्य की स्थिरता पर गहरा संकट मंडराने लगा है।


