मणिपुर में फिर भड़की हिंसा! खाली पड़े 5 घरों में लगाई गई आग, नगा-कुकी तनाव के बीच हड़कंप

Manipur Violence: मणिपुर के सेनापति जिले में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने खाली पड़े पांच घरों में आग लगा दी। नगा-कुकी तनाव के बीच हुई इस घटना की पुलिस और असम राइफल्स जांच कर रही है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 10 Aug 2026 8:41 PM IST
Manipur Violence
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Image Source- Social Media

Manipur Violence: मणिपुर के सेनापति जिले (Senapati District) के काइलेनजांग गांव (Kailenjang Village) में सोमवार को अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कम से कम पांच खाली घरों में आग लगा दी। पुलिस के मुताबिक, घटना दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर हुई। आगजनी के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

पुलिस के अनुसार, काइलेनजांग गांव सेनापति पुलिस स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह गांव कुकी समुदाय (Kuki Community) का है और काफी समय से खाली पड़ा हुआ था। सोमवार को अज्ञात लोगों ने गांव के करीब पांच घरों को निशाना बनाया और उनमें आग लगा दी।

नगा-कुकी संघर्ष के बाद से खाली था गांव

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि काइलेनजांग गांव 1992 के नगा-कुकी संघर्ष (Naga-Kuki Conflict) के बाद से खाली पड़ा था। यह संघर्ष जमीन से जुड़े विवाद को लेकर हुआ था।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उस दौरान गांव के करीब आठ से दस परिवार विस्थापित हो गए थे। बाद में कुकी ग्रामीणों ने दोबारा गांव में बसना शुरू किया और 2023 से पहले यहां कुकी समुदाय के लोग फिर से रहने लगे थे।

हालांकि, 2023 में शुरू हुए नगा-कुकी-जो संघर्ष (Naga-Kuki-Zo Conflict) के बढ़ने के बाद एक बार फिर गांव के लोग विस्थापित हो गए।

मई की हिंसा के बाद फिर विस्थापित हुए ग्रामीण

पुलिस अधिकारी ने बताया कि नगा-कुकी-जो संघर्ष उस समय और बढ़ गया, जब 13 मई को मणिपुर के नोनी (Noney) और कांगपोकपी (Kangpokpi) जिलों में दो अलग-अलग घात लगाकर किए गए हमलों में चार लोगों की मौत हो गई।

इसके बाद कुकी समूह पर छह नगा लोगों के कथित अपहरण और हत्या का भी आरोप लगा। इन घटनाओं के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया।

पुलिस के मुताबिक, काइलेनजांग गांव में रहने वाले कुकी ग्रामीणों को एक बार फिर अपना गांव छोड़ना पड़ा। वे सेनापति जिले के ताफोउ कुकी गांव (Taphou Kuki Village) में जाकर शरण लेने लगे। इसके बाद से काइलेनजांग गांव के कई घर खाली पड़े हुए थे।

आगजनी करने वालों की पहचान नहीं

सोमवार की आगजनी की घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक उन लोगों की पहचान नहीं हो सकी है, जिन्होंने गांव के खाली घरों में आग लगाई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद असम राइफल्स (Assam Rifles) की एक टीम भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। हालांकि, मौके पर पहुंचने के बाद टीम ने पाया कि आग की चपेट में आए ज्यादातर खाली घर पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना के दौरान किसी तरह की गोलीबारी की आवाज नहीं सुनी गई। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि आगजनी के समय इलाके में कोई गोली चलने की आवाज नहीं आई।

छह नगा लोगों के लिए न्याय की मांग

मणिपुर में नगा-कुकी तनाव के बीच आर्थिक नाकेबंदी (Economic Blockade) को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। छह नगा लोगों के लिए न्याय की मांग को लेकर नगा समुदाय की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल यानी यूएनसी (United Naga Council) ने 17 मई से मणिपुर के सभी नगा बहुल इलाकों में अनिश्चितकालीन अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर रखी है।

इसके जवाब में कुकी सिविल सोसाइटी संगठनों की वर्किंग कमेटी (Working Committee of Kuki Civil Society Organisations) ने भी 26 जुलाई की आधी रात से जवाबी अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी। इन नाकेबंदियों के चलते मणिपुर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवाजाही को लेकर भी तनाव बना हुआ है।

सरकार और यूएनसी की पहली बैठक

इसी बीच मणिपुर सरकार (Manipur Government) और यूनाइटेड नगा काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल के बीच सोमवार को पहली दौर की बातचीत हुई। यह बैठक ताफोउ गांव में आयोजित की गई। बैठक का मकसद राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर जारी आर्थिक नाकेबंदी को खत्म करने का रास्ता निकालना था।

यह बातचीत मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद (Yumnam Khemchand) के 8 जुलाई को कांगपोकपी जिले के दौरे के बाद शुरू हुई पहल का हिस्सा है। उस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन (Nemcha Kipgen) ने संयुक्त रूप से सभी समुदायों की मुक्त आवाजाही के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों को तत्काल खोलने का ऐलान किया था।

हालांकि, सोमवार को हुई बैठक में कोई सौहार्दपूर्ण समाधान नहीं निकल सका। इसके बावजूद यूनाइटेड नगा काउंसिल ने बताया कि बैठक में राज्य में शांति बहाली को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

2023 से जारी है मणिपुर में जातीय संघर्ष

मणिपुर में जातीय हिंसा (Ethnic Clashes) की शुरुआत मई 2023 में मैतेई (Meitei) और कुकी (Kuki) समुदायों के बीच हुई थी। बाद में यह संघर्ष राज्य के लगभग हर समुदाय को प्रभावित करने लगा।

जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से राज्य के मैतेई और कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों ने एक-दूसरे के प्रभुत्व वाले इलाकों से दूरी बना ली है। हिंसा के कारण अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 60 हजार लोग विस्थापित हुए हैं।

ऐसे समय में सेनापति जिले के काइलेनजांग गांव में खाली पड़े घरों को आग लगाए जाने की घटना ने एक बार फिर मणिपुर में जारी तनाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस और असम राइफल्स की टीम घटना की जांच कर रही है और आगजनी में शामिल लोगों की पहचान की कोशिश की जा रही है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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