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E20 पेट्रोल से खराब हुई 40 लाख की कार? मनीष कश्यप ने नितिन गडकरी पर लगाए गंभीर आरोप
E20 पेट्रोल को लेकर मनीष कश्यप ने कम माइलेज, इंजन खराब होने और वारंटी नहीं मिलने का दावा किया। जानिए विशेषज्ञों की राय और पूरा मामला।
E20 Petrol: जन सुराज पार्टी के नेता और यूट्यूबर मनीष कश्यप ने E20 पेट्रोल को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी महंगी कार में तकनीकी दिक्कतें आने लगी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी करीब 40 लाख रुपये की टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस सिर्फ 12 हजार किलोमीटर चलने के बाद ही खराब हो गई। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने वारंटी के तहत मरम्मत करने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, यह मनीष कश्यप के व्यक्तिगत दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कम माइलेज मिलने का लगाया आरोप
मनीष कश्यप का कहना है कि पहले उनकी कार 17 से 20 किलोमीटर प्रति लीटर तक माइलेज देती थी, लेकिन E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद यह घटकर 10 से 11 किलोमीटर प्रति लीटर रह गई। उन्होंने दावा किया कि यह समस्या केवल उनकी कार तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, कई अन्य वाहन मालिक भी कम माइलेज और इंजन से जुड़ी शिकायतें कर रहे हैं।
बार-बार सर्विस सेंटर पहुंच रही गाड़ी
मनीष कश्यप के मुताबिक, उनकी कार को 10 हजार किलोमीटर की सर्विस के बाद दोबारा सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा। उनका कहना है कि वाहन में इंजन नॉकिंग और अन्य तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले दो महीनों में उन्होंने तीन टोयोटा हाइब्रिड वाहन खरीदे थे, लेकिन सभी में इसी तरह की दिक्कतें महसूस हुईं।
सर्विस सेंटर में क्या कहा गया?
मनीष कश्यप ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि उन्होंने सर्विस सेंटर के एक मैकेनिक से बातचीत की। उनके अनुसार, मैकेनिक ने बताया कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की वजह से फ्यूल टैंक, फ्यूल लाइन, फ्यूल पंप और इंजेक्टर की समय-समय पर सफाई करनी पड़ रही है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
वारंटी और खर्च को लेकर उठाए सवाल
मनीष कश्यप ने कहा कि उन्होंने अपनी कार के लिए एक्सटेंडेड वारंटी भी ली थी, लेकिन इसके बावजूद वारंटी क्लेम स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हर 5 से 10 हजार किलोमीटर पर फ्यूल सिस्टम की सफाई करानी पड़े तो इसका खर्च कौन उठाएगा। उन्होंने मांग की कि E20 पेट्रोल से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
E20 पेट्रोल पर विशेषज्ञ की राय
ऑटोमोबाइल इंजीनियर अभिषेक राय के अनुसार, जिन वाहनों को E20 पेट्रोल के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कुछ तकनीकी समस्याएं पैदा कर सकता है। उन्होंने बताया कि पुरानी गाड़ियों में लगे रबर, प्लास्टिक और एल्यूमिनियम के कुछ हिस्से एथेनॉल के संपर्क में आने पर जल्दी खराब हो सकते हैं। वहीं, अप्रैल 2023 के बाद बनी और E20-अनुकूल (E20 Compatible) गाड़ियों के लिए सामान्य तौर पर इस ईंधन से नुकसान की संभावना नहीं मानी जाती, क्योंकि इन वाहनों का इंजन और फ्यूल सिस्टम इसी ईंधन के हिसाब से तैयार किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा एथेनॉल का मामला
इस बीच एथेनॉल सप्लाई नीति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने फिलहाल 2025-26 के लिए एथेनॉल सप्लाई व्यवस्था में किसी भी बदलाव पर रोक लगाते हुए मौजूदा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई तक एथेनॉल सप्लाई नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर अलग-अलग दावे और सवाल सामने आ रहे हैं। जहां कुछ वाहन मालिक इससे जुड़ी समस्याओं की बात कर रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि E20 का असर इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित वाहन इस ईंधन के अनुकूल बनाया गया है या नहीं।


