‘24 घंटे में माफी…’,22 हजार करोड़ के घोटाले के आरोप पर सिरसा का AAP को अल्टीमेटम, कोर्ट जाने की चेतावनी

₹22000 Crore Rice Scam Case: दिल्ली में 22 हजार करोड़ के कथित चावल घोटाले के आरोप पर सियासी घमासान तेज हो गया है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को आरोप वापस लेने और माफी मांगने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 9 Aug 2026 10:02 PM IST (Updated on: 9 Aug 2026 10:50 PM IST)
₹22000 Crore Rice Scam Case
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₹22000 Crore Rice Scam Case: दिल्ली के मंत्री और बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने कथित 22 हजार करोड़ रुपये के चावल घोटाले (Rice Scam) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) और संजीव झा (Sanjeev Jha) को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सिरसा ने दोनों नेताओं को अपने आरोप वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए 24 घंटे का समय दिया है।

सिरसा ने कहा है कि अगर सौरभ भारद्वाज और संजीव झा अपने आरोप वापस लेकर सार्वजनिक माफी नहीं मांगते हैं तो वह दोनों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने उनके खिलाफ झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए हैं।

'माफी मांगो या कोर्ट में मिलेंगे'

मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को सीधे तौर पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को 24 घंटे के भीतर अपने आरोप वापस लेने होंगे और सार्वजनिक माफी मांगनी होगी।

सिरसा ने कहा कि ऐसा नहीं करने पर वह दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे और उन्हें इन कथित दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए जवाबदेह ठहराएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि या तो माफी मांगें या फिर अदालत में मिलेंगे। सिरसा के मुताबिक, लगाए गए आरोप उन्हें बदनाम करने और उनकी छवि खराब करने के इरादे से किए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का दुर्भावनापूर्ण अभियान उनके विरोधियों के काम करने का तरीका नजर आता है, लेकिन अब बहुत हो चुका है।

22 हजार करोड़ के घोटाले के आरोप

मनजिंदर सिंह सिरसा की चेतावनी से पहले आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित 22 हजार करोड़ रुपये के चावल घोटाले का आरोप लगाया था। भारद्वाज ने दावा किया कि दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार (Rekha Gupta Government) और असम स्थित एक निगम ने भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई (Food Corporation of India) से सब्सिडी वाले चावल की मांग की थी।

सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, यह चावल दिल्ली के गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच बांटा जाना था। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था के तहत हर सप्ताह करीब 31 हजार मीट्रिक टन चावल मांगा गया था।

चावल निजी कंपनी को बेचने का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गरीबों और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के बजाय यह चावल बाद में हरियाणा (Haryana) की एक निजी कंपनी को बेच दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि यह चावल करीब 23.20 रुपये प्रति किलो की दर से हासिल किया गया और कथित तौर पर खुले बाजार में 46 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा गया। भारद्वाज के मुताबिक, दोनों कीमतों के बीच करीब 23 रुपये प्रति किलो का कमीशन बनता है।

उन्होंने इसी आधार पर दावा किया कि इस व्यवस्था के जरिए हर सप्ताह करीब 143 करोड़ रुपये का कथित घोटाला हो रहा था।

तीन साल तक चलने की थी योजना का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि यह व्यवस्था तीन साल तक जारी रखने की योजना थी। उनके मुताबिक, इस पूरी अवधि में लेनदेन की कुल अनुमानित कीमत करीब 22 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती थी।

भारद्वाज और संजीव झा ने कहा है कि कथित व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे। दोनों नेताओं ने दिल्ली सरकार से सब्सिडी वाले चावल की खरीद और उसके वितरण को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

बीजेपी और AAP के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

कथित चावल घोटाले के आरोप के बाद दिल्ली की राजनीति में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। सौरभ भारद्वाज और संजीव झा ने कथित चावल वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं और इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की बात कही है।

वहीं, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन आरोपों को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए दोनों नेताओं को 24 घंटे के भीतर आरोप वापस लेने और सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है। सिरसा ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर वह कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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