UP में चढ़ावा चोरी हरिद्वार में एक्शन! इस मंदिर में बिना जेब वाले कपड़े पहनेंगे पुजारी, गोलमाल पर होगी FIR

Haridwar No-Pocket Dress Code: अयोध्या और बदरीनाथ धाम में चढ़ावा विवादों के बीच हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अब दान की रसीद दी जाएगी, रोजाना हिसाब रखा जाएगा, पुजारी बिना जेब वाले वस्त्र पहनेंगे और हेराफेरी पर एफआईआर के साथ सख्त कार्रवाई होगी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 6 July 2026 9:05 PM IST
Haridwar No-Pocket Dress Code
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Haridwar No-Pocket Dress Code: अयोध्या (Ayodhya) और बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham) में दान और चढ़ावे (Donation and Offerings) की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच हरिद्वार (Haridwar) स्थित सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple) ट्रस्ट ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मंदिर ट्रस्ट ने दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सात सदस्यीय निगरानी समिति (Monitoring Committee) के गठन का फैसला किया है।

यह समिति मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखेगी, ताकि व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। साथ ही पुजारियों को बिना जेब वाले कपड़े पहनने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना जेब वाले कपड़े पहनेंगे पुजारी

मंदिर ट्रस्ट की ओर से तय किया गया है कि अब प्रत्येक श्रद्धालु को उसके दान की अधिकृत रसीद (Receipt) उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही प्रतिदिन मिलने वाली दानराशि और चढ़ावे का विधिवत लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक और अहम निर्णय लिया गया है। मंदिर के पुजारियों को बिना जेब वाले वस्त्र पहनने होंगे, ताकि दान और चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी प्रकार के संदेह की स्थिति पैदा न हो।

हेराफेरी पर एफआईआर की चेतावनी

मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति चढ़ावे या दानराशि में किसी भी प्रकार की हेराफेरी करता पाया जाता है तो उसे सेवा से निष्कासित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उसके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

यह निर्णय अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bharatiya Akhara Parishad) एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट (Shri Mansa Devi Temple Trust) के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज (Ravindra Puri Maharaj) ने सोमवार को मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में लिया।

श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि मनसा देवी मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां दान व्यवस्था में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।

उन्होंने बताया कि नवगठित समिति दान और चढ़ावे की संपूर्ण प्रक्रिया की नियमित निगरानी करेगी। सभी पुजारियों को बिना जेब वाले वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा और प्रत्येक श्रद्धालु को उसके दान की आधिकारिक रसीद दी जाएगी।

प्रसाद और फूलों के दोबारा उपयोग पर भी रोक

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि प्रतिदिन प्राप्त होने वाली दानराशि का पूरा हिसाब रखा जाएगा। इसके अलावा मंदिर में चढ़ाए गए नारियल (Coconut), प्रसाद (Prasad) और फूलों (Flowers) के दोबारा उपयोग पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न मंदिरों में चढ़ावे से जुड़े विवाद सामने आने के बाद यह जरूरी हो गया था कि मनसा देवी मंदिर में ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।

निष्पक्ष जांच के बाद ही निकाला जाए निष्कर्ष

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने दो टूक कहा कि यदि कोई पुजारी या कर्मचारी दानराशि के दुरुपयोग या हेराफेरी में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने हाल के दिनों में प्रमुख मंदिरों में सामने आए दान और चढ़ावा संबंधी विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को आरोप सिद्ध होने से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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