Medical Store Bandh: आज दवा खरीदने निकलें तो जान लें, आज बंद रह सकते हैं मेडिकल स्टोर! ई-फार्मेसी के विरोध में उतरे केमिस्ट

Medical Store Bandh 20 May 2026 India: ई-फार्मेसी के विरोध में केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल, जानें किन राज्यों में खुली रहेंगी दवा दुकानें

Jyotsana Singh
Published on: 20 May 2026 6:30 AM IST
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Medical Store Strike 20 May 2026 India

Medical Store Strike 20 May 2026 India: ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते ट्रेंड के साथ देश में ई-कॉमर्स बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है, जबकि पारंपरिक होलसेल और रिटेल बाजार तुलनात्मक रूप से मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। आज लोग बाजार जाकर खरीदारी करने के बजाय घर बैठे ही फ्लिपकार्ट, अमेजन, ब्लिंकिट और ज़ेप्टो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। किराना से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान और फैशन प्रोडक्ट तक, लगभग हर चीज अब एक क्लिक पर उपलब्ध है। ऐसे में दवा बाजार भी इस बदलाव से अछूता नहीं रहा।

ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म अब भारी डिस्काउंट, तेज डिलीवरी और घर बैठे दवा पहुंचाने जैसी सुविधाओं के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। कई कंपनियां डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन ऑनलाइन अपलोड करवाकर दवाएं उपलब्ध कराने की सुविधा भी दे रही हैं। हालांकि, ई-फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक मेडिकल स्टोर संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। दवा कारोबारियों का कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री से छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और दवाओं की गुणवत्ता व नियमों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बढ़ते असंतोष के बीच देशभर के केमिस्ट और दवा विक्रेता ई-फार्मेसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हड़ताल के जरिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

ई-फार्मेसी के खिलाफ देशभर के केमिस्ट और दवा विक्रेताओं ने आज यानी बुधवार 20 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस बंद का असर मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। दवा कारोबारियों का कहना है कि बिना सख्त नियमों के चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि कई राज्यों के फार्मेसी संघों ने इस हड़ताल से दूरी बना ली है, जिससे आम लोगों को दवाओं की उपलब्धता में पूरी तरह परेशानी नहीं होगी। जानकारी के मुताबिक देशभर में करीब 12 लाख से अधिक केमिस्ट और दवा वितरक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। यह हड़ताल मुख्य रूप से ई-फार्मेसी कंपनियों की ओर से भारी छूट देकर दवाओं की ऑनलाइन बिक्री किए जाने और इस क्षेत्र में स्पष्ट नियामक व्यवस्था नहीं होने के खिलाफ की जा रही है।

हालांकि सभी जगह मेडिकल सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं रहेंगी। सूत्रों के अनुसार प्रमुख फार्मेसी श्रृंखलाएं, अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी स्टोर 20 मई को खुले रहेंगे। ऐसे में मरीजों को जरूरी दवाएं मिलने की संभावना बनी रहेगी।

इन राज्यों ने हड़ताल से किया किनारा

देश के कई राज्यों के खुदरा फार्मेसी संघों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इस हड़ताल में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है। पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, लद्दाख, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम और उत्तराखंड के फार्मेसी संघों ने लिखित रूप से भरोसा दिलाया है कि वे अपने मेडिकल स्टोर खुले रखेंगे और आम जनता को दवाओं की आपूर्ति बाधित नहीं होने देंगे। इन संगठनों का कहना है कि मरीजों की सुविधा सबसे महत्वपूर्ण है। जीवन रक्षक दवाओं पर निर्भर लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने बंद से दूरी बनाई है।

क्यों हो रहा है ई-फार्मेसी का विरोध?

ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) लंबे समय से ई-फार्मेसी को लेकर चिंता जता रहा है। संगठन का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त जांच के दवाएं बेच रहे हैं। इससे नकली दवाओं की बिक्री, बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा उपलब्ध होना और दवाओं के गलत इस्तेमाल जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

दवा विक्रेताओं का यह भी कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों के कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका मानना है कि यदि इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम नहीं बनाए गए तो लाखों छोटे दवा कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

सरकार और नियामक क्या कर रहे हैं?

सूत्रों के मुताबिक हाल ही में दवा विक्रेताओं के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय औषधि नियामक से मुलाकात की थी। इस दौरान नियामक की ओर से आश्वासन दिया गया कि ई-फार्मेसी से जुड़े मुद्दों की सक्रिय रूप से समीक्षा की जा रही है। सरकार इस क्षेत्र के लिए एक मजबूत नियामक ढांचे पर काम कर रही है ताकि मरीजों की सुरक्षा और दवा कारोबारियों की चिंाओं दोनों का समाधान निकाला जा सके। इसी आश्वासन के बाद कुछ राज्यों के फार्मेसी संघों ने हड़ताल से अलग रहने का फैसला लिया। उनका कहना है कि सरकार के साथ बातचीत जारी है और समाधान की उम्मीद है।

आम लोगों पर कितना पड़ेगा असर?

जहां स्थानीय स्तर पर मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे, वहां लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। खासकर बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज और नियमित दवाओं पर निर्भर लोगों को पहले से दवाएं खरीदने की सलाह दी गई थी। हालांकि अस्पताल आधारित मेडिकल स्टोर और जन औषधि केंद्र खुले रहने से पूरी तरह संकट की स्थिति बनने की संभावना कम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दौर में ई-फार्मेसी को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन इसके लिए सख्त नियम जरूरी हैं। ऑनलाइन दवा बिक्री में डॉक्टर की पर्ची की अनिवार्यता, दवा की गुणवत्ता की निगरानी और उपभोक्ता सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट कानून बनाना समय की मांग बन चुका है।

फिलहाल इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि तकनीक और पारंपरिक कारोबार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि मरीजों को सुविधा भी मिले और छोटे दवा कारोबारियों के हित भी सुरक्षित रह सकें।

Jyotsana Singh

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