BJP संगठन के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल? 12 पद खाली, यूपी से पंजाब तक बदलेंगे समीकरण

Modi Cabinet Reshuffle: BJP की नई टीम के बाद मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज है। 12 पद खाली हैं। जानें कौन बन सकता है मंत्री और किन नेताओं पर संकट।

Alakha Singh
Published on: 25 Aug 2026 9:16 PM IST
BJP संगठन के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल? 12 पद खाली, यूपी से पंजाब तक बदलेंगे समीकरण
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Modi Cabinet Reshuffle 2026: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब सियासी निगाहें मोदी सरकार के अगले संभावित कैबिनेट फेरबदल पर टिक गई हैं। 17 अगस्त को बीजेपी ने अपनी नई केंद्रीय टीम का ऐलान किया और इसके बाद 22 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुख्यालय में नए पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की। संगठन की नई टीम में चुनावी रणनीति, युवा संपर्क और जमीनी विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अब सरकार में भी बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।

12 मंत्री पद खाली, 81 तक हो सकती है मंत्रिपरिषद

संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। मौजूदा लोकसभा के हिसाब से यह अधिकतम 81 सदस्य बैठती है।

वर्तमान में प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं। इस हिसाब से 12 पद सीधे तौर पर खाली हैं। हालांकि, फेरबदल में केवल इन खाली पदों को भरना ही मुद्दा नहीं होगा। कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है, कुछ के विभाग बदले जा सकते हैं और कुछ नेताओं की छुट्टी भी संभव है।

क्यों बढ़ी कैबिनेट फेरबदल की चर्चा?

बीजेपी में 'एक व्यक्ति, एक पद' की परंपरा के तहत संगठन में नई जिम्मेदारी पाने वाले कई मंत्रियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

पीयूष गोयल को बीजेपी की नई केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में उनके मंत्री पद को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।

इसी तरह हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है। दोनों अभी केंद्र में राज्य मंत्री हैं। संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त बोझ

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई में केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया।

इस बदलाव के बाद शिक्षा मंत्रालय समेत कुछ अन्य मंत्रालयों में भी जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की जरूरत बढ़ी है।

कई मंत्री संभाल रहे हैं एक से ज्यादा मंत्रालय

संभावित फेरबदल का एक बड़ा कारण मंत्रियों पर बढ़ता काम का बोझ भी है। NDTV के मुताबिक फिलहाल 14 मंत्री एक से ज्यादा मंत्रालय या विभाग संभाल रहे हैं। इनमें अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एचडी कुमारस्वामी और अश्विनी वैष्णव जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

फेरबदल होने की स्थिति में सरकार मंत्रालयों का बोझ कम करने के लिए कुछ विभाग नए चेहरों को सौंप सकती है।

नवंबर में इन मंत्रियों पर भी नजर

राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के कारण पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा भी चर्चा में हैं। दोनों का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म होना है। ऐसे में आगामी महीनों में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी फैसला अहम हो सकता है।

कौन-कौन हो सकता है मोदी कैबिनेट में शामिल?

संभावित विस्तार में केवल बीजेपी के सांसद ही नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों और हाल में राजनीतिक पाला बदलने वाले नेताओं को भी जगह मिलने की चर्चा है।

हरसिमरत कौर बादल की वापसी?

पंजाब में अकाली दल और बीजेपी के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाओं के बीच हरसिमरत कौर बादल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वह पहले मोदी सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया था।

अगर SAD-BJP गठबंधन दोबारा आकार लेता है तो पंजाब के चुनावी समीकरणों को देखते हुए उनकी वापसी महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दे सकती है।

राघव चड्ढा गुट से किसी को मौका?

आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ आए सात राज्यसभा सांसदों का समूह भी संभावित फेरबदल में महत्वपूर्ण हो सकता है। इस समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा कर रहे हैं।

पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस समूह में से किसी चेहरे को केंद्र में जिम्मेदारी मिलने की संभावना को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अभी किसी नाम पर आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

श्रीकांत शिंदे की दावेदारी

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ताकत बढ़ने के बाद श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित कैबिनेट चेहरों में सामने आया है। सहयोगी दल के युवा चेहरे के तौर पर उनकी एंट्री महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम हो सकती है।

पश्चिम बंगाल से भी चौंकाने वाली एंट्री?

तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए कुछ सांसदों ने नया राजनीतिक समूह बनाकर एनडीए का समर्थन किया है। ऐसे नेताओं को मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना भी चर्चा में है। अगर ऐसा होता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी के लिए यह बड़ा संदेश होगा।

उम्र और युवा चेहरों पर भी फोकस

मोदी कैबिनेट में इस समय 70 वर्ष से अधिक उम्र के कई मंत्री हैं। सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी शामिल हैं, जिनकी उम्र 81 वर्ष है। वहीं टीडीपी के के. राममोहन नायडू 38 वर्ष की उम्र में मंत्रिपरिषद के सबसे युवा कैबिनेट मंत्रियों में हैं।

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक संभावित फेरबदल में युवा और महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में भी महिलाओं और अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र से बढ़ सकती है हिस्सेदारी

संभावित फेरबदल में चुनावी राज्यों का असर साफ दिखाई दे सकता है। उत्तर प्रदेश और गुजरात सबसे अहम राज्यों में हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि गुजरात में भी अगले वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों पर भी नजर है। कांग्रेस शासित कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश से भी नए चेहरों को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने की राजनीतिक रणनीति पर विचार हो सकता है।

2029 लोकसभा चुनाव की भी तैयारी?

संभावित फेरबदल को केवल तत्काल राजनीतिक जरूरत के तौर पर नहीं देखा जा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और बीजेपी नेतृत्व की नजर 2029 के लोकसभा चुनाव पर भी है।

ऐसे में कैबिनेट में संभावित बदलाव के पीछे तीन बड़े फैक्टर काम कर सकते हैं- संगठन और सरकार में जिम्मेदारियों का संतुलन, आगामी विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी।

फिलहाल बीजेपी या केंद्र सरकार की ओर से कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए सामने आ रहे नामों को संभावित दावेदारों और राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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