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मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की आहट? दिवाली से पहले बदल सकता है केंद्रीय मंत्रिमंडल!
Modi Cabinet Reshuffle: एल मुरुगन के केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफे के बाद मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। दिवाली से पहले मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
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Modi Cabinet Reshuffle: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंगलवार, 13 अक्टूबर को उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब राज्य मंत्री एल मुरुगन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। मुरुगन ने कहा कि वह तमिलनाडु लौटकर राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए काम करना चाहते हैं। उनके इस्तीफे के बाद अब मोदी मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
सरकारी सूत्रों के हवाले से सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिवाली से पहले कभी भी मोदी मंत्रिपरिषद (Modi Council of Ministers) में फेरबदल हो सकता है। इस संभावित फेरबदल में कम से कम आधा दर्जन पद खाली होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ढाई साल बाद फेरबदल की चर्चा तेज
अगर मोदी मंत्रिमंडल में यह फेरबदल होता है तो यह नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के करीब आधे पड़ाव पर होगा। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से पिछले ढाई वर्षों में मंत्रिपरिषद में कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ है।
अब हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने मंत्रिमंडल फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की संभावनाओं को फिर हवा दे दी है। माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र (Winter Session) से पहले मोदी कैबिनेट में बदलाव हो सकता है।
इस्तीफों और संगठनात्मक बदलावों का दौर
मंगलवार को एल मुरुगन ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया और कहा कि वह तमिलनाडु में पार्टी संगठन के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने राज्य में भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की इच्छा जताई है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन ने भी अपने राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने पर मंत्री पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा भाजपा ने राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा के लिए नामांकित नहीं किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन दोनों मंत्रियों का भी निकट भविष्य में इस्तीफा हो सकता है।
हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान
मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा के बीच एक और अहम घटनाक्रम हुआ है। केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत माना जा रहा है कि हर्ष मल्होत्रा को भी मोदी मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। इसके अलावा इस समय मोदी कैबिनेट में 12 ऐसे मंत्री हैं, जिनके पास एक से ज्यादा मंत्रालयों का प्रभार है। यह संख्या करीब 40 प्रतिशत बैठती है।
दो कैबिनेट मंत्रियों के पास तो तीन-तीन बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। इसके अलावा हाल ही में सीजेपी आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इन इस्तीफों और संगठनात्मक बदलावों ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।
संसद के विशेष सत्र की भी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में मंत्रियों के कामकाज की प्रगति की समीक्षा करने और सुशासन में सुधार के लिए सुझाव देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिपरिषद की कई बैठकों की अध्यक्षता की है। हालांकि, कुछ महीने पहले भी कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं तेज हुई थीं। उस समय शीर्ष सूत्रों ने संसद के मॉनसून सत्र पर ध्यान केंद्रित होने की बात कहते हुए इन अटकलों को खारिज कर दिया था।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने अभी तक संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान यानी प्रोरोग नहीं किया है। इसी वजह से आगामी निर्धारित शीतकालीन सत्र से पहले संसद का विशेष सत्र (Special Parliament Session) बुलाए जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
चुनावी समीकरणों पर भी रहेगा फोकस
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में ऐसे चेहरों को जगह दे सकते हैं, जो क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों में फिट बैठते हों।
इस लिहाज से उत्तर प्रदेश के कुछ और बड़े चेहरों को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए किसी सिख नेता को भी मंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है।
इसी तरह मोदी सरकार किसी क्रिश्चियन नेता को भी मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है। अगर हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा की विदाई होती है तो कम से कम 10 नए मंत्रियों को शामिल किए जाने की संभावना बन सकती है।
81 तक हो सकती है मंत्रिपरिषद की संख्या
केंद्रीय मंत्रिपरिषद (Union Council of Ministers) में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में संभावित इस्तीफों और नए चेहरों को शामिल करने के लिए सरकार के पास मंत्रिमंडल में बदलाव की पर्याप्त गुंजाइश है।
एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद शुरू हुई यह चर्चा अब केवल एक मंत्री के पद छोड़ने तक सीमित नहीं रह गई है। संभावित इस्तीफों, संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव, कई मंत्रियों के पास अतिरिक्त मंत्रालयों के प्रभार और आगामी विधानसभा चुनावों के समीकरणों के बीच मोदी सरकार में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं।


