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मोदी सरकार में मंत्रालयों का अंकगणित — कहाँ रहे सबसे ज़्यादा बदलाव और कहाँ दिखा निरंतरता का दबदबा
Cabinet Reshuffle: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से अब तक किन मंत्रालयों में सबसे अधिक मंत्री बदले और किन प्रमुख मंत्रालयों में स्थिरता बनी रही? पढ़िए मंत्रालयों के फेरबदल और प्रशासनिक रणनीति का विस्तृत विश्लेषण।
Narendra Modi Cabinet (Image Credit-Social Media)
नई दिल्ली। मई 2014 में सत्ता संभालने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अपने कई प्रयोगों और प्रशासनिक फैसलों के लिए जानी जाती है। सरकार के संचालन और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर कैबिनेट फेरबदल के दौरान कुछ मंत्रालयों में लगातार नए चेहरों को मौका दिया गया, तो वहीं देश के 'Big 4' यानी शीर्ष चार मंत्रालयों में काफी हद तक स्थिरता बनाए रखी गई।
जिन मंत्रालयों में बार-बार बदले गए मंत्री
1. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय: सबसे ज़्यादा 8 बार जिम्मेदारी बदली
मोदी सरकार में अगर किसी एक मंत्रालय में सबसे अधिक बार चेहरे बदले गए हैं, तो वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय है:
प्रकाश जावड़ेकर: मई 2014 से नवंबर 2014 तक।
अरुण जेटली: नवंबर 2014 से जुलाई 2016 तक।
एम. वेंकैया नायडू: जुलाई 2016 से जुलाई 2017 तक।
स्मृति ईरानी: जुलाई 2017 से मई 2018 तक।
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (स्वतंत्र प्रभार): मई 2018 से मई 2019 तक।
प्रकाश जावड़ेकर (पुनः): मई 2019 से जुलाई 2021 तक।
अनुराग ठाकुर: जुलाई 2021 से जून 2024 तक।
अश्विनी वैष्णव: जून 2024 से वर्तमान तक।
2. नागरिक उड्डयन मंत्रालय: 5 नेताओं ने संभाली कमान
उड्डयन क्षेत्र की नीतियों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बीच यहाँ 5 अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी गई:
अशोक गजपति राजू: मई 2014 से मार्च 2018 तक।
सुरेश प्रभु: मार्च 2018 से मई 2019 तक।
हरदीप सिंह पुरी: मई 2019 से जुलाई 2021 तक।
ज्योतिरादित्य सिंधिया: जुलाई 2021 से जून 2024 तक।
राममोहन नायडू: जून 2024 से वर्तमान तक।
3. शिक्षा मंत्रालय: 4 बार बदला नेतृत्व
2020 से पहले इसे 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय' कहा जाता था। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के कार्यान्वयन और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के चलते इसमें 4 बार नेतृत्व बदला गया:
स्मृति ईरानी: मई 2014 से जुलाई 2016 तक।
प्रकाश जावड़ेकर: जुलाई 2016 से मई 2019 तक।
रमेश पोखरियाल 'निशंक': मई 2019 से जुलाई 2021 तक (इन्हीं के कार्यकाल में 29 जुलाई 2020 को मंत्रालय का नाम बदलकर 'शिक्षा मंत्रालय' किया गया)।
धर्मेंद्र प्रधान: जुलाई 2021 से वर्तमान तक।
4. रेल मंत्रालय: 4 मंत्रियों का कार्यकाल
रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस विभाग में 4 दिग्गजों को कमान सौंपी गई:
डी. वी. सदानंद गौड़ा: मई 2014 से नवंबर 2014 तक।
सुरेश प्रभु: नवंबर 2014 से सितंबर 2017 तक।
पीयूष गोयल: सितंबर 2017 से जुलाई 2021 तक।
अश्विनी वैष्णव: जुलाई 2021 से वर्तमान तक।
5. कानून एवं न्याय मंत्रालय: 4 बार मिली नई कमान
कानूनी सुधारों और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कानून मंत्रालय में भी 4 बार बदलाव हुए:
रविशंकर प्रसाद: मई 2014 से नवंबर 2014 तक।
डी. वी. सदानंद गौड़ा: नवंबर 2014 से जुलाई 2016 तक।
रविशंकर प्रसाद (पुनः): जुलाई 2016 से जुलाई 2021 तक।
किरेन रिजिजू: जुलाई 2021 से मई 2023 तक।
अर्जुन राम मेघवाल: मई 2023 से वर्तमान तक।
'Big 4' मंत्रालय: जहाँ कायम रही शीर्ष स्थिरता
सरकार के चार सबसे संवेदनशील और प्रमुख विभागों में शुरुआती समायोजन के बाद से बहुत कम फेरबदल देखने को मिले हैं:
गृह मंत्रालय (2 मंत्री): राजनाथ सिंह ने मई 2014 से मई 2019 तक पूरे 5 साल गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाला। इसके बाद मई 2019 में अमित शाह गृह मंत्री बने, जो लगातार इस पद पर बने हुए हैं।
विदेश मंत्रालय (2 मंत्री): सुषमा स्वराज ने मई 2014 से मई 2019 तक पूरे 5 साल विदेश मंत्रालय का कुशल नेतृत्व किया। मई 2019 से पूर्व कूटनीतिज्ञ डॉ. एस. जयशंकर निरंतर भारत की विदेश नीति की कमान संभाल रहे हैं।
वित्त मंत्रालय (2 पूर्णकालिक मंत्री): अरुण जेटली ने मई 2014 से मई 2019 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया (स्वास्थ्य कारणों से बीच में अल्पकाल के लिए पीयूष गोयल ने कार्यवाहक वित्त मंत्री का प्रभार देखा था)। मई 2019 में निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनीं और वे तब से लगातार इस पद पर हैं।
रक्षा मंत्रालय (3 प्रमुख चेहरे): कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में अरुण जेटली ने मई 2014 से नवंबर 2014 तक अतिरिक्त प्रभार संभाला। इसके बाद मनोहर पर्रिकर (नवंबर 2014 से मार्च 2017) और निर्मला सीतारमण (सितंबर 2017 से मई 2019) रक्षा मंत्री रहीं। मई 2019 से राजनाथ सिंह लगातार रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति से जुड़े 'Big 4' मंत्रालयों में निरंतरता बनाए रखकर सरकार ने वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता का संदेश दिया है, जबकि अन्य मंत्रालयों में प्रदर्शन, नई प्राथमिकताओं और गठबंधनों के आधार पर बदलाव किए गए हैं।


