'पाकिस्तानी भारत के दुश्मन नहीं...', RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान ने मचाई सनसनी!

Mohan Bhagwat on Pakistan: मोहन भागवत ने भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी दिल से भारतीयों के दुश्मन नहीं हैं और स्थायी नफरत व दुश्मनी किसी समस्या का समाधान नहीं है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 8 Aug 2026 6:36 PM IST
Mohan Bhagwat on India-Pakistan Ties
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Image Source- Social Media

Mohan Bhagwat on Pakistan: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने भारत-पाकिस्तान संबंधों (India-Pakistan Relations) और दुनिया में चल रहे संघर्षों को लेकर बड़ा बयान दिया है।

मुंबई में आयोजित ‘इण्डियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ यानी आईआईएमयूएन (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का भारतीय समाधान (Indian Solution) दूसरों पर विजय हासिल करना या उन्हें खत्म करना नहीं है, बल्कि सामंजस्य और संवाद स्थापित करना है।

मोहन भागवत ने साफ कहा कि पाकिस्तान के लोग पूरी तरह भारतीयों के दुश्मन नहीं हैं और किसी भी देश के साथ स्थायी शत्रुता किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

सरकार और सेना के साथ खड़े होना जरूरी

मुंबई में जेन जी (Gen Z) के साथ संवाद के दौरान मोहन भागवत से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ जारी तनाव को लेकर सवाल पूछा गया।

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब देश में संघर्ष या युद्ध की स्थिति होती है तो हर नागरिक को अपनी सरकार और सेना के फैसलों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान ऐसे संपर्क या जुड़ाव को रोका जा सकता है, जिनसे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि संघर्ष की वजह से बने संबंध हमेशा के लिए खत्म कर दिए जाएं।

भागवत ने कहा कि संघर्ष के समय सरकार और सेना के साथ खड़ा होना जरूरी है, लेकिन टकराव खत्म होने के बाद रिश्तों को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश होनी चाहिए।

‘रिश्ते हमेशा के लिए खत्म नहीं होने चाहिए’

आरएसएस प्रमुख ने चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन के लोग यह कहते हैं कि पिछले 2000 वर्षों से भारत ने उन्हें मूल्य दिए हैं।

वहीं पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि करीब 100 साल पहले तक पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक सच्चाई को भुलाया नहीं जा सकता।

भागवत ने कहा कि जब संघर्ष खत्म हो जाए तो हमें वहीं से शुरुआत करनी होगी, जहां से हमने चीजें छोड़ी थीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्थायी नफरत और स्थायी दुश्मनी किसी समस्या का समाधान नहीं है।

‘पाकिस्तानी दिल से भारतीयों के दुश्मन नहीं’

मोहन भागवत ने भारत और पाकिस्तान के आम लोगों के बीच संबंधों (People-to-People Relations) पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा कारण राजनीतिक परिस्थितियां हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि पाकिस्तानी लोग दिल से भारतीयों के दुश्मन हैं या भारतीय लोग पाकिस्तानियों के दुश्मन हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राज्य, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं भी जीवन की वास्तविकता हैं।

भागवत ने कहा कि संघर्ष के समय भारत अपनी सरकार और सेना के साथ है, लेकिन यह भी समझना चाहिए कि एक दिन टकराव खत्म होगा और फिर दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के साथ जुड़ना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि आखिरकार पूरी मानवता एक है और इसी सोच के साथ संघर्ष के बाद संवाद और संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश होनी चाहिए।

बताया भारतीय समाधान का मतलब

मोहन भागवत ने विवादों के समाधान को लेकर भी अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारतीय समाधान (Indian Approach) का मतलब यह नहीं है कि किसी दूसरे पक्ष पर विजय हासिल की जाए या उसे नष्ट कर दिया जाए।

उनके मुताबिक भारतीय दृष्टिकोण का उद्देश्य सामंजस्य (Harmony) और संवाद (Dialogue) स्थापित करना है।

यानी किसी विवाद को खत्म करने के लिए ऐसा रास्ता तलाशना चाहिए जिसमें दोनों पक्षों के बीच बातचीत और बेहतर संबंधों की गुंजाइश बनी रहे।

भारत-पाक तनाव के बीच आया बयान

मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद कड़ा सैन्य गतिरोध देखने को मिला था।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने सैन्य कार्रवाई की थी।

इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिनों तक सैन्य टकराव हुआ था और अंत में यह युद्धविराम (Ceasefire) के साथ खत्म हुआ था। ऐसे समय में भागवत का बयान भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर एक अलग दृष्टिकोण सामने रखता है।

उन्होंने एक तरफ संघर्ष और युद्ध की स्थिति में सरकार और सेना के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात कही, तो दूसरी तरफ यह भी कहा कि संघर्ष के कारण स्थायी दुश्मनी नहीं बननी चाहिए।

‘पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट’ पर जोर

मोहन भागवत के इस बयान को भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के बीच पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट (People-to-People Connect) और कूटनीतिक संवाद (Diplomatic Dialogue) के रास्ते खुले रखने के भारत के दीर्घकालिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

उनका संदेश यह है कि संघर्ष के समय राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार के फैसलों के साथ खड़ा होना जरूरी है, लेकिन संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत और संबंधों को फिर से आगे बढ़ाने की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। भागवत ने स्थायी नफरत के बजाय संवाद और सामंजस्य को विवादों के समाधान का रास्ता बताया है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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