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काम नहीं, जाति पर मिलते हैं वोट! मोहन भागवत ने खोल दी राजनीति की असली सच्चाई... UCC पर की महत्वपूर्ण टिप्पणी
Mohan Bhagwat on UCC & Caste Politics: भागवत ने यह बातें ‘राष्ट्रीय विकास की उत्प्रेरक के रूप में सामाजिक समरसता’ विषय पर आयोजित एक व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम के दौरान कहीं।
Mohan Bhagwat on UCC & Caste Politics
Mohan Bhagwat on UCC & Caste Politics: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भगवत भागवत ने आज 7 मई 2026 यानी गुरुवार को सामाजिक समरसता, जाति आधारित राजनीति और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर अपनी खुलकर विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि जब तक समाज खुद जातिगत पहचान को महत्व देता रहेगा, तब तक राजनीतिक दल इसका बड़ा फायदा उठाते रहेंगे। भागवत ने स्पष्ट करते हुए कहा कि नेताओं का मुख्य उद्देश्य वोट हासिल करना होता है और अगर उन्हें काम के आधार पर वोट नहीं मिलते, तो वे जाति के आधार पर राजनीति करेंगे।
भागवत का इन बातों पर मुख्य फोकस
भागवत ने यह बातें ‘राष्ट्रीय विकास की उत्प्रेरक के रूप में सामाजिक समरसता’ विषय पर आयोजित एक व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत करने पर मुख्य रूप से बल देते हुए कहा कि सिर्फ नारे लगाने से परिवर्तन नहीं आएगा, बल्कि लोगों को अपने व्यवहार और आचरण में समरसता दिखानी होगी।
RSS प्रमुख ने विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए सामाजिक एकता बहुत आवश्यक है और समाज को विभाजनकारी सोच से ऊपर उठना ही होगा।
जनसंख्या नियंत्रण कानून और UCC पर कही ये बात
जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर पूछे गए सवाल पर भागवत ने कहा कि RSS कोई सरकारी संस्था नहीं, बल्कि एक सामाजिक संगठन है। उन्होंने साफ़ करते हुए कहा कि किसी भी नीति या कानून की सफलता जनता के सहयोग पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा, "पहले लोगों को शिक्षित करना आवश्यक है। नीति बनाना बहुत ही ज़रूरी है, लेकिन जनता का समर्थन और जागरूकता उसके सफल क्रियान्वयन के लिए सबसे आवश्यक है।"
जनसंख्या नियंत्रण उपायों का भी किया जिक्र
आपातकाल के दौरान लागू किए गए जनसंख्या नियंत्रण उपायों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि जब नीतियों को आक्रामक तरीके से लागू किया जाता है, तो जनता में असंतोष पैदा होता है और उसका राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिलता है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकारों को संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित और संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
भागवत के इस बयान को आगामी राजनीतिक और सामाजिक बहस के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ऐसे वक़्त में जब देश में जाति आधारित जनगणना, UCC और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज है।


