Monsoon 2026: सूखा पड़ेगा या आएगी बाढ़? जानें मौसम विभाग और वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी भविष्यवाणी

Monsoon 2026: IMD) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञों के ताजा आकलन मुताबिक, इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर जगह सूखा ही पड़ेगा।

Priya Singh Bisen
Published on: 25 Jun 2026 2:10 PM IST
Monsoon 2026
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Monsoon 2026

Monsoon 2026: साल 2026 का Monsoon इस वक़्त पूरे देश में सब से बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। भीषण गर्मी के बीच देश के किसान, कारोबारी और आम नागरिक सभी यह जानने को बेताब हैं कि इस साल भारत में 'सूखे' का खतरा ज्यादा रहेगा या फिर 'बाढ़' जैसी स्थिति देखने को मिलेगी। भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञों के ताजा आकलन मुताबिक, इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर जगह सूखा ही पड़ेगा। कई क्षेत्रों में कम वर्षा तो कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं।

क्या कहता है IMD का ताजा पूर्वानुमान?

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम में मानसून सामान्य से भी कुछ कम रहने की संभावना है। IMD ने मानसून वर्षा को दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90% के आसपास रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग का कहना है कि देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है, जबकि पूर्वोत्तर भारत और कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में सामान्य या ज्यादा बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

El Nino से बढ़ी चिंता


मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल "एल नीनो" (El Nino) प्रभाव मानसून को प्रभावित कर सकता है। आपको बता दे, El Nino एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर (pacific ocean) का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है। इसका गंभीर प्रभाव भारत में अक्सर कम वर्षा और ज्यादा गर्मी के रूप में देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में मध्यम से मजबूत एल नीनो परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं, जिससे मानसून कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।

सूखे का खतरा किन क्षेत्रों में?

अगर मानसून कमजोर रहता है तो सबसे अधिक प्रभाव उन इलाकों पर पड़ सकता है जहां सिंचाई की बहुत सुविधाएं सीमित हैं। उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और कुछ पश्चिमी राज्यों में वर्षा की कमी कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। खासतौर से धान, दालें, तिलहन, कपास और मक्का जैसी फसलों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार ने भी कई संवेदनशील जिलों के लिए वैकल्पिक कृषि योजनाएं तैयार करनी शुरू कर दी हैं।

फिर बाढ़ का खतरा क्यों बना हुआ है?

इन परिस्थितियों देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून का अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में समान रूप से कम वर्षा होगी। बल्कि, देखा जाए तो हाल के सालों में मौसम का पैटर्न ज्यादा अस्थिर हुआ है। कम दिनों में अत्यधिक वर्षा (Extreme Rainfall Events) की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में कुछ राज्यों में सामान्य से कम मौसमी वर्षा होने के बावजूद अचानक भारी वर्षा से बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।

पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और कुछ तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना रह सकता है।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा प्रभाव ?

भारत जैसे देश की लगभग आधी कृषि भूमि अब भी मानसून पर ही निर्भर है। कमजोर मानसून से फसल उत्पादन घट सकता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जुलाई और अगस्त महीने में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, सरकार के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर तत्काल चिंता कम है।

तो... सूखा होगा या बाढ़?


मौजूदा वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि 2026 में पूरे भारत में व्यापक बाढ़ या भीषण सूखे जैसी एकतरफा स्थिति बनने की संभावना कम है। इसके बजाय देश को "असमान मानसून" का सामना करना पड़ सकता है। कुछ राज्यों में वर्षा की कमी और सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा से बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी जुलाई और अगस्त के महीने पूरे मानसून सीजन की दिशा तय करेंगे। फिलहाल किसानों और प्रशासन को जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर खास तौर से ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

कुल मिलाकर 2026 का मौसम भारत के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। यह साल इस बात की परीक्षा भी हो सकता है कि देश बदलते जलवायु पैटर्न और चरम मौसमीय घटनाओं से निपटने के लिए कितना तैयार है।

Priya Singh Bisen
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Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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