नागपुर में BJP की हार से फडणवीस के नेतृत्व पर सवाल, शिवसेना ने उठाई CM बदलने की मांग

महाराष्ट्र की MLC चुनावी हार ने महायुति में रार छेड़ दी है। BJP ने शिवसेना पर लगाया गठबंधन धर्म तोड़ने का आरोप; शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग से गरमाई सियासत।

Alakha Singh
Published on: 29 Oct 2026 3:27 PM IST
नागपुर में BJP की हार से फडणवीस के नेतृत्व पर सवाल, शिवसेना ने उठाई CM बदलने की मांग
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Nagpur MLC Election Result 2026: महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ महायुति के भीतर सत्ता और नेतृत्व की लड़ाई को हवा दे दी है। नागपुर में भाजपा की हार के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सियासी पकड़ पर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा ने सहयोगी शिवसेना पर चुनाव में अपेक्षित समर्थन नहीं देने का आरोप लगाकर हार का ठीकरा उसके सिर फोड़ा है, तो शिवसेना नेताओं ने पलटवार करते हुए सीधे नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठा दी है। शिवसेना नेता रविंद्र धंगेकर ने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी कर सियासी बहस को और तेज कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या विधान परिषद की हार महायुति के भीतर दबे असंतोष को खुलकर सामने ले आई है?

नागपुर की हार ने बढ़ाई फडणवीस की मुश्किलें

नागपुर की सीट पर भाजपा की हार राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का संसदीय क्षेत्र होने के साथ-साथ नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय भी है। ऐसे में इस सीट पर भाजपा की हार को विपक्ष और राजनीतिक विरोधियों के लिए सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले के खाते में 63,960 वोट आए। भाजपा के लिए यह नतीजा इसलिए भी झटका है, क्योंकि नागपुर को पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है।

BJP का आरोप-शिवसेना ने नहीं निभाया गठबंधन धर्म

चुनावी नतीजों के बाद भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे और नागपुर के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में शिवसेना ने महायुति के उम्मीदवारों का अपेक्षित सहयोग नहीं किया। उनके मुताबिक, पुणे में आखिरी समय पर सचिन सनव को समर्थन देकर शिवसेना ने गठबंधन की एकजुटता को नुकसान पहुंचाया।

भाजपा प्रवक्ता ने छत्रपति संभाजीनगर में भी शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि यदि सहयोगी दलों ने भाजपा और एनसीपी के उम्मीदवारों का समर्थन किया होता, तो महायुति पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर सकती थी। भाजपा के इस हमले ने गठबंधन के भीतर सीटों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है।

शिंदे को CM बनाने की मांग, फडणवीस के नेतृत्व पर सवाल

भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए शिवसेना नेता रविंद्र धंगेकर ने कहा कि चुनाव में सामने आया असंतोष सरकार के प्रति मतदाताओं की नाराजगी का संकेत है। उन्होंने भाजपा की ओर से शिवसेना को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल उठाते हुए नेतृत्व को जनता के संदेश पर ध्यान देने की नसीहत दी।

धंगेकर ने कहा कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा और शिवसेना सत्ता में आए थे। उनके मुताबिक, शिंदे को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए थी, क्योंकि वह सभी को साथ लेकर चलने में सक्षम हैं। उन्होंने राज्य में नेतृत्व बदलने की मांग करते हुए शिंदे को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी की।

इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह सिर्फ चुनावी हार पर सहयोगियों की जुबानी जंग है या महायुति के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर असंतोष भी सिर उठाने लगा है? हालांकि, धंगेकर की मांग को अभी शिवसेना की आधिकारिक गठबंधन-स्तरीय मांग या मुख्यमंत्री बदलने के किसी फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र की पांच सीटों पर किसे मिली जीत?

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में महायुति को तीन सीटों पर जीत मिली, जबकि विपक्षी दलों ने दो सीटें अपने नाम कीं। भाजपा के कौस्तुभ गावडे ने पुणे शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की, जबकि शिवसेना के किरण सरनाइक अमरावती शिक्षक सीट से विजयी हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटें जीतीं। नागपुर संभाग स्नातक सीट कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के खाते में गई।

महाराष्ट्र विधान परिषद में कुल 78 सदस्य हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा 35 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि शिवसेना के 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 10 सदस्य हैं। इसके बावजूद चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि सदन में संख्या बल के साथ-साथ सहयोगी दलों के बीच तालमेल भी महायुति के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

हार से बड़ा सवाल: महायुति में सब ठीक है?

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब दोनों दल सत्ता में साझेदार हैं। एक ओर भाजपा चुनावी नुकसान के लिए सहयोगियों के रवैये को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं शिवसेना नेता सरकार के नेतृत्व और मतदाताओं की नाराजगी पर सवाल उठा रहे हैं।

नागपुर की हार ने फडणवीस को राजनीतिक निशाने पर ला दिया है, लेकिन विधान परिषद चुनाव के नतीजों से मुख्यमंत्री बदलने का कोई स्वतः निष्कर्ष नहीं निकलता। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि महायुति इस चुनावी झटके के बाद आपसी मतभेद दूर कर पाएगी या सहयोगियों की यह तकरार आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनेगी।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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