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NALSAR विवाद: BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों से मांगी माफी, CJI की फटकार से बदला रुख
NALSAR विवाद में BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों से माफी मांगी। CJI सूर्यकांत की फटकार और रजिस्ट्रेशन रोकने के आदेश के बाद BCI ने फैसला वापस लिया।
NALSAR Controversy, Manan Kumar Mishra: नालसार विश्वविद्यालय के छात्रों से जुड़े विवाद में भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस पर सार्वजनिक रूप से खेद जताते हुए माफी मांगी है। विवाद उस आदेश से शुरू हुआ था, जिसमें इस साल NALSAR से स्नातक करने वाले छात्रों के अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण पर रोक लगाने के लिए राज्य विधिज्ञ परिषदों को निर्देश दिया गया था। हालांकि, BCI ने कुछ ही घंटों में यह आदेश वापस ले लिया था।
मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि हालिया घटनाक्रम से विधि छात्रों के बीच चिंता पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि यदि उनके किसी शब्द, पत्र या संदेश से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका ईमानदारी से खेद है।
'माफी मांगने में प्रतिष्ठा या अहंकार का सवाल नहीं'
BCI अध्यक्ष ने कहा कि छात्रों की भावनाओं और चिंताओं को महत्व देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी बात पर खेद व्यक्त करना प्रतिष्ठा या अहंकार का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि यह स्वीकार करना है कि विद्यार्थियों की भावनाएं भी मायने रखती हैं।
मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र देश के सबसे जागरूक और विवेकशील युवा नागरिकों में शामिल हैं। आज के यही विद्यार्थी भविष्य में अधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता, शिक्षक, कानून विशेषज्ञ और न्यायाधीश बनेंगे तथा इनमें से कुछ आगे चलकर न्यायपालिका और विधि व्यवस्था के शीर्ष पदों तक पहुंच सकते हैं।
CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाने के विरोध से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव और शिक्षकों को पत्र लिखकर दीक्षांत समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया।
इसके बाद BCI अध्यक्ष ने एक परिपत्र जारी कर कथित अभियान और उससे जुड़े आरोपों की जांच की बात कही। परिषद ने कथित तौर पर विरोध के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने वाली रिपोर्ट भी मांगी थी।
इसके साथ ही राज्य विधिज्ञ परिषदों को इस साल NALSAR से स्नातक करने वाले छात्रों का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण नहीं करने का निर्देश दिया गया। इस कदम की कानूनी बिरादरी और छात्रों के बीच तीखी आलोचना हुई।
कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा आदेश
विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया। संशोधित आदेश में कहा गया कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और कुछ विद्यार्थियों के कथित अनुचित आचरण की सजा सभी छात्रों को नहीं दी जानी चाहिए।
यहीं से विवाद ने एक बड़ा संवैधानिक और संस्थागत सवाल खड़ा कर दिया—क्या छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध या असहमति के कारण उनके पेशेवर भविष्य पर असर डाला जा सकता है?
CJI सूर्यकांत ने भी BCI को लगाई थी फटकार
BCI के शुरुआती आदेश पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने छात्रों और अपने बीच के मामले में BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह मामला उनके और विद्यार्थियों के बीच का है।
CJI की इस टिप्पणी के बाद विवाद और गंभीर हो गया और NALSAR विद्यार्थी विधिज्ञ परिषद ने BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से सार्वजनिक माफी की मांग की।
बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के इस साल के स्नातकों, मौजूदा छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी संयुक्त बयान जारी कर ऐसी ही मांग रखी। उन्होंने अपने दीक्षांत समारोह में BCI अध्यक्ष और CJI की मौजूदगी को लेकर भी विरोध जताया।
'विरोध और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा'
अपने ताजा बयान में मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों के विरोध और असहमति के अधिकार को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और असहमति संवैधानिक लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं।
हालांकि, उन्होंने छात्रों से अपील की कि यदि भविष्य में नए तथ्य या स्पष्टीकरण सामने आते हैं तो वे पूरे मामले पर निष्पक्षता से पुनर्विचार करें।
मिश्रा ने कहा कि दीक्षांत समारोह एक विशेष अवसर होता है और उसमें शामिल होना या उससे दूर रहना छात्रों का व्यक्तिगत निर्णय होना चाहिए। किसी भी विद्यार्थी को समारोह में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और न ही किसी छात्र को इससे दूर रहने के लिए मजबूर महसूस करना चाहिए।
BCI अध्यक्ष की अपील: मामले को राजनीतिक रंग न दें
मिश्रा ने छात्रों से यह भी अपील की कि बाहरी प्रभावों के कारण पूरे मामले को राजनीतिक या किसी अन्य रंग में न बदला जाए। उन्होंने निष्पक्षता, संवाद और सुलह की भावना के साथ विवाद का समाधान निकालने पर जोर दिया।
बड़ा सवाल: BCI और लॉ छात्रों के बीच भरोसा कैसे बहाल होगा?
NALSAR विवाद अब सिर्फ एक दीक्षांत समारोह या CJI के मुख्य अतिथि बनने के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। BCI के शुरुआती आदेश, उसका कुछ घंटों में वापस लिया जाना और इसके बाद CJI की सार्वजनिक नाराजगी ने नियामक संस्था और कानून के छात्रों के बीच अधिकार, असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है।
मनन कुमार मिश्रा की माफी इस विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखी जा सकती है। खास तौर पर तब, जब देश के प्रमुख राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के छात्र और पूर्व छात्र BCI के रुख पर सवाल उठा चुके हैं। अब निगाह इस बात पर होगी कि इस माफी के बाद BCI और विधि छात्रों के बीच पैदा हुआ अविश्वास किस तरह दूर होता है।


