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Namo City NCR Project: अब दिल्ली-NCR में नहीं बढ़ेगी भीड़... 4 नए ‘नमो सिटी’ बनाने की तैयारी शुरू
Namo City NCR Project: दिल्ली-NCR में बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक कम करने के लिए 4 नई Namo City बसाने की तैयारी, अगले 5 साल में ₹20,000 करोड़ खर्च होंगे।
Namo City NCR Project 2026
Namo City NCR Project: रोजी-रोजगार का हब बन चुके दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों में लगातार बढ़ रही आबादी के चलते ट्रैफिक का दबाव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस समस्या को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने अब एक बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे। जिन्हें शुरुआती तौर पर ‘नमो सिटी’ के नाम से प्रस्तावित किया गया है। इन शहरों को आधुनिक परिवहन व्यवस्था, हरित विकास और बेहतर शहरी सुविधाओं के मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में इन चारों शहरों पर कुल ₹20,000 करोड़ खर्च करने की योजना है।
NCR में विकसित होंगे चार नए शहर
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। योजना के तहत NCR क्षेत्र में चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे। खास बात यह है कि ये शहर पहले से विकसित इलाकों के विस्तार के रूप में नहीं बल्कि पूरी तरह नई योजना के साथ बसाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों का दबाव मौजूदा शहरों पर कम किया जा सके।
RRTS कॉरिडोर के आसपास विकसित होंगे शहर
प्रस्तावित नमो सिटी को रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) नेटवर्क के आसपास विकसित किया जाएगा। इससे इन शहरों को दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, मेरठ और अन्य प्रमुख शहरी केंद्रों से तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन आधारित विकास का यह मॉडल भविष्य के शहरों के लिए अधिक टिकाऊ साबित हो सकता है। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और ट्रैफिक व प्रदूषण पर भी नियंत्रण मिलेगा।
हर शहर पर खर्च होंगे ₹5,000 करोड़
सरकार की प्रारंभिक योजना के अनुसार प्रत्येक नए शहर के विकास पर अगले पांच वर्षों में लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस तरह चारों परियोजनाओं पर कुल निवेश करीब ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
इन शहरों में आधुनिक सड़कें, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, जल प्रबंधन, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। परियोजना का फोकस केवल रियल एस्टेट विकास नहीं बल्कि संतुलित और टिकाऊ शहरीकरण होगा।
राज्यों से मांगे गए प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने NCR में शामिल चारों राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से संभावित स्थानों के प्रस्ताव मांगे हैं। नए शहरों का चयन प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। यानी जो राज्य बेहतर भूमि उपलब्धता, कनेक्टिविटी, पर्यावरणीय मानकों और विकास की संभावनाओं वाला प्रस्ताव देगा, उसे प्राथमिकता मिल सकती है। इससे राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिलेगी।
विजन 2041 पर हुई अहम चर्चा
बैठक में NCR के दीर्घकालिक विकास खाके ‘रीजनल विजन 2041’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके लिए एक सब-कमेटी गठित की गई है, जिसे 15 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह रिपोर्ट आने वाले वर्षों में NCR के शहरी विकास, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
NCR को तीन जोन में बांटने पर बनी सहमति
बैठक के दौरान हरियाणा सरकार ने NCR क्षेत्र की सीमा घटाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन बोर्ड ने इसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए NCR को तीन अलग-अलग जोन में विभाजित करने पर सहमति बनी है। प्रस्ताव के अनुसार एक कोर जोन होगा, जहां प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कड़े नियम लागू रहेंगे। इसके अलावा दो अन्य जोन बनाए जाएंगे, जहां परिस्थितियों के अनुसार आंशिक प्रतिबंध लागू किए जा सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है।
दिल्ली-NCR के लिए क्यों बेहद खास है यह परियोजना?
दिल्ली-NCR देश का सबसे तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र माना जाता है। पिछले एक दशक में नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों में आबादी, ट्रैफिक और आवास की मांग में तेज वृद्धि हुई है। इसके कारण बुनियादी सुविधाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में नए बसाए गए शहर न केवल आवास और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देंगे। यदि योजना समय पर लागू होती है तो आने वाले वर्षों में NCR का शहरी नक्शा पूरी तरह बदल सकता है और दिल्ली पर बढ़ता दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।


