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‘दिल टूट गया...’, नाना पाटेकर के निधन पर CM योगी-सुवेंदु अधिकारी समेत इन दिग्गज नेताओं ने जताया दुख
Nana Patekar Death: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर CM योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और सुवेंदु अधिकारी समेत कई नेताओं ने दुख जताया।
Nana Patekar Death Condolence: बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी शोक की लहर है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें अपने डोना पाउला स्थित घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया था। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अस्पताल के अनुसार उन्हें सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम कराया जाना है।
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने उनके अभिनय के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में योगदान को भी याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
सीएम योगी ने जताया गहरा दुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय सिनेमा और समाज के लिए महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी नाना पाटेकर का निधन कला जगत की अपूरणीय क्षति है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने विलक्षण अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के जरिए समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की। उन्होंने प्रभु श्रीराम से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिवार व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
गौरतलब है कि अगस्त 2026 में भी सीएम योगी ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की थी। उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों के लिए अभिनेता के काम और उत्तर प्रदेश पुलिस की जागरूकता मुहिम में उनके योगदान का उल्लेख किया था।
सुवेंदु अधिकारी बोले- दिल टूट गया
पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि महान अभिनेता के अचानक निधन की खबर से उन्हें गहरा सदमा लगा है और उनका दिल टूट गया है।
सुवेंदु अधिकारी ने नाना पाटेकर के अभिनय की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा ने अपनी एक सशक्त और अपूरणीय आवाज खो दी है। उन्होंने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'प्रहार' और 'अब तक छप्पन' जैसी फिल्मों में नाना पाटेकर के काम को याद किया।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने केवल किरदारों को पर्दे पर नहीं उतारा, बल्कि उनमें अपनी विशिष्ट और प्रभावशाली शैली से जान डाल दी। अधिकारी ने उनके सामाजिक कार्यों और ग्रामीण समुदायों के प्रति योगदान को भी याद किया और उनके परिवार, दोस्तों तथा प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नितिन गडकरी ने बताया बड़ी क्षति
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाना पाटेकर के निधन को बेहद दुखद और चौंकाने वाला बताया। गडकरी ने कहा कि नाना पाटेकर के साथ उनके बेहद करीबी और मैत्रीपूर्ण संबंध थे।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने पांच दशकों से अधिक समय तक मराठी और हिंदी सिनेमा के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनकी अनूठी संवाद अदायगी और दमदार अभिनय ने कई किरदारों को यादगार बना दिया।
गडकरी ने कहा कि नाना पाटेकर का जाना भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने अभिनेता के सामाजिक कार्यों का भी जिक्र किया और महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में NAAM Foundation के जरिए जल संरक्षण, जल भंडारण और किसानों की मदद के लिए किए गए उनके काम को सराहा।
नितिन गडकरी ने कहा कि किसान आत्महत्या करने वाले परिवारों को नाना पाटेकर की ओर से दी गई सहायता कई परिवारों के लिए सहारा बनी। उन्होंने कहा कि नाना केवल महान कलाकार नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील व्यक्तित्व भी थे।
पांच दशक से ज्यादा लंबा रहा नाना पाटेकर का सफर
नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने थिएटर से अपने अभिनय सफर को आगे बढ़ाया और 1978 में फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 'परिंदा', 'प्रहार', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'अब तक छप्पन', 'नटसम्राट' और 'वेलकम' समेत कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।
वह सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि निर्देशक और लेखक के तौर पर भी सक्रिय रहे। उन्होंने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' का निर्देशन भी किया था। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
किसानों और ग्रामीण समाज के लिए भी किया काम
नाना पाटेकर की पहचान केवल सिनेमा तक सीमित नहीं रही। वह महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर NAAM Foundation के जरिए किसानों और ग्रामीण समुदायों की मदद के लिए काम किया।
मई 2026 में नागपुर के एक कार्यक्रम में भी नाना पाटेकर ने किसानों की परेशानियों और आत्महत्या के मुद्दे पर खुलकर बात की थी। उन्होंने संकट से जूझ रहे किसानों से मदद लेने और कठिन परिस्थितियों में खुद को अकेला न समझने की अपील की थी।
नाना पाटेकर के अचानक निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी पहचान दमदार अभिनय, अलग अंदाज की संवाद अदायगी और सामाजिक सरोकारों से बनी थी। उनके निधन की खबर के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।


