Nana Patekar Kargil War: जॉर्ज फर्नांडिस से मांगी थी इजाजत, 60 दिन सेना के साथ बिताए

Nana Patekar Kargil War Story: नाना पाटेकर कारगिल युद्ध के दौरान करीब 60 दिन सेना के साथ रहे और QRT का हिस्सा बने। जानें जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति और 20 किलो वजन घटने का पूरा किस्सा।

Alakha Singh
Published on: 8 Oct 2026 8:56 AM IST
Nana Patekar Kargil War: जॉर्ज फर्नांडिस से मांगी थी इजाजत, 60 दिन सेना के साथ बिताए
X

Nana Patekar Kargil War: नाना पाटेकर सिर्फ पर्दे पर ही फौजी नहीं बने थे, कारगिल युद्ध के दौरान सच में सेना के साथ 60 दिन बिताए थे। 1999 के कारगिल युद्ध से जुड़ा उनका यह किस्सा आज उनके निधन के बाद एक बार फिर सामने आया है। 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में नाना पाटेकर का गोवा स्थित घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। इसके साथ ही उनके अभिनय के अलावा देश और सेना के प्रति उनके उस जुड़ाव की भी चर्चा हो रही है, जिसके बारे में उन्होंने वर्षों तक ज्यादा बात नहीं की।

जॉर्ज फर्नांडिस से मांगी थी युद्ध क्षेत्र में जाने की इजाजत

नाना पाटेकर ने 2024 में 'द लल्लनटॉप' को दिए इंटरव्यू में कारगिल युद्ध के दौरान सेना के साथ बिताए दिनों का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, जब 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो वह सैनिकों के बीच जाकर उनके साथ काम करना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से संपर्क किया और युद्ध क्षेत्र में जाने की अनुमति मांगी।

शुरुआत में उन्हें बताया गया कि वह एक नागरिक हैं और सीधे सेना का हिस्सा नहीं बन सकते। लेकिन नाना ने अपने सैन्य प्रशिक्षण और निशानेबाजी के अनुभव का हवाला दिया। उन्होंने बताया था कि वह कमांडो ट्रेनिंग ले चुके थे और राष्ट्रीय स्तर पर राइफल शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके थे। इसके बाद उन्हें सेना के साथ जाने की अनुमति मिली।

60 दिन तक अलग-अलग सैन्य इलाकों में रहे

नाना पाटेकर के मुताबिक, वह करीब 60 दिनों तक सेना के जवानों के साथ अलग-अलग इलाकों में रहे। उनके बताए स्थानों में मुगलपुरा, द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा था कि इस दौरान वह आखिरकार सेना की Quick Reaction Team यानी QRT का हिस्सा बने।

हालांकि, नाना ने यह बताने से इनकार कर दिया था कि QRT के साथ रहते हुए उनकी वास्तविक ऑपरेशनल भूमिका क्या थी। उन्होंने साफ संकेत दिया था कि युद्ध क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं है। यही वजह है कि उनके इस अनुभव को “पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चे पर सैनिक के रूप में लड़ना” कहने के बजाय सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में रहना और QRT का हिस्सा बनना कहना अधिक सटीक है।

'प्रहार' की ट्रेनिंग आई काम

नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव कारगिल से काफी पहले शुरू हो चुका था। 1991 की फिल्म 'प्रहार: द फाइनल अटैक' में उन्होंने सेना के अधिकारी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म की तैयारी के दौरान उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण लिया था और मराठा लाइट इन्फेंट्री से ट्रेनिंग का भी जिक्र किया गया है। यही सैन्य पृष्ठभूमि कारगिल के दौरान उनके काम आई।

नाना ने इंटरव्यू में यह भी बताया था कि उन्हें हथियार चलाने और निशानेबाजी का अनुभव था। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 300 मीटर राइफल शूटिंग में हिस्सा लेने की बात कही थी। इसी आधार पर उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के सामने युद्ध क्षेत्र में जाने की इच्छा रखी थी।

76 किलो से 56 किलो रह गया था वजन

कारगिल के कठिन इलाकों में करीब दो महीने बिताने का असर नाना पाटेकर की सेहत और वजन पर भी पड़ा। उन्होंने बताया था कि जब वह वहां पहुंचे थे तो उनका वजन करीब 76 किलो था, लेकिन लौटने तक यह घटकर 56 किलो रह गया था।

यानी करीब 60 दिनों में उनका वजन लगभग 20 किलो कम हो गया। उन्होंने इसके पीछे युद्ध क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों, लगातार शारीरिक मेहनत और वहां के माहौल को वजह बताया था।

'इतना तो देश के लिए कर सकते हैं'

नाना पाटेकर ने इस पूरे अनुभव को अपने लिए प्रचार का विषय नहीं बनाया। उन्होंने कहा था कि वह आम तौर पर कारगिल में बिताए समय के बारे में बात नहीं करते, क्योंकि उन्हें इसकी जरूरत महसूस नहीं होती।

उनका कहना था कि देश के लिए इतना योगदान तो किया ही जा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि सेना के साथ बिताए वे दिन उनके लिए बेहद संतोषजनक और गौरवपूर्ण रहे।

नाना पाटेकर का यह किस्सा इसलिए भी खास है क्योंकि पर्दे पर 'प्रहार' जैसे किरदार निभाने वाले अभिनेता ने कारगिल युद्ध के दौरान वास्तविक सैनिकों के बीच जाकर करीब दो महीने बिताए थे। हालांकि उनकी भूमिका के ऑपरेशनल विवरण आज भी सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन उनके अपने बयान के मुताबिक वह सेना के साथ रहे और QRT का हिस्सा बने थे।

आज जब नाना पाटेकर नहीं रहे...

8 अक्टूबर 2026 को नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, गोवा स्थित उनके घर पर उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

एक अभिनेता के तौर पर नाना पाटेकर की पहचान उनकी दमदार अदायगी और तीखे संवादों से थी, लेकिन उनके जीवन का कारगिल अध्याय बताता है कि देशभक्ति उनके लिए सिर्फ फिल्मों का विषय नहीं थी। उन्होंने 1999 में युद्ध के दौरान सैनिकों के बीच रहकर उस भावना को अपने तरीके से जीने की कोशिश की थी।

Alakha Singh
ABOUT THE AUTHOR

Alakha Singh

alakhsingh2025@hotmail.com

Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

Next Story