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'गिरा हुआ पत्ता नहीं, बरगद है...', नंदीग्राम में TMC ने छोड़ा मैदान, तो ममता ने कांग्रेस को दिया समर्थन! अधीर ने उठाये सवाल
Nandigram Bypoll 2026: नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है और इसी बीच TMC के अपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान से हटाने के बाद कांग्रेस को समर्थन देने के निर्णय को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Nandigram Bypoll 2026
Nandigram Bypoll 2026: पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव (Nandigram Assembly Bypoll) को लेकर एक बड़ी सियासी हलचल तेज हो गई है, जिसे स्पष्टता से देखा जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तरफ से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने के निर्णय ने राज्य में विपक्षी राजनीति (Opposition Politics) के बीच नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है।
बता दे, नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है और इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के अपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान से हटाने के बाद कांग्रेस को समर्थन देने के निर्णय को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Mamata Banerjee ने कांग्रेस उम्मीदवार को दिया समर्थन
Mamata Banerjee ने 18 सितंबर को कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का एलान किया था। उन्होंने कांग्रेस को अपना सहयोगी दल और स्वाभाविक रूप से सहयोगी बताया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि यह निर्णय देश के व्यापक हित और इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस यानी इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा था कि वह विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर बंगाल से एक संदेश देना चाहती हैं। ममता बनर्जी का यह निर्णय ऐसे वक़्त में सामने आया है, जब उनके धड़े की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से कोलकाता में मुलाकात के बाद उपचुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।
पहले उतारा था उम्मीदवार, फिर चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय
ममता बनर्जी के खेमे ने शुरुआत में नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार उतारा था। लेकिन उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के बाद उनके खेमे ने उपचुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया। इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का एलान किया गया।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक, यह कदम ऐसे वक़्त में उठाया गया है जब तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे गंभीर संगठनात्मक संकट (Organizational Crisis) से गुजर रही है। उनका मानना है कि कांग्रेस को समर्थन देना BJP विरोधी मतों को बंटने से रोकने के पूरे प्रयास के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का जवाब भी हो सकता है।
साल 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामले में प्रधान की गिरफ्तारी
ममता बनर्जी की तरफ से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का एलान कुछ ही वक़्त बाद मिलन प्रधान को साल 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन (Nandigram Land Movement) से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया।
ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर साल 1990 के दशक के आखिर में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। उन्होंने वाम मोर्चे को चुनौती देने के लिए TMC बनाई थी। उनका मानना था कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी माकपा का विरोध करने में कांग्रेस पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं थी। हालांकि, इसके बावजूद दोनों दल समय-समय पर बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी का सामना करने के लिए साथ आते रहे हैं।
Congress और TMC पहले भी साथ लड़ चुके हैं चुनाव
ममता बनर्जी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग (NDA) से नाता तोड़ने के बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने साल 2001 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। इसके बाद साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों दल एक साथ आए।
साल 2011 में यह गठबंधन अपने चरम पर पहुंचा था, जब कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने मिलकर पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल लंबे शासन का अंत किया। हालांकि, बाद में नीतियों, सीट बंटवारे और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर दोनों दलों के बीच भयंकर रूप से मतभेद बढ़ते गए और यह साझेदारी टूट गई।
अधीर रंजन चौधरी ने ममता के निर्णय पर खड़े किए सवाल
ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के निर्णय के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने दोनों दलों के बीच तुरंत राजनीतिक नजदीकी की संभावना को अधिक महत्वता नहीं दी। उन्होंने ममता बनर्जी के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को गिरे हुए पत्ते की तरह कमजोर न समझा जाए, बल्कि उसे बरगद की तरह मजबूत मानकर उसका साथ दिया जाए।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि समर्थन कब दिया गया है। उनके अनुसार, यह समर्थन उस वक़्त दिया गया जब ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार चुनाव मैदान से हट गईं। उन्होंने TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी गुटीय टकराव का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि अब उनके पास ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न है, लेकिन उनका खेल खेलने के लिए कोई खिलाड़ी नहीं बचा है। यह टिप्पणी TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के गुटों के बीच लगातार जारी टकराव के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा ममता बनर्जी के धड़े को अस्थायी रूप से दिए गए चुनाव चिह्न के संदर्भ में की गई।
शुभंकर सरकार ने समर्थन का किया स्वागत
वहीं, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार की राय अधीर रंजन चौधरी से अलग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की BJP विरोधी और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ताकतों से मिलने वाले हर समर्थन का खुलकर स्वागत करती है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि बंगाल में सामने आया यह घटनाक्रम विपक्ष को और मजबूती से एकजुट करने वाला कोई नया राजनीतिक रास्ता खोल सकता है।
कांग्रेस नेताओं ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की भी कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और कहा है कि पार्टी लड़ेगी और जीतेगी।
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी का कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन, TMC के उम्मीदवार का मैदान से हटना और इसके बाद कांग्रेस नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ने पश्चिम बंगाल की विपक्षी राजनीति में ज़बरदस्त चर्चा बढ़ा दी है। अब इस पूरे घटनाक्रम को होने वाले 6 अक्टूबर के उपचुनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।


