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नंदीग्राम उपचुनाव में डर गई TMC? कांग्रेस ने खोला गुप्त डील का राज...ममता की पार्टी का पलटवार
Nandigram TMC-Congress Secret Deal: नंदीग्राम उपचुनाव से पहले टीएमसी और कांग्रेस के बीच कथित गुप्त डील का दावा सामने आया है। प्रदीप भट्टाचार्य के आरोपों पर कुणाल घोष ने पलटवार करते हुए किसी भी मदद या समझौते से इनकार किया है।
Nandigram TMC-Congress Secret Deal: पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से पहले राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। राज्य की राजनीति में इन दिनों उस समय हलचल मच गई, जब यह दावा किया गया कि कभी बंगाल में बेहद मजबूत रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराने के लिए अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी से मदद मांगी है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह गलत और आधारहीन बताया है। टीएमसी का साफ कहना है कि उसने किसी भी पार्टी से कोई मदद नहीं मांगी है और वह अपने दम पर चुनाव लड़ने में पूरी तरह सक्षम है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को लेकर टीएमसी पर जमकर तंज कसती नजर आ रही है।
कांग्रेस का बड़ा दावा
विवाद की शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि करीब 15 दिन पहले दिल्ली में टीएमसी के एक शीर्ष नेता ने कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क साधा था। कांग्रेस का दावा है कि टीएमसी ने एक गुप्त चुनावी समझौते का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत टीएमसी चाहती थी कि कांग्रेस नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़े और बदले में रेजीनगर सीट टीएमसी के लिए छोड़ दे। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि अब जब टीएमसी चुनाव हार रही है और खुद को अकेला महसूस कर रही है, तब उसे अचानक कांग्रेस पार्टी के महत्व का अहसास हो रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, नंदीग्राम में अपनी संभावित हार को देखते हुए ही टीएमसी यह मुश्किल सीट कांग्रेस के पाले में डालना चाहती थी।
TMC का तीखा पलटवार
कांग्रेस के इन गंभीर दावों पर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है और इन बातों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कुणाल घोष ने कथित प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर इसे साफ तौर पर नकार दिया। टीएमसी नेताओं का कहना है कि पार्टी ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है और टीएमसी को लेकर फैलाए जा रहे ये दावे केवल एक राजनीतिक भ्रम पैदा करने की कोशिश हैं। टीएमसी का मानना है कि राज्य स्तर पर इस तरह की बयानबाजी से केवल भारतीय जनता पार्टी को ही फायदा पहुंचेगा। टीएमसी ने दोहराया कि पार्टी नंदीग्राम उपचुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी है और वहां की जनता एक बार फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व पर ही अपना विश्वास जताएगी।
नंदीग्राम की साख की लड़ाई
नंदीग्राम की सीट दोनों ही प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है। ऐतिहासिक रूप से 2007 के आंदोलन के बाद से यह सीट टीएमसी का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन 2021 और फिर 2026 में बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने यहां अपनी पकड़ साबित की। इस बार उपचुनाव में सभी दलों ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। टीएमसी ने तमाम अटकलों को खारिज करते हुए नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान, बीजेपी से हसीरानी रथ और वाममोर्चा तथा बागी टीएमसी धड़े ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। नंदीग्राम में आगामी 6 अक्टूबर को मतदान होना है और 9 अक्टूबर को नतीजे आएंगे, जो यह तय करेंगे कि इस हाई-प्रोफाइल सीट पर जनता किसके दावों पर मुहर लगाती है।


