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'मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई...', जब पीएम मोदी के सामने मुक्केबाज ने सुनाया किस्सा, लगे ठहाके
नरेंद्र बेरवाल ने पीएम मोदी से 2015 के वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का मजेदार किस्सा शेयर किया। पाकिस्तानी मुक्केबाज ने कहा था- 'मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई।'
Narendra Berwal PM Modi: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में पुरुषों की 90+ किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान से जुड़े एक दिलचस्प किस्से का जिक्र किया। बेरवाल की कहानी सुनकर पीएम मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और जोर से ठहाके लगाने लगे।
पीएम मोदी को सुनाया 2015 का किस्सा
नरेंद्र बेरवाल ने साल 2015 में हुए वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का एक किस्सा प्रधानमंत्री के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि उस प्रतियोगिता में उनका मुकाबला पाकिस्तान के एक मुक्केबाज से हुआ था। मुकाबला जीतने के बाद दोनों मुक्केबाजों को चोट लगने के कारण अस्पताल जाना पड़ा था।
बेरवाल ने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ उनकी यह पहली फाइट थी। मुकाबले से पहले सेना की ओर से उन्हें साफ निर्देश मिला था कि पाकिस्तान से मुकाबला हारना नहीं है। उन्होंने पहला राउंड 4-1 से और दूसरा राउंड 3-2 से अपने नाम किया।
हालांकि, मुकाबले के दौरान दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में टकरा गए, जिससे दोनों को चोट लगी और कट लगने के बाद टांके लगवाने के लिए अस्पताल जाना पड़ा।
'भाईजान, मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई'
इसके बाद बेरवाल ने पाकिस्तानी मुक्केबाज की कही बात का जिक्र किया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को हंसा दिया।
उन्होंने बताया कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2015 में उनके साथ गए भारतीय आर्मी कोच का नाम भी नरेंद्र राणा था। मुकाबले के बाद पाकिस्तानी मुक्केबाज ने बेरवाल से कहा, 'भाईजान, एक बात बोलूं?' जब बेरवाल ने हां कहा तो उसने कहा कि आपका नाम नरेंद्र है, आपके कोच का नाम नरेंद्र है और आपके प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है।
इसके बाद पाकिस्तानी मुक्केबाज ने मजाकिया अंदाज में कहा कि 'मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई।'
किस्सा सुनकर पीएम मोदी भी खूब हंसे
नरेंद्र बेरवाल की यह बात सुनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। वह जोर-जोर से हंसने लगे। इस दौरान वहां मौजूद अन्य खिलाड़ियों ने भी इस मजेदार किस्से का आनंद लिया और माहौल खुशनुमा हो गया।
नरेंद्र बेरवाल का यह किस्सा भारत-पाकिस्तान के बीच खेल मुकाबले से जुड़ी उस हल्की-फुल्की याद को सामने लाता है, जिसमें कड़े मुकाबले के साथ खिलाड़ियों के बीच का मानवीय और दोस्ताना पक्ष भी देखने को मिला।


