हिमांशु भाऊ ने कैसे बनाई अपराध की दुनिया में पहचान? लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी तक की कहानी

New Delhi News: हिमांशु भाऊ का रोहतक के गांव से अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क तक का सफर, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी और अमेरिका में हिरासत में लिए जाने की पूरी कहानी।

Newstrack Network
Published on: 25 Oct 2026 10:02 PM IST
हिमांशु भाऊ ने कैसे बनाई अपराध की दुनिया में पहचान? लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी तक की कहानी
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फोटो-सोशल मीडिया

New Delhi: हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव का एक किशोर, जिसकी पहचान कभी कबड्डी खेलने वाले एक सामान्य छात्र के रूप में होती थी, कुछ ही वर्षों में उत्तर भारत के संगठित अपराध की दुनिया का चर्चित नाम बन गया। यह कहानी हिमांशु रिटौलिया उर्फ हिमांशु भाऊ की है। वह किशोरावस्था में ही आपराधिक मामलों में फंसा, बाल सुधार गृह पहुंचा, वहां से फरार हुआ और फिर पुलिस के अनुसार हत्या, रंगदारी तथा गैंगवार के आरोपों से जुड़े एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बन गया जिसकी गतिविधियां दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश तक फैल गईं। वर्ष 2022 में संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर विदेश निकलने के बाद भी उसका नाम भारत में होने वाली गोलीबारी और हत्याओं के मामलों में आता रहा। अब 22 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी अधिकारियों ने उसे लास वेगास क्षेत्र में उसके सहयोगी नीरज फरीदपुरिया के साथ हिरासत में लिया है। इस गिरफ्तारी ने उत्तर भारत के दो परस्पर विरोधी आपराधिक गठबंधनों—लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ और नीरज बवाना-बंबीहा से जुड़े नेटवर्क—की प्रतिद्वंद्विता को फिर चर्चा में ला दिया है।

हिमांशु भाऊ की कहानी केवल एक अपराधी के फरार होने और विदेश में पकड़े जाने की कहानी नहीं है। इसमें हरियाणा के गांवों में स्थानीय विवादों से जन्म लेने वाली आपराधिक प्रतिस्पर्धा, किशोर अपराधियों का बड़े गिरोहों से जुड़ना, विदेशों से रंगदारी मांगने के आरोप, सोशल मीडिया के माध्यम से अपराध की जिम्मेदारी लेने की प्रवृत्ति और अपराधियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की चुनौती जैसे अनेक पहलू हैं। पुलिस का आरोप है कि भाऊ ने विदेश में रहते हुए अपने सहयोगियों के माध्यम से व्यापारियों, संपत्ति कारोबारियों और अन्य लोगों को धमकाकर रंगदारी वसूलने तथा हिंसक घटनाओं को अंजाम दिलाने वाला गिरोह संचालित किया। हालांकि उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों, पुलिस के दावों और अदालतों द्वारा सिद्ध अपराधों के बीच अंतर करना आवश्यक है। विभिन्न मामलों में उसकी अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित होगी।

रिटौली गांव का छात्र, जिसे कबड्डी खेलने का शौक था

हिमांशु का पूरा नाम हिमांशु रिटौलिया बताया जाता है। उसका परिवार हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव से संबंधित है। वर्ष 2003 के आसपास जन्मे हिमांशु की उम्र 2026 में लगभग 23 वर्ष है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में उसकी उम्र 24 वर्ष भी बताई गई है। गांव के लोगों के अनुसार बचपन में वह सामान्य छात्र था और कबड्डी खेलने में रुचि रखता था। लगभग 14 वर्ष की उम्र में वह स्थानीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगा था। रोहतक जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कबड्डी मुकाबलों में उसके खेलने की जानकारी भी सामने आई है।

वर्ष 2024 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने रिटौली गांव जाकर हिमांशु के शुरुआती जीवन की पड़ताल की थी। गांव में पशु आहार की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति ने बताया था कि वह उन प्रशिक्षकों में शामिल था जिन्होंने स्कूली बच्चों को कबड्डी सिखाई थी। हिमांशु भी उनमें से एक था और स्थानीय प्रतियोगिताओं में भाग लेता था। उनके अनुसार आपराधिक प्रवृत्ति वाले कुछ लोगों की संगति में आने के बाद उसके जीवन की दिशा बदलने लगी।

उसके परिवार के एक सदस्य का आपराधिक मामलों से जुड़ा इतिहास भी पुलिस की पड़ताल में सामने आया है। पुलिस के अनुसार हिमांशु के चाचा शोकी पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और रंगदारी जैसे आरोपों से जुड़े मुकदमे दर्ज रहे हैं। वह यमुनानगर जेल में बंद था और पैरोल पर गांव आता रहता था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि हिमांशु के किशोर जीवन पर उसका प्रभाव पड़ा होगा। हालांकि किसी रिश्तेदार के आपराधिक इतिहास के आधार पर हिमांशु की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। यह उसके परिवेश को समझने का एक संदर्भ है, न कि उसके अपराधी बनने का स्थापित कारण।

2018 में पहला मुकदमा, गांव के शराब कारोबार से जुड़ा था विवाद

हिमांशु का नाम पुलिस रिकॉर्ड में पहली बार अप्रैल 2018 में सामने आया। उस समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष थी। पुलिस के अनुसार गांव में शराब के कारोबार से संबंधित विवाद के दौरान मारपीट और उपद्रव की घटना हुई थी। इस मामले में हिमांशु के खिलाफ दंगा और मारपीट से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। बताया गया कि विवाद के दौरान एक बस चालक के साथ मारपीट की गई थी।

यह मामला उसके जीवन का पहला ज्ञात आपराधिक प्रकरण था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर विवादों और हिंसक घटनाओं में उसका नाम आने लगा। उस समय वह न तो किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का चर्चित चेहरा था और न ही उसके पास वैसा संगठन था जो बाद के वर्षों में पुलिस की जांच का विषय बना।

हरियाणा पुलिस के पुराने रिकॉर्ड और गांव के लोगों से बातचीत पर आधारित रिपोर्टों में वर्ष 2018 को हिमांशु के अपराध से जुड़ाव की शुरुआत माना गया है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में वर्ष 2020 के हत्या के प्रयास वाले मामले को उसके आपराधिक जीवन की वास्तविक शुरुआत बताया गया है। इन दोनों विवरणों में अंतर इसलिए है क्योंकि 2018 उसका पहला दर्ज विवाद बताया जाता है, जबकि 2020 का मामला अधिक गंभीर हिंसक अपराध से संबंधित था।

17 वर्ष की उम्र में बाल सुधार गृह पहुंचा, फिर वहीं से फरार

वर्ष 2020 में हिमांशु के जीवन में एक और महत्वपूर्ण मोड़ आया। उस पर हत्या के प्रयास से संबंधित मामला दर्ज हुआ और उसे हिसार स्थित बाल सुधार गृह भेजा गया। उस समय उसकी उम्र लगभग 17 वर्ष थी। पुलिस के अनुसार सुधार गृह पहुंचने के कुछ समय बाद ही वह अन्य किशोर बंदियों के साथ वहां से भाग निकला।

अक्टूबर 2020 में हुई इस घटना के दौरान करीब 20 अन्य बंदी भी फरार हुए थे। बाद में अधिकांश को दोबारा पकड़ लिया गया, लेकिन हिमांशु पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। यह फरारी उसके आपराधिक इतिहास की निर्णायक घटनाओं में गिनी जाती है, क्योंकि इसके बाद वह लंबे समय तक सामान्य पुलिस निगरानी से दूर रहा और उसके खिलाफ गंभीर मामलों की संख्या बढ़ती गई।

पुलिस की जांच के अनुसार वर्ष 2020 से 2024 के बीच उसके नाम से जुड़े 20 से अधिक आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आई। इनमें से कम से कम 16 मुकदमे हत्या अथवा हत्या के प्रयास से संबंधित बताए गए थे। हालांकि अलग-अलग समय और एजेंसियों की सूचियों में मामलों की कुल संख्या भिन्न रही है।

बाल सुधार गृह से भागने के बाद हिमांशु के बारे में यह धारणा बनने लगी कि वह गिरफ्तारी से बचते हुए स्थानीय आपराधिक समूहों से अपने संबंध मजबूत कर रहा है। इसी दौर में उसके नाम का जुड़ाव रोहतक और आसपास के सक्रिय गिरोहों से होने लगा।

रिटौली के स्थानीय गैंगवार ने बढ़ाई हिंसक प्रतिद्वंद्विता

हिमांशु के आपराधिक जीवन में रोहतक के स्थानीय गैंगवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पुलिस के अनुसार रिटौली क्षेत्र में हिमांशु से जुड़े लोगों और अंकित बाबा उर्फ लक्की के गिरोह के बीच लंबे समय से विवाद चलता रहा है। इस प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत वर्ष 2019 के आसपास एक कार की किस्त के भुगतान को लेकर हुए विवाद से संबंधित बताई गई है। बाद में यह व्यक्तिगत विवाद हिंसक गैंगवार में बदल गया।

मार्च 2022 में रिटौली गांव में हिमांशु के चचेरे भाई रोहित बजरंग और उसके चाचा राजेंद्र की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड को स्थानीय गिरोहों की प्रतिद्वंद्विता से जोड़ा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बदले की हिंसा और बढ़ी।

वर्ष 2025 में इसी पुरानी रंजिश से जुड़े एक अन्य मामले में दीपक धनखड़ नामक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया था कि रिटौली में अनिल कुमार नामक व्यक्ति की हत्या पुराने दोहरे हत्याकांड का बदला लेने के लिए की गई थी। पुलिस के अनुसार अनिल पर 2022 की घटना से जुड़े आरोप थे। दीपक धनखड़ पर उसकी हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया गया।

यह स्थानीय प्रतिद्वंद्विता लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से हिमांशु की व्यापक दुश्मनी से अलग थी। दोनों को एक ही गैंगवार मानना सही नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर बाबा गिरोह से उसका संघर्ष था, जबकि बाद में बड़े आपराधिक गठबंधनों से जुड़ने के कारण उसका नाम बिश्नोई-गोल्डी बराड़ नेटवर्क के विरोधियों में शामिल होने लगा।

नीरज बवाना और नवीन बाली के गठबंधन से जुड़ा नाम

उत्तर भारत में संगठित अपराध के कुछ नेटवर्क लंबे समय से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र में नीरज बवाना और नवीन बाली जैसे नाम आपराधिक मामलों में सामने आते रहे हैं। पंजाब से जुड़े बंबीहा गिरोह के साथ इनके कथित संपर्कों और सहयोग की भी पुलिस रिपोर्टों में चर्चा होती रही है।

हिमांशु भाऊ के आपराधिक नेटवर्क को इसी व्यापक गठबंधन से जुड़ा बताया जाता है। पुलिस के अनुसार वह नीरज बवाना, नवीन बाली और बंबीहा समूह से संबंधित व्यक्तियों के संपर्क में आया। बाद में उसके गिरोह का नाम इन समूहों के साथ कई आपराधिक घटनाओं में सामने आने लगा।

इस गठबंधन के दूसरे पक्ष में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े नेटवर्क का नाम आता है। पंजाब और दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र में इन समूहों से संबंधित व्यक्तियों के बीच लंबे समय से आपराधिक प्रतिद्वंद्विता रही है। यह प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय प्रभाव, आपसी रंजिश और अपराध से होने वाली अवैध कमाई जैसे मुद्दों से जुड़ी रही है।

हिमांशु को बिश्नोई गिरोह का विरोधी इसी व्यापक आपराधिक गठबंधन के संदर्भ में माना जाता है। लेकिन प्रत्येक हिंसक घटना को सीधे हिमांशु और लॉरेंस बिश्नोई के व्यक्तिगत संघर्ष का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। कई मामलों में अलग-अलग स्थानीय गिरोहों की अपनी रंजिशें भी रही हैं।

वर्ष 2022 में विदेश भागा, फर्जी पासपोर्ट ने खोल दिया दूसरा अध्याय

अपराध के मामलों में पुलिस की तलाश तेज होने के बीच हिमांशु भाऊ वर्ष 2022 में भारत से बाहर निकल गया। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाया और उसी की सहायता से विदेश यात्रा की। विभिन्न रिपोर्टों में बताया गया है कि वह पहले दुबई और फिर पुर्तगाल पहुंचा। कुछ विवरणों में उसके बाद कनाडा और अमेरिका जाने का उल्लेख भी है। हालांकि उसकी प्रत्येक यात्रा की तारीख और मार्ग के बारे में सभी एजेंसियों का एक समान आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

मूल समाचार में अगस्त 2022 में उत्तर प्रदेश के बरेली से 'कुनाल सिंह' नाम पर पासपोर्ट बनवाने का उल्लेख है। लेकिन 24 अक्टूबर को सामने आई अमेरिकी हिरासत संबंधी जानकारी में उसकी पहचान 'हिमांशु सिगरोहा' नाम से दर्ज बताई गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन रिकॉर्ड से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार हिमांशु ने इसी नाम से दस्तावेज तैयार कराए थे। इसलिए यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि उसने विदेश यात्रा के अलग-अलग चरणों में कितनी पहचानें इस्तेमाल कीं और मूल भारतीय पासपोर्ट के दस्तावेज क्या थे।

पुर्तगाल पहुंचने के बाद भी भारतीय पुलिस का आरोप है कि हिमांशु ने अपराध से जुड़े अपने संपर्क समाप्त नहीं किए। इसके विपरीत उसने विदेश में रहते हुए अपने सहयोगियों के माध्यम से गिरोह का संचालन जारी रखा। पुलिस के अनुसार उसका नेटवर्क भारत में सक्रिय लोगों के जरिए धमकियां देने, रंगदारी मांगने और हिंसक वारदातों को अंजाम देने के मामलों में सामने आया।

वर्ष 2023 में इंटरपोल ने भारतीय जांच एजेंसियों के अनुरोध पर उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया। यह अगस्त 2023 की घटना थी। उस समय उसे हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, आपराधिक धमकी और दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े मामलों में वांछित बताया गया था।

इंटरपोल का रेड नोटिस कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता जो सभी देशों की पुलिस को स्वतः गिरफ्तारी का अधिकार दे दे। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की एजेंसियों को किसी वांछित व्यक्ति की पहचान और स्थान का पता लगाने तथा संबंधित देश के कानून के अनुसार अस्थायी हिरासत की कार्रवाई में सहयोग देना होता है।

विदेश में रहकर दिल्ली-एनसीआर में रंगदारी का कथित नेटवर्क

पुलिस के अनुसार हिमांशु भाऊ के गिरोह की गतिविधियां मुख्यतः दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और आसपास के राज्यों में केंद्रित थीं। उसका नाम विशेष रूप से व्यापारियों और संपत्ति कारोबारियों को धमकियां देने तथा उनसे बड़ी रकम मांगने वाले मामलों में सामने आया।

इन मामलों में गिरोह के सदस्य कथित तौर पर किसी कारोबारी को फोन पर धमकी देते, फिर उसके प्रतिष्ठान के आसपास फायरिंग की घटना सामने आती। कुछ घटनाओं के बाद सोशल मीडिया या पर्चों के माध्यम से गिरोह का नाम भी सामने आया। जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसी घटनाओं का उद्देश्य भय पैदा करना और रंगदारी की मांग को अधिक गंभीर दिखाना था।

हिमांशु के गिरोह से जुड़े मामलों में विदेशी नंबरों से आने वाली कॉल और सोशल मीडिया पर आपराधिक घटनाओं की जिम्मेदारी लेने के दावे बार-बार सामने आए। इससे पुलिस के सामने यह चुनौती बढ़ी कि घटनास्थल पर मौजूद हमलावरों और विदेश में बैठे कथित संचालकों के बीच संबंधों को प्रमाणित कैसे किया जाए।

इस प्रकार के नेटवर्क के बारे में पुलिस का कहना है कि इनके अलग-अलग सदस्य स्थानीय स्तर पर आपराधिक घटनाओं में शामिल हो सकते हैं, जबकि विदेश में मौजूद व्यक्ति कथित रूप से निर्देश देने और संपर्क बनाए रखने की भूमिका निभाता है। लेकिन किसी खास घटना में विदेशी संचालक की जिम्मेदारी निर्धारित करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, संचार संबंधी साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन और अन्य प्रमाण आवश्यक होते हैं।

मई 2024 : तिलक नगर कार शोरूम पर गोलियों की बौछार और पांच करोड़ की मांग

हिमांशु भाऊ का नाम दिल्ली में व्यापक स्तर पर चर्चा में आने की एक प्रमुख घटना छह मई 2024 को हुई। पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर स्थित फ्यूजन कार शोरूम में हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। शोरूम में मौजूद लोगों के बीच अफरातफरी मच गई। कांच टूटने और गोलीबारी के कारण सात लोग घायल हुए।

पुलिस के अनुसार हमलावरों ने घटनास्थल पर एक पर्चा छोड़ा था, जिसमें भाऊ, नीरज फरीदपुरिया और नवीन बाली से संबंधित नाम दर्ज थे। इसके बाद शोरूम मालिक को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से फोन आया और पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई।

इस घटना ने दिल्ली पुलिस को हिमांशु भाऊ के नेटवर्क की जांच तेज करने पर मजबूर किया। पुलिस ने आरोप लगाया कि वारदात उसके गिरोह से जुड़े हमलावरों ने अंजाम दी थी। बाद में केतन नामक एक व्यक्ति को सहायता उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जबकि मोहित रिढाऊ को कोलकाता से पकड़ा गया। पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि गोलीबारी के निर्देश विदेश में मौजूद हिमांशु भाऊ से मिले थे।

यह घटना केवल गोलीबारी का मामला नहीं थी। इससे पुलिस के सामने यह सवाल भी आया कि विदेश में मौजूद कथित संचालक और दिल्ली में काम करने वाले अपराधियों के बीच किस स्तर का समन्वय था। इसके बाद विशेष प्रकोष्ठ ने गिरोह से जुड़े कई व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर बढ़ाई।

मई 2024 : शार्पशूटर अजय उर्फ गोली पुलिस मुठभेड़ में मारा गया

तिलक नगर गोलीबारी की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिमांशु भाऊ गिरोह से जुड़े बताए जाने वाले अजय सिगरोहा उर्फ गोली की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार अजय गोलीबारी और अन्य गंभीर अपराधों में वांछित था।

16 और 17 मई 2024 की मध्यरात्रि को बाहरी दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में पुलिस और अजय के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस ने दावा किया कि रोकने का संकेत देने पर उसने गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।

अजय पर सोनीपत के मुरथल क्षेत्र में एक कारोबारी की हत्या से संबंधित आरोप भी थे। पुलिस ने उसे भाऊ गिरोह का महत्वपूर्ण शूटर बताया था। उसकी मृत्यु के बाद पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रखी।

हालांकि इस मुठभेड़ को लेकर हिमांशु भाऊ की ओर से सोशल मीडिया पर अलग दावा भी किया गया था। उसने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। पुलिस ने अपने आधिकारिक विवरण में गोलीबारी के बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करने की बात कही थी। इसलिए पुलिस मुठभेड़ के घटनाक्रम और उसकी वैधता को संबंधित आधिकारिक जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से अलग नहीं माना जा सकता।

जून 2024 : राजौरी गार्डन का बर्गर किंग हत्याकांड

हिमांशु भाऊ गिरोह से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में जून 2024 का दिल्ली का बर्गर किंग हत्याकांड शामिल है। पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित एक बर्गर किंग रेस्तरां में 18 जून की रात अमन जून नामक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

हमलावरों ने रेस्तरां के भीतर युवक पर कई गोलियां चलाई थीं। सार्वजनिक स्थान पर हुई इस हत्या से दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हुई। पुलिस की जांच में सामने आया कि घटना एक सुनियोजित हमला हो सकती है और इसके पीछे पुरानी आपराधिक रंजिश की आशंका थी।

हत्या के बाद हिमांशु भाऊ के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई, जिसमें वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। पुलिस ने इस दावे को जांच में शामिल किया। घटना में शामिल कथित हमलावरों तथा उनकी सहायता करने वाले लोगों की तलाश शुरू हुई।

इस मामले में एक महिला की भूमिका भी जांच में सामने आई थी, जिस पर अमन को रेस्तरां तक बुलाने का आरोप लगा। दिल्ली पुलिस ने वारदात से पहले की गतिविधियों, संबंधित व्यक्तियों के संपर्क और हत्या के पीछे संभावित गैंगवार की पड़ताल की।

पुलिस ने इस हत्या को हिमांशु भाऊ के व्यापक आपराधिक नेटवर्क से जुड़े मामलों में शामिल किया, लेकिन सभी आरोपियों की भूमिका और साजिश का अंतिम निर्धारण अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों पर निर्भर करेग

जुलाई 2024 : तीन संदिग्ध शूटरों की मुठभेड़ में मौत, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

बर्गर किंग हत्याकांड की जांच के दौरान हरियाणा के सोनीपत में जुलाई 2024 में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। दिल्ली पुलिस और हरियाणा की विशेष कार्यबल की संयुक्त कार्रवाई में तीन कथित अपराधी मुठभेड़ में मारे गए।

पुलिस ने इन व्यक्तियों को हिमांशु भाऊ गिरोह से संबंधित बताया। यह कार्रवाई बर्गर किंग हत्याकांड से जुड़े संदिग्धों की तलाश के दौरान हुई थी।

हालांकि मुठभेड़ के बाद मृतकों के परिजनों ने पुलिस के घटनाक्रम पर सवाल उठाए। हिमांशु भाऊ की ओर से भी सोशल मीडिया पर पहले कुछ सहयोगियों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया था। दूसरी ओर, पुलिस का कहना था कि संबंधित व्यक्तियों ने हथियारों से हमला किया था और जवाबी गोलीबारी में उनकी मृत्यु हुई।

यह घटनाक्रम उस समय चर्चा में इसलिए भी रहा क्योंकि गिरोह से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ लगातार हिंसक पुलिस कार्रवाइयों और उन कार्रवाइयों की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे थे।

सितंबर 2024 : नारायणा के कार शोरूम पर फिर गोलीबारी

तिलक नगर की घटना के लगभग पांच महीने बाद 27 सितंबर 2024 को दिल्ली के नारायणा इलाके में एक अन्य कार शोरूम पर गोलीबारी हुई। तीन हमलावरों ने कार स्ट्रीट मिनी नामक प्रतिष्ठान पर 20 से अधिक गोलियां चलाईं।

हमलावरों ने घटनास्थल पर एक पर्चा छोड़ा, जिसमें 'भाऊ गैंग, सिंस 2020' लिखा हुआ था। पुलिस के अनुसार इस घटना के पीछे भी रंगदारी की मांग का संदेह था। शोरूम मालिक से लगभग पांच करोड़ रुपये मांगने की बात सामने आई।

इस बार गोलीबारी में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं थी, लेकिन घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज की। बाद में अरमान खान सहित कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।

अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार व्यक्तियों में एक पूर्व जूनियर अंतरराष्ट्रीय किकबॉक्सर का नाम भी शामिल था। पुलिस के अनुसार हमलावरों ने कथित रूप से हिमांशु भाऊ के नाम पर रंगदारी की मांग की थी।

इन दो बड़ी कार शोरूम गोलीबारी की घटनाओं ने हिमांशु भाऊ के गिरोह की कथित कार्यप्रणाली को चर्चा में ला दिया। पुलिस के सामने सवाल था कि विदेश में रह रहा एक वांछित व्यक्ति भारत में अपराध के आरोपों से जुड़े लोगों से किस तरह संपर्क बनाए हुए है और उसके नेटवर्क में कौन-कौन सक्रिय है।

बिश्नोई गिरोह से दुश्मनी और बंबीहा समूह से निकटता

हिमांशु भाऊ की अपराध कथा में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से उसका टकराव महत्वपूर्ण है। हालांकि इस प्रतिद्वंद्विता को समझने के लिए पहले पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के आपराधिक नेटवर्क के पुराने संबंधों को देखना आवश्यक है।

पंजाब में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े व्यक्तियों तथा दविंदर बंबीहा के नाम से पहचाने जाने वाले विरोधी समूहों के बीच लंबे समय से हिंसक प्रतिद्वंद्विता रही है। दविंदर बंबीहा की वर्ष 2016 में पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु हो गई थी, लेकिन उसके नाम से जुड़े आपराधिक समूह की गतिविधियां बाद के वर्षों में भी सामने आती रहीं।

दिल्ली क्षेत्र में नीरज बवाना और नवीन बाली से जुड़े गिरोहों के कथित संबंध इसी बंबीहा गुट से बताए जाते रहे हैं। हिमांशु भाऊ भी इन्हीं समूहों से जुड़ा बताया जाता है। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों में उसे बिश्नोई-गोल्डी बराड़ नेटवर्क के विरोधी गठबंधन का हिस्सा माना गया है।

इस प्रतिद्वंद्विता की पृष्ठभूमि में स्थानीय अपराध, आपसी हत्याएं, रंगदारी से जुड़ी प्रतिस्पर्धा और पुराने गिरोहों के संबंध शामिल हैं। लेकिन यह कहना कि हिमांशु और लॉरेंस बिश्नोई के बीच किसी एक व्यक्तिगत घटना के कारण दुश्मनी शुरू हुई थी, उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर उचित नहीं होगा।

हिमांशु की पहचान बिश्नोई के विरोधी समूहों के साथ जुड़ने से अधिक स्पष्ट हुई। इस गठबंधन में नीरज फरीदपुरिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जाती है। फरीदपुरिया का संबंध बंबीहा गुट से रहा है और उसके खिलाफ हरियाणा में हत्या तथा अन्य गंभीर अपराधों के मुकदमे दर्ज हैं।

एल्विश यादव के घर फायरिंग ने फिर चर्चा में ला दिया भाऊ गिरोह

अगस्त 2025 में गुरुग्राम में यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी के विजेता एल्विश यादव के घर के बाहर गोलीबारी हुई। इस घटना की जिम्मेदारी लेने वाले सोशल मीडिया संदेशों में हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया से जुड़े नेटवर्क का नाम सामने आया।

घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों की पहचान और गोलीबारी के पीछे के उद्देश्य की जांच शुरू की। प्रारंभिक रिपोर्टों में इसे आपराधिक गिरोहों से संबंधित धमकी की घटना के रूप में देखा गया।

नीरज फरीदपुरिया के नाम से भी इस गोलीबारी की जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया था। हालांकि सोशल मीडिया पर किसी घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करना और अदालत में उस व्यक्ति की आपराधिक भूमिका प्रमाणित होना दो अलग बातें हैं।

इस घटना ने हिमांशु भाऊ के नेटवर्क की सार्वजनिक पहचान को फिर बढ़ा दिया। इससे पहले उसके गिरोह का नाम मुख्य रूप से व्यापारियों से रंगदारी और कार शोरूमों पर गोलीबारी में सामने आता रहा था। अब एक प्रसिद्ध सोशल मीडिया व्यक्तित्व के घर के बाहर हुई गोलीबारी से मामला व्यापक चर्चा में आया।

सितंबर 2026 : जिम संचालक की हत्या में भी आया गिरोह का नाम

हिमांशु भाऊ से जुड़े नेटवर्क की कथित गतिविधियां वर्ष 2026 तक जारी रहने की जानकारी सामने आई है। सितंबर 2026 में दक्षिण दिल्ली के आया नगर क्षेत्र में जिम प्रशिक्षक और संचालक विजय कुमार की हत्या हुई थी।

मामले की जांच के दौरान हिमांशु भाऊ गिरोह की ओर से हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया। इसके बाद पुलिस ने इस वारदात से संबंधित व्यक्तियों और संभावित आपराधिक रंजिश की जांच शुरू की।

25 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में इस हत्या को हिमांशु भाऊ के नेटवर्क से जुड़े नवीनतम प्रमुख मामलों में शामिल किया गया है। हालांकि जांच एजेंसियों को यह स्थापित करना होगा कि हत्या की योजना किसने बनाई, हमलावरों को किसने सहायता दी और विदेशी संपर्क से संबंधित आरोपों के समर्थन में कौन-से साक्ष्य उपलब्ध हैं।

इस प्रकार हिमांशु भाऊ के नाम से जुड़ी आपराधिक घटनाओं का क्रम वर्ष 2024 की चर्चित गोलीबारी से आगे भी जारी रहा। भारतीय जांच एजेंसियों के लिए यह स्थिति गंभीर चुनौती थी क्योंकि एक ओर गिरोह से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारियां हो रही थीं, दूसरी ओर नए मामलों में उसका नाम सामने आ रहा था।

नीरज फरीदपुरिया कौन है, जो अमेरिका में साथ पकड़ा गया?

हिमांशु भाऊ के साथ अमेरिकी अधिकारियों की हिरासत में लिया गया नीरज फरीदपुरिया भी हरियाणा के आपराधिक मामलों में लंबे समय से चर्चित नाम रहा है। उसका दूसरा नाम नीरज कौशिक बताया जाता है। वह हरियाणा के पलवल जिले के फरीदपुर क्षेत्र से संबंधित है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नीरज के खिलाफ 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। वर्ष 2012 में हरियाणा पुलिस ने उसे एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। वर्ष 2015 में हत्या के एक मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि वर्ष 2019 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से उसे जमानत मिली।

जून 2019 में फरीदाबाद में कांग्रेस प्रवक्ता विकास चौधरी की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। इसके बाद उसके विदेश जाने की जानकारी मिली। रिपोर्टों के अनुसार वह दुबई के रास्ते कनाडा पहुंचा और बाद में अमेरिका चला गया।

विदेश में रहते हुए नीरज का नाम बंबीहा गुट से जुड़े नेटवर्क के संचालन में सामने आया। बाद के वर्षों में हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया के आपसी सहयोग की जानकारी पुलिस जांच में मिली। इसी कारण उनकी एक साथ गिरफ्तारी भारतीय एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अमेरिकी इमिग्रेशन रिकॉर्ड में नीरज की पहचान 'नीरज कौशिक' के नाम से दर्ज बताई गई है। पुलिस के अनुसार उसने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।

वर्ष 2026 : आखिर लास वेगास में कैसे पहुंची पुलिस?

22 अक्टूबर 2026 को हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका के नेवादा राज्य में लास वेगास क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। हरियाणा की विशेष कार्यबल द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर अमेरिकी एजेंसियों ने कार्रवाई की।

दोनों अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी, यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी आईसीई, की हिरासत में हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्हें नेवादा के हेंडरसन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। यह केंद्र लास वेगास के निकट स्थित है।

कुछ शुरुआती समाचारों में गिरफ्तारी का श्रेय अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो एफबीआई को दिया गया था। हालांकि बाद में सामने आए आधिकारिक विवरणों और हिरासत संबंधी सूचनाओं में आईसीई की भूमिका अधिक स्पष्ट हुई है। इसलिए दोनों की गिरफ्तारी केवल एफबीआई ने की, यह दावा अभी स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है।

अमेरिकी हिरासत संबंधी रिकॉर्ड में हिमांशु का नाम 'हिमांशु सिगरोहा' और नीरज का नाम 'नीरज कौशिक' बताया गया है। दोनों के वास्तविक नाम और भारत में उनके खिलाफ दर्ज मामलों का मिलान अब कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

फर्जी पहचान और अमेरिका में शरण लेने का प्रयास बना गिरफ्तारी की कड़ी?

हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी के बाद उसके विदेश प्रवास और आव्रजन स्थिति से संबंधित नई जानकारियां सामने आ रही हैं। भारतीय जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर विदेश जाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।

25 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह संभावना भी जताई गई कि अमेरिका में शरण प्राप्त करने के प्रयास के दौरान उसकी वास्तविक पहचान और पुराने दस्तावेजों का अंतर जांच एजेंसियों के सामने आया। हालांकि इस संबंध में उपलब्ध सार्वजनिक विवरण अभी सीमित हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी किसी शरण याचिका पर क्या निर्णय हुआ था या गिरफ्तारी में उस प्रक्रिया की कितनी भूमिका रही।

फिलहाल भारतीय एजेंसियां उसके कथित फर्जी पासपोर्ट और पहचान संबंधी दस्तावेजों को अमेरिका से वापसी की कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार मान रही हैं।

अब भारत कैसे लाया जाएगा हिमांशु भाऊ?

अमेरिका में हिरासत के बाद हिमांशु भाऊ को भारत लाने के लिए हरियाणा पुलिस, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और अन्य संबंधित एजेंसियां समन्वय कर रही हैं।

इस मामले में दो कानूनी रास्तों की चर्चा है। पहला, अमेरिकी आव्रजन कानूनों के तहत निष्कासन यानी डिपोर्टेशन। यदि अमेरिकी प्रशासन या संबंधित न्यायिक प्राधिकरण यह निर्धारित करता है कि हिमांशु ने गलत पहचान, फर्जी दस्तावेज या आव्रजन नियमों का उल्लंघन किया है, तो कानून के अनुसार उसे देश से निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

दूसरा रास्ता भारत और अमेरिका के बीच लागू प्रत्यर्पण संधि के तहत औपचारिक प्रत्यर्पण है। इसमें भारतीय एजेंसियों को संबंधित मुकदमों, गिरफ्तारी वारंट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर कानूनी अनुरोध प्रस्तुत करना होगा।

सीबीआई भारत में इंटरपोल से संबंधित मामलों की नोडल एजेंसी है। इसलिए वह अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर संबंधित दस्तावेजों और अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क की प्रक्रिया में भूमिका निभा रही है।

हालांकि कुछ शुरुआती रिपोर्टों में 30 से 90 दिन के भीतर हिमांशु के भारत आने की संभावना जताई गई थी, लेकिन यह कोई सुनिश्चित कानूनी समयसीमा नहीं है। अमेरिकी आव्रजन अदालत की प्रक्रिया, पहचान संबंधी विवाद, संभावित अपील और प्रत्यर्पण की आवश्यकताओं के कारण समय अलग-अलग हो सकता है।

18 मुकदमे, 30 मामले या 50 से अधिक? आपराधिक रिकॉर्ड के आंकड़ों में अंतर क्यों?

हिमांशु भाऊ के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या को लेकर विभिन्न समाचार रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। अगस्त 2023 में इंटरपोल नोटिस जारी होने के समय उसे 18 मामलों में वांछित बताया गया था। वर्ष 2024 तक कुछ पुलिस विवरणों में उसके खिलाफ 20 से अधिक मामलों का उल्लेख मिलता है, जिनमें अनेक हत्या और हत्या के प्रयास से संबंधित थे।

अक्टूबर 2026 की कुछ रिपोर्टों में हरियाणा में उसके नाम से जुड़े लगभग 30 मामलों की चर्चा है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में उसके और उसके गिरोह से संबंधित 50 से अधिक मुकदमों का उल्लेख किया गया है। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी व्यक्ति के विरुद्ध व्यक्तिगत रूप से दर्ज प्राथमिकी, किसी गिरोह के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमे और विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा सूचीबद्ध मामले समान नहीं होते।

किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक रिकॉर्ड का सही आकलन करने के लिए प्रत्येक मुकदमे का नंबर, संबंधित पुलिस थाना, आरोपित धाराएं, आरोपपत्र और अदालत में उसकी वर्तमान स्थिति देखना आवश्यक होता है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों से हिमांशु भाऊ के सभी मामलों की एक समेकित और अद्यतन आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं हुई है।

इसलिए उसके खिलाफ 50 से अधिक मुकदमे व्यक्तिगत रूप से दर्ज होने का दावा निश्चित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। इतना पुष्ट है कि वह हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, आपराधिक धमकी और दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े अनेक मामलों में भारतीय एजेंसियों को वांछित रहा है।

क्या हिमांशु की गिरफ्तारी से बिश्नोई विरोधी गठबंधन पर असर पड़ेगा?

हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की एक साथ अमेरिकी हिरासत भारतीय जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। दोनों के नाम ऐसे आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हैं जो लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से संबंधित समूहों के विरोधी माने जाते हैं।

इनकी गिरफ्तारी से पुलिस को कई पुराने मामलों में पूछताछ तथा जांच आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है, बशर्ते उन्हें कानून के अनुसार भारत लाया जाए। विशेष रूप से विदेशी संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और भारत में मौजूद सहयोगियों से संबंधित जांच को नई जानकारी मिल सकती है।

लेकिन यह मान लेना कि दो प्रमुख व्यक्तियों की गिरफ्तारी से किसी पूरे आपराधिक नेटवर्क का अंत हो जाएगा, समय से पहले निष्कर्ष होगा। संगठित अपराध से जुड़े मामलों में अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिकाएं और स्थानीय समूहों के संबंध कई स्तरों पर फैले होते हैं। पुलिस को संबंधित अपराधों के साक्ष्यों के साथ अवैध वित्तीय गतिविधियों और अन्य आरोपियों की जिम्मेदारी भी स्थापित करनी होती है।

दिल्ली और हरियाणा पुलिस के लिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह होगा कि विदेश में मौजूद व्यक्तियों के नाम पर हुई वारदातों में वास्तविक निर्देश किसने दिए, धन कहां से आया और स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने अपराधों को अंजाम दिया।

एक किशोर से वांछित गैंगस्टर बनने तक छह साल का सफर

हिमांशु भाऊ की अब तक सामने आई कहानी को देखें तो उसमें कुछ निर्णायक मोड़ दिखाई देते हैं। लगभग 14 वर्ष की उम्र में वह कबड्डी खेलता था। 2018 में पहली बार उसके खिलाफ मारपीट और उपद्रव का मुकदमा दर्ज हुआ। वर्ष 2020 में हत्या के प्रयास के मामले में बाल सुधार गृह पहुंचा और वहां से फरार हो गया। वर्ष 2022 में स्थानीय गैंगवार और परिवार से जुड़े दोहरे हत्याकांड के बाद उसका नाम गंभीर आपराधिक प्रतिस्पर्धा में अधिक प्रमुखता से सामने आया। उसी वर्ष वह संदिग्ध दस्तावेजों की सहायता से विदेश निकल गया।

अगस्त 2023 में इंटरपोल का रेड नोटिस जारी हुआ। वर्ष 2024 में दिल्ली के कार शोरूमों पर गोलीबारी और राजौरी गार्डन के बर्गर किंग हत्याकांड ने उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। वर्ष 2025 में एल्विश यादव के घर के बाहर फायरिंग और 2026 में जिम संचालक की हत्या जैसे मामलों में भी उसके गिरोह का नाम सामने आया। आखिरकार 22 अक्टूबर 2026 को अमेरिका में उसे हिरासत में लिया गया।

यह घटनाक्रम केवल एक व्यक्ति के आपराधिक मामलों की श्रृंखला नहीं है। इसके माध्यम से यह समझा जा सकता है कि स्थानीय हिंसा और किशोरावस्था के अपराध से जुड़े व्यक्ति किस प्रकार बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं। साथ ही यह भी सामने आता है कि विदेशी ठिकानों और डिजिटल संचार के कारण विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों के बीच सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो गया है।

हिमांशु भाऊ की अमेरिकी हिरासत ने भारतीय एजेंसियों के सामने अब एक नई कानूनी चुनौती रखी है। उसे भारत लाना, उसके विरुद्ध दर्ज मामलों के लिए आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करना और वर्षों से चली आ रही जांच को न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचाना अगला चरण होगा।

जिस हिमांशु को कभी गांव में कबड्डी खेलने वाला किशोर माना जाता था, वह आज दो देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच चल रही कार्रवाई का विषय है। उसके जीवन की यह यात्रा व्यक्तिगत चुनावों, स्थानीय आपराधिक परिवेश, गिरोहों की प्रतिस्पर्धा और कानूनी व्यवस्था की चुनौतियों से जुड़ी कहानी है। लेकिन इस कहानी का अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है। अमेरिका की हिरासत के बाद उसके भारत लौटने और विभिन्न मुकदमों की सुनवाई से ही स्पष्ट होगा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में से कौन-से न्यायालय में प्रमाणित होते हैं।

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